चीनी उत्पादन अनुमान से करीब 26 लाख टन घटकर 290 लाख टन रहने की संभावना

चालू पेराई सीजन (2025-26) में उत्तर प्रदेश में गन्ने की उत्पादकता में भारी गिरावट और महाराष्ट्र में सीजन के पहले फ्लावरिंग की स्थिति बनने से चीनी उत्पादन अनुमान से करीब 26 लाख टन रहने की संभावना है। चीनी उद्योग के संगठन इंडियन शुगर एंड बॉयोइनर्जी मैन्यूफैक्चरर्स एसोसिएशन (इस्मा) ने चालू सीजन में 349.01 लाख टन चीनी उत्पादन का शुरुआती अनुमान लगाया था

चीनी उत्पादन अनुमान से करीब 26 लाख टन घटकर 290 लाख टन रहने की संभावना

चालू पेराई सीजन (2025-26) में उत्तर प्रदेश में गन्ने की उत्पादकता में भारी गिरावट और महाराष्ट्र में सीजन के पहले फ्लावरिंग की स्थिति बनने से चीनी उत्पादन अनुमान से करीब 26 लाख टन कम रहने की संभावना है। चीनी उद्योग के संगठनों ने चालू सीजन में करीब 349 लाख टन चीनी उत्पादन का अनुमान लगाया था जिसमें से 34 लाख टन चीनी का एथेनॉल में डायवर्सन के बाद 316 लाख टन चीनी उत्पादन रहने का अनुमान लगाया गया था। निजी चीनी उद्योग के संगठन इंडियन शुगर एंड बॉयोइनर्जी मैन्यूफैक्चरर्स एसोसिएशन (इस्मा) ने  चालू सीजन में 349.01 लाख टन चीनी उत्पादन का  शुरुआती अनुमान लगाया था।

सबसे बड़े गन्ना और चीनी उत्पादक राज्यों उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र से आ रही खबरों के मुताबिक दोनों राज्यों में अनुमान से कम उत्पादन होगा। चीनी उद्योग सूत्रों ने रूरल वॉयस को बताया कि अनुमान के मुकाबले सबसे अधिक कमी उत्तर प्रदेश में रहेगी और वहां चालू सीजन में चीनी उत्पादन करीब 95 लाख टन पर अटक सकता है जो पिछले साल के 92.76 लाख टन उत्पादन से मामूली ही अधिक है। जबकि उत्तर प्रदेश में 110 लाख टन चीनी उत्पादन का अनुमान लगाया गया था। वहीं महाराष्ट्र में चीनी उत्पादन करीब 102 लाख टन रहने की संभावना है जो पिछले साल के मुकाबले करीब 12 लाख टन अधिक है और वहां इस साल 110 लाख टन चीनी उत्पादन का अनुमान लगाया गया था।  पिछले साल महाराष्ट्र में 80.96 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ था।

इस्मा ने दिसंबर में चीनी उत्पादन के अनुमान को 349.01 लाख टन से घटाकर 343.5 लाख टन टन कर दिया था। जिसमें एथेनॉल के लिए डायवर्जन भी शामिल था।

उत्तर प्रदेश में एक बड़ी चीनी मिल समूह के एक वरिष्ठ अधिकारी ने रूरल वॉयस को बताया कि राज्य में गन्ना उत्पादकता पिछले साल के करीब 15 से 20 फीसदी तक कम है जबकि पिछले साल भी राज्य में गन्ने की फसल कमजोर थी। पिछले कुछ साल में उत्तर प्रदेश के किसान गन्ना में बीमारी और कम उत्पादकता के संकट से जूझ रहे हैं। इस स्थिति के चलते चीनी मिलों में गन्ने की आपूर्ति घट रही है और मिलों में अगले इस माह के अंत तक पेराई बंद होने लगेंगी। जबकि मार्च में ही राज्य में सभी मिलों में पेराई बंद होने की संभावना है। जबकि बेहतर फसल की स्थिति में उत्तर प्रदेश में चीनी मिलों में मई तक पेराई होती रही है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में रूरल वॉयस  की किसानों के साथ हुई बातचीत में उत्पादकता में भारी गिरावट की सूचना आती रही है।

महाराष्ट्र के किसान नेता पूर्व सांसद और स्वाभिमानी शेतकरी संघठना के अध्यक्ष राजू शेट्टी ने रूरल वॉयस को बताया कि पश्चिमी महाराष्ट्र में गन्ने की फसल में अर्ली फ्लावरिंग हो रही है जिसके चलते उत्पादन प्रभावित हुआ है। राज्य की चीनी मिलों के सूत्रो के मुताबिक महाराष्ट्र में चीनी मिलों ने पेराई क्षमता बढ़ाई है और उसके चलते भी पेराई में तेजी आई है। पेराई में तेजी से अगले कुछ दिनो में ही वहां कई चीनी मिलो में पेराई बंद हो जाएगी। इसकी एक बड़ी वजह गन्ने की मैकेनिकल हार्वेस्टिंग भी है इसके जरिये तेजी से गन्ने की कटाई हुई है। उद्योग सूत्रों के मुताबिक चालू सीजन में महाराष्ट्र में गन्ने की करीब 25 फीसदी कटाई मशीन से होगी।

वहीं तीसरे बड़े चीनी उत्पादक राज्य कर्नाटक में इस सीजन में करीब 42 लाख टन चीनी उत्पादन का अनुमान है। कर्नाटक में 50 लाख टन चीनी उत्पादन का अनुमान उद्योग ने लगाया है।

वहीं 29 जनवरी, 2026 को ऑल इंडिया शुगर ट्रेडर्स एसोसिएशन (आइस्ता) ने चालू सीजन में चीनी उत्पादन का अनुमान जारी किया था। जिसके मुताबिक चालू सीजन में 296 लाख टन चीनी उत्पादन रहने की संभावना जताई गई थी। 

उद्योग के लिए एक अच्छी खबर जरूर है। केंद्र सरकार ने 13 फरवरी को पांच लाख टन अतिरिक्त चीनी निर्यात की अनुमति देने की घोषणा की थी। इसका असर यह हुआ कि चीनी की एक्स-फैक्टरी कीमत में 14 फरवरी को ही 50 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी हो गई। महाराष्ट्र में चीनी की एक्स फैक्टरी कीमत 3750 रुपये प्रति क्विंटल हो गई है जबकि उत्तर प्रदेश में यह 3950 रुपये प्रति क्विंटल हो गई है। चीनी मिलों का कहना  है कि दाम  में सुधार के चलते मिलें गन्ना किसानों को भुगतान में तेजी ला सकती हैं। 

Subscribe here to get interesting stuff and updates!