अगधी ने आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस टेक्नोलॉजी के जरिये बीज की गुणवत्ता के सटीक आकलन को संभव किया है: निखिल दास

बंगलुरू में स्थित कृषि-तकनीक पर आधारित एक स्टार्टअप “अगधी” ने बीज परीक्षण, बीजों की सैंपलिंग के जरिये उनकी गुणवत्ता के स्तर को परखने के लिए मशीन लर्निंग और कंप्यूटर विज़न टेक्नोलॉजी का उपयोग किया है।

अगधी ने आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस टेक्नोलॉजी के जरिये बीज की गुणवत्ता के सटीक आकलन को संभव किया है: निखिल दास

बंगलुरू में स्थित  कृषि-तकनीक पर  आधारित एक  स्टार्टअप  “अगधी” ने  बीज परीक्षण, बीजों की सैंपलिंग के जरिये उनकी गुणवत्ता के स्तर को परखने के लिए मशीन लर्निंग और कंप्यूटर विज़न टेक्नोलॉजी का उपयोग किया है। यह तकनीक के जरिये बीजों की कीमत तय करने में किसान और बीज खरीदने वाली कंपनियों की प्रक्रिया को सरल करने के साथ ही उसमें लगने वाले समय में भारी कमी लाएगी। जिसका फायदा किसानों और कंपनियों दोनों को मिलेगा।  निखिल दास (पूर्व सीटीओ हैवेल्स, प्रॉम्पटेक एलईडी लाइट्स के संस्थापक) औऱ अंशाद अमीन्जा (अध्यक्ष इनोवेशन इनक्यूबेटर एडवाइजरी, मल्टीपल स्टार्ट-अप्स के लिए सलाहकार है) का ड्रीम प्रोजेक्ट है “अगधि” । रूरल वाइस ने निखिल दास से बातचीत के दौरान उनके स्टार्ट अप में प्रयोग की जाने वाली तकनीक और कृषि क्षेत्र के लिए उसकी उपयोगिता  और उनके स्टार्ट-अप की भविष्य की योजनाओं जैसे विषयों पर निखिल दास से बात की। निखिल दास  के साथ रूरल वाइस के एडिटर इन चीफ  हरवीर सिंह की बातचीत के अंश:

सवाल: आपकी विशेषज्ञता क्या है? इससे पहले आप हनीवेल में रहे हैं और  हैवेल्स और एक एलईडी कंपनी मे भी कार्यरत रहे है । फिर कृषि से जुड़े स्टार्टअप में  आने के पीछे आपकी  सोच क्या थी ? और इस स्टार्टअप का क्या  विजन है ?

जबाब :  एक उद्यमी के रूप में मेरी यात्रा 2006-07 के आसपास शुरू हुई थी , जब मैंने प्रोम्पटेक एलईडी कंपनी के साथ  काम की शुरुआत की । यह कंपनी भारत की  पहली एलईडी लाइटिंग कंपनी थी । यह कंपनी साल 2014  में  भारत की सबसे बड़ी एलईडी लाइटिंग मैन्युफैक्चरिंग कंपनी बन गई जिसमें मेरा बहुत ही महत्वपूर्ण योगदान रहा । इस कंपनी के साथ सफर यूं ही जारी रहा और साल  2015 मे हमें हैवेल्स कंपनी से रणनीतिक निवेश मिला । मैंने हैवेल्स में ग्रूप चीफ टेक्नोलॉजी ऑफिसर (सीटीओ) के रूप में अपना काम करना जारी रखा । जब मैंने साल 2018 में इस कंपनी को छोड़ दिया, तो इसके बाद मैं एक ऐसे क्षेत्र की तलाश में था जहां पर टेक्नोलॉजी के उपयोगी की संभावनाएं तो लेकिन अभी वहां इसकी पहुंच नहीं बन पाई है।  इसलिए, इस बात को ध्यान में रखते हुए, मैंने नए -नए स्टार्ट-अप का सहयोग  करना शुरू किया और उसी  दौरान  मुझे एक बीज कंपनी में दौरा करने का मौका मिला । जनवरी 2020 के दौरान मुझे कृषि में ऐसी तकनीक लाने का विचार आया । जबकि मैं जानता था कि कृषि में बहुत सी नई तकनीकें आ रही हैं। लेकिन आप अगर कृषि में मुख्य तकनीकों पर नजर डाले  तो आप पाएंगे कि जितना मेडिकल और अन्य क्षेत्रो में टेक्नोलॉजी विकसित हुई है, उसके तुलना में कृषि में बहुत कम टेक्नोलॉजी  विकसित हुई है ।

सवाल  :  आप तो मूल रूप से, एलईडी और लाइटिंग कम्पनी में  काम करते थे  जिसमें  आपने एग्रीमेन्ट किया था आप उस क्षेत्र  से संबधित  खुद  की कम्पनी नहीं खोल सकते हैं और  यही कारण है कि  आप उस क्षेत्र में आगे नही बढ़े । इसीलिए आपका रूझान कृषि की तरफ हुआ।  वैसे कृषि में पहले से ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और एनालिटिक्स संबधी तकनीक पर कई कंपनियां काम कर रही हैं। कृषि क्षेत्र के लिए  आपके  स्टार्ट-अप में क्या विशिष्टता है?

जवाब: हमने बहुत सारी कृषि तकनीकों का संज्ञान लिया और पाया कि आज के जमाने में कृषि में कई तकनीक हैं  जिन्हें लोग अपना रहे हैं लेकिन कृषि में जरूरी कामों के लिए इस्तेमाल होने वाली तकनीक का अभाव है ।  कुछ लोग जरूर  इस तरह की तकनीक को विकसित करने की दिशा में कदम बढ़ा रहें हैं।  लेकिन अधिकतर वह तकनीक मोबाइल एप्लीकेशन और सॉफ्टवेयर पर आधारित है । अगर   वास्तविक मशीन और हार्डवेयर प्रक्रिया के दृष्टिकोण से देखा जाय तो अभी इस एरिया में  ज्यादा काम नहीं हुए हैं।  इसलिए हमने  इस  क्षेत्र मे प्रवेश करने की कोशिश की है। और हमने जो तकनीक बनाई है, वह केवल सॉफ्टवेयर नहीं बल्कि एक हार्डवेयर यूनिट है जिसके पास मशीन जैसे काम करने की क्षमता है औऱ  सेल्फ लर्निग की क्षमता है।   हमने कोशिश की कि इसका इस्तेमाल वहां हो सके जहां कृषि मे इसकी आवश्यकता है ।  इस तकनीक का सबसे ज्यादा फायदा किसान को मिलता है। अगर मौजूदा परिस्थिति की बात करें तो उद्योग किसानों को उत्पादक की तरह देखती हैं जहां किसान बीज कंपनियों के लिए बीज का उत्पादन करते हैं। इस तरह से किसान बीज उपजाकर बीज कंपनियों को बीज की आपूर्ति करते हैं।   मगर यहां जो गंभीर समस्या है वह है भुगतान की जो समूची प्रणाली में सुचारू रूप से  काम नहीं कर रही है जिसमे कई कमियां है। इस एरिया में ज्यादा असंतोष है । जहां किसानों को लगता है की उन्हें उनके बीज का सही दाम नही मिल रहा है  वहीं कंपनियों के मन में यह डर  बना रहता है कि उपजाए गये बीजों की क्वालिटी उम्मीद के अनुसार नहीं रहती  है । ज्यादतर बीज कम्पनियां अंकुरण के समय कुछ तौर -तरीको का पालन करती हैं ।  उदाहरण के तौर पर लिया जाय तो बीज अंकुरण  परीक्षण में  दो से तीन सप्ताह का समय लगता है ।  कई बार पौध के उगने के बाद कंपनी उसका परिणाम देखती है । बीज परीक्षण के लिए अपनाया गया यह एक पारंपरिक तरीका है जिसे कंपनियों द्वारा अपनाया जाता है। किसानों को बीज का भुगतान परीक्षण प्रक्रिया के बाद ही मिलता है। लेकिन कभी- कभी बीज परीक्षण में 4-5 महीने का लंबा समय लग जाता है। किसानों के लिए एक और चुनौती यह है कि परीक्षण का  डेटा सार्वजनिक नहीं किया जाता  है ।  बीजों की विभिन्न गुणवत्ता होती है । जैसे  अगर   कुछ बीज  80 प्रतिशत गुणवत्ता वाले हैं तो इसके तुलना में  90 प्रतिशत गुणवत्ता वाले  बीज  का दाम लगभग दोगुना हो जाएगा और 95 प्रतिशत गुणवत्ता वाले  बीज  के दाम  और  अधिक होंगे। वहीं, कभी-कभी ऐसा होता है कि भले ही किसानों को लगता है कि उन्होंने 95 प्रतिशत गुणवत्ता वाले बीजो का उत्पादन किया है, लेकिन उन्हे केवल 85 प्रतिशत गुणवत्ता वाले  बीजों का भुगतान किया जा रहा है ।दूसरी ओर, बीज कंपनियों को लगता है कि 95 प्रतिशत गुणवत्ता बीज का उत्पादन संभव नहीं है। इसलिए केवल 85 प्रतिशत गुणवत्ता बीज के लिए भुगतान करते हैं ।  यहां भले ही दोनों की मंशा एक- दूसरे को धोखा देने ने की न हो , लेकिन दुर्भाग्य से सिस्टम इस तरह से बनाया गया है। इसलिए हमने सोचा क्यों न इसका मानकीकरण किया जाए ? हमने ऐसी प्रणाली लाने की कोशिश की जहां बीज की गुणवत्ता के प्रतिशत का आसानी से आकलन किया जा सके।

सवाल:  तो सीधे तौर पर कहा जाय तो आपने  स़ॉफ्टवेयर का उपयोग कर  हॉर्डवेयर यूनिट विकसित की जो बीजों की गुणवत्ता का सही आकलन कर सके और आर्टिफिसियल इन्टेलिजेंस की मदद से  किसान और बीज कंपनियां उचित मूल्य निर्धारण कर  सकेंगी।  यह तकनीक कैसे काम करती है ?

जवाब : बीज परीक्षण में नमूना का एक आकार है जिसे लिया जाता है जिसका निर्धारण  बहुत पहले से ही सरकारी विभाग औऱ अधिकारियों द्वारा ही तय किया जाता है। यह बीज परीक्षण नमूना आकार,आमतौर पर उपज का दसवां हिस्सा होता है।  इसे परीक्षण के लिए भेजा जाता है। इसके लिए कुछ मानक निर्धारित हैं। इस लाट के बीज को परीक्षण के लिए मशीन में ऱखा जाता है। मशीन में कन्वेयर सिस्टम होता है जो बीज को इमेजिंग सेक्शन से लेकर जाता है । यह सबसे जटिल सेक्शन है क्योंकि यह मल्टी स्पेक्ट्रम एलीमीनेशन तकनीक पर आधारित है । मैं यहां अपने ही एक आईपी का इस्तेमाल करता हूं ।  मेरे पास इस क्षेत्र में अनुभव  है क्योंकि मैंने एलईडी के क्षेत्र में 12 साल तक काम किया है । इसलिए मुझे पता है कि प्रकाश और उसके विभिन्न स्पेक्ट्रा कैसे व्यवहार करते हैं। एक बार जब कन्वेयर सिस्टम बीज को प्रकाश कक्ष के माध्यम से ले जाता है, तो इमेजिंग केंद्र बीज के विभिन्न मापदंडों को पकड़ते हैं और वितरित करते हैं। इस प्रकार बीज की आनुवांशिक विविधता की पहचान की जाती है। हजारों बीजों के आकलन के लिए, लगभग 10 घंटे का समय लगता है । इस तरह हम कह सकते हैं कि तीन महीने की समयावधि में  बड़ी कटौती कर इस कार्य को  कुछ घंटों मे पूरा किया जा सकता है ।

सवाल : ऐसी कौन- कौन  सी फसलें हैं जिनके बीज की गुणवत्ता का आकलन अगधी कर रही है?

जवाब: भारत कपास बीज का सबसे बड़ा उत्पादक है। इस बीज का आकलन हमारी टेक्नोलॉजी कर रही है । इसके अलावा धान,  मिर्च  और अन्य करीब दर्जन भर फसलों के बीज का आंकलन हम कर सकते हैं । तरबूज के बीज का आकलन करने वाले मशीन को हम जल्द ही लांच करेंगे इनके अलावा और तीन प्रकार के बीजों के लिए हम अपना प्रॉडक्ट जल्द ही बाजार में लाएंगे। हम  कोशिश कर रहे  हैं कि ,जिन बीजों की अधिक माँग है  उनका मूल्यांकन हमारी मशीनों द्वारा हो सके ।

सवाल : आपने अपना पहला प्रॉडक्ट  किस बीज के लिए और कब लॉन्च किया था ? आपके कस्टमर किस तरह के हैं?

जवाब : हमारा पहला प्रॉडक्ट इस  साल मार्च में लॉन्च हुआ था, जो तीन तरह के बीजों का आंकलन करने में सक्षम है। इसी साल के दिसंबर तक 12 किस्मों के बीजों का आकलन कर सकने वाले हमारे प्रॉडक्ट पाइपलाइन में हैं। बीज उत्पादन करने वाली कंपनियां हमारे मुख्य ग्राहक हैं और फिर सरकारी एजेंसियां ​​हैं जो किसानों को बीज उपल्बध करवाती हैं। इसके अलावा, डीलर  और डिस्ट्रीब्यूटर द्वारा संचालित ग्रोहाउस भी हमारे ग्राहक  हैं ।

सवाल : क्या आप उन कंपनियों और सरकारी एजेंसियों के नामों के बारे में बताएंगे  जिनके साथ आपकी कम्पनी का टाईअप्स हैं।

जवाब: मैं आपको सरकारी एजेंसियों के नाम बता सकता हूं। मगर प्राइवेट कंपनियां अपना नाम सार्वजिक नही करना चाहती है। हम कर्नाटक में  गांधी कृषि विज्ञान केंद्र (जीकेवीके) कृषि महाविद्यालय के साथ काम करते हैं और हमारा केंद्रीय कपास अनुसंधान संस्थान नागपुर (CICR)  के साथ भी काम चल रहा है। तिरुवनंतपुरम स्थित केरल कृषि विश्वविद्यालय के साथ भी हम काम कर रहे हैं।

 

सवाल : क्या आपका  इस क्षेत्र में कोई प्रतियोगी है जिसके पास आपके समान तकनीक है?

जवाब: अगर आप विश्व स्तर पर देखें, तो इस तकनीक पर दो कंपनियां काम कर रही हैं ,सीड-एक्स और वीडियोमीटर । लेकिन भारत में ऐसी कोई कंपनी नहीं है।

सवाल : आप अब से एक साल बाद अपनी कंपनी को कहां देखते हैं?

जवाब: बीज के गुणवत्ता विश्लेषण के लिए हम कुछ मल्टीनेशनल कंपनियों  के  साथ दुनिया के 22 अलग-अलग क्षेत्रों मे काम कर रहे हैं । उनमें से एक “बेयर” भी है । इसके साथ ही हम  कुछ भारतीय कंपनियों के साथ भी काम कर रहे हैं और इनमे से दो कंपनियों पर हमने अपनी मशीन स्थापित भी कर दी है । अगले साल तक हम 10-12 प्रतिष्ठानों मे मशीन  स्थापित करने का लक्ष्य  बना रहे हैं ।हमारी कोशिश है कि हम अधिक से अधिक  डेटा इकट्ठा करे  ताकि हमें सुधार करने में मदद मिल सके । अगले साल से हम वैश्विक बाजार में अपने संस्थान का विस्तार करने की कोशिश करेंगे । अभी, हम मुख्य तौर पर भारतीय बीज की किस्मों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं ।

सवाल : क्या आपको किसी फंड या वेंचर कैपिटलिस्ट (वीसी) से कोई निवेश मिला है?

जवाब: फिलहाल यह एक बूटस्ट्रैप हैं लेकिन हम कुछ वेंचर कैपिटलिस्ट  के साथ संपर्क मे हैं।

सवाल : आपने "फार्मर कनेक्ट"  के बारे में उल्लेख किया है। यह क्या है?

जवाब: हम एक ऐसा ऐप बनाने  की कोशिश कर रहे हैं जिसकी मदद से  किसान को पूरी फसल उत्पादन प्रक्रिया की सही जानकारी मिल सके जैसे बीज की खरीद । वह इससे जुड़े खर्चों पर नजर रख सकेगा  । इसी प्रकार, वह ऐप फसल के विकास की पूरी प्रक्रिया पर भी नजर रख सकेगा । अगर उसे  कुछ बीमारी या फसल में असामान्य दिखता है वह इस ऐप के माध्यम से सही समय पर कंपनी  से संपर्क कर सकेगा।

सवाल: फसलों मे विभिन्न रोगो और  कीटों  की पहचान करने के लिए, आपको एक पादप रोग विशेषज्ञ या पौध सुऱक्षा वैज्ञानिक की आवश्यकता होगी । क्या आपकी टीम में  ऐसे विशेषज्ञ हैं?

जबाव : हां, हमारे पास एक टीम है ऐसे सहयोगी भी है । हमने हाल ही में "फार्मर कनेक्ट" में "एक्सपर्ट सेक्शन" बनाया है। हमारे इस ऐप के माध्यम से किसान कृषि विशेषज्ञ से सम्पर्क कर सलाह ले  सकते जिस तरह एक रोगी अपने डॉक्टर से  संपर्क करता है।