मध्यप्रदेश में उर्वरकों की नई दरें तय, पिछले साल 1720 रुपये में बिका एनपीके अब 2450 रुपये में मिलेगा
मध्यप्रदेश में खरीफ सीजन 2026 के लिए उर्वरकों की नई दरें घोषित कर दी गई हैं। एनपीके 12:32:16 का 50 किलोग्राम बैग अब 2450 रुपये में मिलेगा, जो पिछले साल 1720 रुपये था। डीएपी के दाम 1350 रुपये प्रति बैग पर स्थिर रखे गए हैं, जबकि पोटाश और एसएसपी समेत कई उर्वरकों की कीमतों में भारी बढ़ोतरी हुई है।
पश्चिम एशिया में जारी तनाव के चलते उर्वरकों के दाम बढ़ने लगे हैं, जिसका असर खरीफ सीजन में किसानों पर पड़ेगा। मिट्टी और फसल के पोषण में अहम भूमिका निभाने वाले कॉम्प्लेक्स फर्टिलाइजर (एनपीके) की कीमतों में भारी बढ़ोतरी हुई है। मध्यप्रदेश राज्य सहकारी विपणन संघ ने खरीफ सीजन 2026 के लिए रासायनिक उर्वरकों की नई विक्रय दरें निर्धारित की हैं। नई दरों के अनुसार, एनपीके (12:32:16) और एनपीके 10:26:26 का 50 किलोग्राम का बैग अब 2450 रुपये में मिलेगा, जबकि पिछले खरीफ सीजन में इनकी कीमत 1720 रुपये थी।
उर्वरक कंपनियों से प्राप्त निविदाओं के आधार पर मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी विपणन संघ ने खरीफ सीजन 2026 के लिए रासायनिक उर्वरकों की बिक्री दरें निर्धारित की हैं। अब पूरे सीजन के दौरान किसानों को इन्हीं दरों पर रासायनिक उर्वरकों की बिक्री होगी। इनमें यूरिया शामिल नहीं है, क्योंकि यूरिया की बिक्री केंद्र सरकार द्वारा नियंत्रित है और उसके दाम अभी नहीं बढ़े हैं।
इसी तरह विनियंत्रित उर्वरक डाईअमोनियम फॉस्फेट (डीएपी) की कीमत भी 1350 रुपये प्रति 50 किग्रा बैग पर स्थिर रखी गई है। इसके लिए सरकार अतिरिक्त सब्सिडी दे रही है, जिससे इस साल सब्सिडी का बोझ बढ़कर 3 लाख करोड़ रुपये से ऊपर पहुंचने का अनुमान है।
ईरान युद्ध और पश्चिम एशिया में जारी संकट के कारण उर्वरकों और गैस के आयात में बाधाएं आ रही हैं, जिससे उर्वरक उत्पादन प्रभावित हो रहा है। इन परिस्थितियों को देखते हुए उर्वरक कंपनियों ने कॉम्प्लेक्स फर्टिलाइजर के दाम बढ़ाने शुरू कर दिए हैं। पिछले दिनों रूरल वॉयस ने खबर प्रकाशित की थी कि एनपीके उर्वरकों के दाम 2450 रुपये प्रति बैग तक पहुंच गए हैं, जबकि इनमें न्यूट्रिएंट का स्तर डीएपी से कम है।
मध्यप्रदेश राज्य सहकारी विपणन संघ ने एनपीके (16:16:16) का दाम 2050 रुपये प्रति बैग तय किया गया है, जो पिछले साल 1475 रुपये था। अमोनियम सल्फेट का दाम 1400 रुपये प्रति बैग रखा गया है, जो पिछले साल 950 रुपये था। इसी तरह एमओपी (पोटाश) का 50 किग्रा बैग अब 1975 रुपये में मिलेगा, जबकि पिछले साल इसका रेट 1535 रुपये था। सिंगल सुपर फॉस्फेट (दानेदार) का रेट 605 रुपये प्रति बैग तय किया गया है, जो पिछले खरीफ सीजन में 505 रुपये प्रति बैग था। उर्वरकों की कीमतों में हुई भारी बढ़ोतरी का असर खेती की लागत और किसानों की आय पर पड़ेगा।
मध्यप्रदेश राज्य सहकारी विपणन संघ द्वारा एनपीके (20:20:0:13) का रेट अभी तय नहीं किया जा सका है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इस एनपीके वेरिएंट के लिए उर्वरक कंपनियों ने 2100 रुपये प्रति बैग की दर की पेशकश की है, जिसे कम करवाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
उर्वरक उद्योग से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, अमोनिया, सल्फर और सल्फ्यूरिक एसिड की कमी के चलते एनपीके उर्वरकों का उत्पादन भी प्रभावित हो रहा है। देश में सालाना करीब 400 लाख टन यूरिया, करीब 100 लाख टन डीएपी और करीब 140 लाख टन कॉम्प्लेक्स उर्वरकों की खपत होती है। इस समय सरकार का जोर यूरिया और डीएपी की उपलब्धता बढ़ाने पर है और इसके लिए एलएनजी तथा तैयार उर्वरकों की खरीद पर ध्यान दिया जा रहा है। देश के अन्य राज्यों में भी उर्वरकों के दाम कमोबेश इतने ही रहेंगे।
इस बीच, सरकार उर्वरकों की खपत कम करने के प्रयास भी कर रही है। इसके लिए पिछले दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रासायनिक उर्वरकों का उपयोग घटाने और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने पर जोर दिया था। इस सिलसिले में एक कार्ययोजना को जल्द अंतिम रूप दिया जा सकता है, जिसका उद्देश्य रासायनिक उर्वरकों की खपत कम करना है। हालांकि, खरीफ सीजन शुरू हो चुका है और यदि किसानों को सही समय पर उर्वरकों की उपलब्धता नहीं हुई, तो इसका खरीफ उत्पादन पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।



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