फूड प्रोसेसिंग से दक्षिण एशिया में लाखों रोजगार और अरबों डॉलर का निवेश संभवः विश्व बैंक समूह

विश्व बैंक समूह ने कहा है कि कृषि उत्पादन से आगे बढ़कर खाद्य प्रणालियों में परिवर्तन दक्षिण एशिया में लाखों रोजगार सृजित कर सकता है, खाद्य पदार्थों का नुकसान कम कर सकता है और अरबों डॉलर का निवेश आकर्षित कर सकता है। अहमदाबाद में आयोजित नीति संवाद में खाद्य प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन को विकास का प्रमुख आधार बताया गया।

फूड प्रोसेसिंग से दक्षिण एशिया में लाखों रोजगार और अरबों डॉलर का निवेश संभवः विश्व बैंक समूह

विश्व बैंक समूह ने कहा है कि कृषि उत्पादन से आगे बढ़कर दक्षिण एशिया की खाद्य प्रणाली में व्यापक बदलाव लाखों रोजगार सृजित कर सकता है, अरबों डॉलर का निवेश आकर्षित कर सकता है, गरीबी कम कर सकता है और क्षेत्र की आर्थिक वृद्धि को नई गति दे सकता है। यह बात गुजरात के अहमदाबाद में आयोजित क्षेत्रीय उच्च स्तरीय नीति संवाद “अनलॉकिंग वैल्यू: एडवांसिंग फूड प्रोसेसिंग फॉर एम्प्लॉयमेंट जेनरेशन एंड सस्टेनेबल ग्रोथ इन साउथ एशिया” के दौरान कही गई। इस कार्यक्रम का आयोजन खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय (MoFPI) ने विश्व बैंक समूह समर्थित SAPLING पहल के सहयोग से किया।

दो दिवसीय सम्मेलन का उद्घाटन केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री चिराग पासवान ने किया। उन्होंने कहा कि भारत तेजी से वैश्विक खाद्य प्रसंस्करण केंद्र के रूप में उभर रहा है और मूल्य संवर्धन, प्रौद्योगिकी अपनाने तथा क्षेत्रीय सहयोग के माध्यम से दक्षिण एशिया की खाद्य अर्थव्यवस्था को नई दिशा दी जा सकती है। लगभग 200 नीति निर्माताओं, उद्योग जगत के प्रतिनिधियों, निवेशकों, शोधकर्ताओं, स्टार्टअप्स और विकास साझेदारों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि खाद्य प्रसंस्करण कृषि और समृद्धि के बीच एक महत्वपूर्ण सेतु है। यह क्षेत्र रोजगार सृजन, फसल कटाई के बाद नुकसान में कमी, किसानों की आय बढ़ाने और खाद्य सुरक्षा मजबूत करने की अपार क्षमता रखता है।

विश्व बैंक समूह के अनुसार दक्षिण एशिया अपने विकास के एक निर्णायक मोड़ पर खड़ा है। हर वर्ष लाखों युवा श्रम बाजार में प्रवेश कर रहे हैं और उनके लिए टिकाऊ रोजगार सृजित करना क्षेत्र की सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में शामिल है। विशेषज्ञों ने कहा कि कृषि परिवर्तन का अगला चरण केवल उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं रह सकता, बल्कि खाद्य प्रसंस्करण, भंडारण, लॉजिस्टिक्स, विपणन और मूल्य संवर्धन पर ध्यान केंद्रित करना होगा।

दक्षिण एशिया का कृषि क्षेत्र प्रतिवर्ष 700 अरब डॉलर से अधिक का है और यह लगभग 43 प्रतिशत कार्यबल को रोजगार देता है। इसके बावजूद क्षेत्रीय सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में कृषि का योगदान केवल लगभग 16 प्रतिशत है। वहीं, क्षेत्र में उत्पादित 30 प्रतिशत से अधिक खाद्य सामग्री हर वर्ष नष्ट हो जाती है, जो लगभग 30 करोड़ लोगों का पेट भरने के लिए पर्याप्त है।

विश्व बैंक समूह का मानना है कि खाद्य प्रसंस्करण और आपूर्ति श्रृंखलाओं में निवेश के माध्यम से इन अक्षमताओं को दूर किया जा सकता है। कोल्ड चेन, गोदामों, लॉजिस्टिक्स नेटवर्क और बाजार संपर्कों को मजबूत करके खाद्य पदार्थों का नुकसान कम किया जा सकता है, किसानों की आय बढ़ाई जा सकती है और बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा किए जा सकते हैं।

कार्यक्रम में भारत के अनुभव को कृषि मूल्य श्रृंखलाओं में बदलाव के एक सफल उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया गया। देश का खाद्यान्न उत्पादन 1950-51 में 5.1 करोड़ टन से बढ़कर आज 37 करोड़ टन से अधिक हो गया है। इसी तरह, पिछले एक दशक में प्रसंस्कृत खाद्य निर्यात लगभग 4.9 अरब डॉलर से बढ़कर 10 अरब डॉलर से अधिक हो गया है।

वर्तमान में खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र भारत के मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र के मूल्य संवर्धन में लगभग 9 प्रतिशत और कुल निर्यात में करीब 13 प्रतिशत का योगदान देता है। प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना, प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना (PMFME) और खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों के लिए उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजना जैसी पहलों ने बुनियादी ढांचे को मजबूत करने, उद्यमों के आधुनिकीकरण, निवेश आकर्षित करने और प्रतिस्पर्धा क्षमता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

विशेषज्ञों ने कहा कि भारत और दक्षिण एशिया में अब भी कृषि उपज का बड़ा हिस्सा बिना प्रसंस्करण के बाजार तक पहुंचता है। इसका अर्थ है कि मूल्य संवर्धन और रोजगार सृजन की अपार संभावनाएं अभी बरकरार हैं। तेजी से बढ़ता शहरीकरण, विस्तार करता मध्यम वर्ग, लोगों की बढ़ती आय और सुरक्षित तथा उच्च गुणवत्ता वाले प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों की मांग निवेश और नवाचार के नए अवसर पैदा कर रही है।

इस परिवर्तन को गति देने के लिए विश्व बैंक समूह एग्रीकनेक्ट (AgriConnect) और SAPLING पहल के माध्यम से एक संयुक्त रणनीति पर काम कर रहा है। एग्रीकनेक्ट का लक्ष्य वर्ष 2030 तक 30 करोड़ किसानों को बाजारों से जोड़ना है। इसके लिए बुनियादी ढांचा में निवेश, नीतिगत सुधार और निजी पूंजी को प्रोत्साहित किया जा रहा है। यह पहल भारत, बांग्लादेश और श्रीलंका सहित कई देशों में परियोजनाओं और सुधारों का समर्थन कर रही है।

विश्व बैंक की पहल SAPLING, एक क्षेत्रीय मंच के रूप में सरकारों, निवेशकों, विकास संस्थानों और नवाचारकर्ताओं को साथ लाकर नीतिगत सुधारों को बढ़ावा देता है, निवेश परियोजनाओं को विकसित करता है और सफल समाधानों को पूरे क्षेत्र में विस्तार देने का प्रयास करता है।

संवाद में भाग लेने वाले विशेषज्ञों ने सरकारों, उद्योगों, निवेशकों और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों के बीच समन्वित प्रयासों की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कोल्ड चेन, वेयरहाउसिंग, लॉजिस्टिक्स हब, एग्रो-इंडस्ट्रियल पार्क और खाद्य प्रसंस्करण क्लस्टरों में निवेश बढ़ाने, सार्वजनिक-निजी भागीदारी को मजबूत करने तथा नियामक प्रक्रियाओं को सरल बनाने की सिफारिश की।

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