चीनी की एक्स-फैक्ट्री कीमतें घटकर 5100 रुपये प्रति क्विंटल, लेकिन खुदरा बाजार में भाव 64 रुपये किलो

सरकार की सख्ती और शुल्क-मुक्त रॉ शुगर आयात जैसे कदमों के बाद चीनी की रिकॉर्ड तेजी थमती दिख रही है। एक्स-मिल कीमतें 6,700 रुपये प्रति क्विंटल से घटकर करीब 5,100 रुपये तक आ गई हैं, हालांकि खुदरा कीमतें अभी भी ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं।

चीनी की एक्स-फैक्ट्री कीमतें घटकर 5100 रुपये प्रति क्विंटल, लेकिन खुदरा बाजार में भाव 64 रुपये किलो

चीनी की कीमतों में रिकॉर्ड बढ़ोतरी का सिलसिला फिलहाल थमता दिख रहा है। अखिल भारतीय स्तर पर चीनी की एक्स-मिल कीमतें 6,700 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गई थीं। लेकिन 27 अगस्त को ये कीमतें घटकर 5,100 रुपये प्रति क्विंटल तक आ गई हैं।

उद्योग सूत्रों के मुताबिक, महाराष्ट्र और कर्नाटक में गुरुवार, 27 अगस्त को चीनी की एक्स-फैक्ट्री कीमतें 5,100 रुपये प्रति क्विंटल तक आ गईं। वहीं, उत्तर प्रदेश में एक्स-फैक्ट्री कीमतें 5,200 से 5,300 रुपये प्रति क्विंटल के बीच रहीं। आने वाले दिनों में चीनी की आपूर्ति बढ़ने और जमाखोरी पर अंकुश लगने से कीमतों में और कमी आ सकती है।

हालांकि, थोक और खुदरा बाजार में चीनी की कीमतें अभी भी ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं। केंद्रीय उपभोक्ता मामले विभाग के मुताबिक, 27 अगस्त को देश में चीनी का औसत खुदरा मूल्य 64.33 रुपये प्रति किलोग्राम रहा, जो 26 अगस्त को 65.06 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गया था। एक महीने पहले देश में चीनी का औसत खुदरा भाव 48.92 रुपये प्रति किलोग्राम था। इस प्रकार, पिछले एक महीने में चीनी की खुदरा कीमतों में करीब 32 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है।

उपभोक्ता मामले विभाग के अनुसार, 27 अगस्त को देश में चीनी का औसत थोक मूल्य 5,947.22 रुपये प्रति क्विंटल रहा जो एक महीना पहले 4532.33 रुपये प्रति क्विंटल था। इस तरह चीनी की थोक कीमतें अब भी 59-60 रुपये प्रति किलो के आसपास हैं, जो एक महीने पहले लगभग 45 रुपये प्रति किलो थीं।

इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (इस्मा) के महानिदेशक दीपक बल्लानी का कहना है कि चीनी की कीमतों में हाल के उच्च स्तर से करीब 20 फीसदी की गिरावट आई है। आने वाले हफ्तों में नई चीनी की उपलब्धता बढ़ने के साथ कीमतों में गिरावट का असर थोक और खुदरा बाजार तक पहुंचने की उम्मीद है। 

कीमतों पर काबू पाने में जुटी सरकार

त्योहारों से पहले चीनी की कीमतों पर काबू पाने के लिए सरकार ने स्टॉक लिमिट लगाने, जमाखोरी और कालाबाजारी पर सख्ती बढ़ाने तथा 10 लाख टन रॉ शुगर के शुल्क-मुक्त आयात को मंजूरी देने जैसे कदम उठाए हैं। इनका असर चीनी की एक्स-फैक्ट्री कीमतों पर दिखने लगा है। 

जल्द ही शुगर रिफाइनरियों के पास मौजूद करीब साढ़े तीन लाख टन चीनी की आपूर्ति घरेलू बाजार में हो सकती है। इसके लिए केंद्र सरकार ने आवश्यक मंजूरी दे दी है। इससे चीनी की उपलब्धता बढ़ने और कीमतों में कमी आने की उम्मीद है।

दिखने लगा सख्ती का असर

चालू पेराई सीजन (2025-26) में चीनी का उत्पादन 279 लाख टन और 30 सितंबर को बकाया स्टॉक 35 लाख टन रहने के अनुमान में कोई बदलाव नहीं है। लेकिन चीनी की कीमतों में अचानक उतार-चढ़ाव के पीछे जमाखोरी और अटकलों को भी एक वजह माना जा रहा है।

उद्योग सूत्रों के अनुसार, कीमतों पर अंकुश लगने की दो प्रमुख वजहें हैं। पहली वजह सरकार की स्टॉकिस्टों और चीनी मिलों पर सख्ती है। इसके तहत स्टॉक का भौतिक सत्यापन किया जा रहा है। साथ ही, स्टॉकिस्टों और थोक खरीदारों के लिए स्टॉक लिमिट तय करने जैसे कदम उठाए गए हैं। केंद्र और राज्य सरकारों के अधिकारी जमाखोरी और कालाबाजारी के खिलाफ भी कार्रवाई कर रहे हैं।

रॉ शुगर आयात मंजूरी का भी असर

वहीं, 10 लाख टन रॉ शुगर के शुल्क-मुक्त आयात के फैसले का असर भी कीमतों पर पड़ा है। केंद्र सरकार ने कांडला स्थित एक्सपोर्ट ओरिएंटेड यूनिट्स (ईओयू) के तहत काम कर रही शुगर रिफाइनरी इकाइयों को निर्यात के लिए आयातित रॉ शुगर को घरेलू बाजार में बेचने की अनुमति दी है।

उद्योग सूत्रों के मुताबिक, कांडला स्थित दो शुगर रिफाइनरियां आयातित रॉ शुगर को रिफाइन कर करीब 10 दिनों में घरेलू बाजार में उपलब्ध कराने की स्थिति में हैं। इन रिफाइनरियों के पास करीब 3.5 से 4 लाख टन चीनी होने का अनुमान है।

वहीं, अगर इनके अलावा अन्य चीनी मिलें भी रॉ शुगर का आयात करती हैं, तो उसकी लागत एक्स-मिल स्तर पर करीब 51 से 52 रुपये प्रति किलो के बीच होगी। इसलिए मौजूदा एक्स-मिल कीमतों में आगे बड़ी गिरावट की गुंजाइश कम है। वैसे भी चालू पेराई सीजन का सिर्फ एक महीना बचा है।

जल्द शुरू होगी पेराई

उद्योग का कहना है कि अक्टूबर के लिए 35 लाख टन से अधिक चीनी उपलब्ध होगी। वर्ष 2026-27 के पेराई सीजन की शुरुआत 15 दिन पहले हो सकती है और कई चीनी मिलों में 15 अक्टूबर से पेराई शुरू होने की संभावना है। इससे नवंबर के लिए अगले सीजन की करीब 10 लाख टन चीनी उपलब्ध हो सकती है, जिससे त्योहारी सीजन की मांग को पूरा करने में मदद मिलेगी।

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