भारत-केंद्रित गूगल एआई मॉडल से कृषि क्षेत्र को नई दिशा देने की कोशिश, कई देशों में हो रहा उपयोग

भारत के लिए विकसित गूगल डीपमाइंड के एआई मॉडल अब वैश्विक कृषि क्षेत्र में भी अपनी पहुंच बढ़ा रहे हैं। सैटेलाइट डेटा और एआई की मदद से ये मॉडल खेतों की पहचान, फसल निगरानी, कृषि ऋण, जल प्रबंधन और स्थानीय स्तर पर किसानों को सलाह देने जैसे क्षेत्रों में इस्तेमाल हो रहे हैं।

भारत-केंद्रित गूगल एआई मॉडल से कृषि क्षेत्र को नई दिशा देने की कोशिश, कई देशों में हो रहा उपयोग

खाद्य सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन और कृषि संसाधनों पर बढ़ते दबाव के बीच गूगल डीपमाइंड के भारत-केंद्रित आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) मॉडल स्थानीय स्तर पर असर दिखाने के साथ-साथ दुनिया के कई देशों में भी उपयोगी साबित हो रहे हैं। सैटेलाइट इमेजरी के जरिए खेतों की सीमाओं की पहचान और कृषि गतिविधियों की निगरानी करने वाले ये मॉडल किसानों की ऋण तक पहुंच, फसल संबंधी सलाह, जल प्रबंधन और नीतिगत निर्णयों में मदद कर रहे हैं।

गूगल डीपमाइंड की AnthroKrishi टीम ने दो मॉडल—एग्रीकल्चरल लैंडस्केप अंडरस्टैंडिंग (ALU) और एग्रीकल्चरल मॉनिटरिंग एंड इवेंट डिटेक्शन (AMED)—शुरुआत में भारत की कृषि जरूरतों को ध्यान में रखकर विकसित किए थे। अब इनके नतीजे एशिया-प्रशांत और अफ्रीका के 11 देशों में विश्वसनीय परीक्षण साझेदारों के साथ साझा किए जा रहे हैं। इन मॉडलों के आउटपुट एपीआई और गूगल अर्थ के माध्यम से मुफ्त उपलब्ध कराए गए हैं।

गूगल डीपमाइंड में एग्रीकल्चर एंड सस्टेनेबिलिटी रिसर्च लीड आलोक तालेकर ने कहा कि भारत के लिए विकसित इन एआई मॉडलों का उपयोग अब कृषि ऋण, फसल सलाह और नीतिगत निर्णय जैसे क्षेत्रों में हो रहा है। जैसे-जैसे इन मॉडलों का विस्तार अधिक देशों तक होगा, वे खाद्य सुरक्षा और कृषि क्षेत्र की जलवायु सहनशीलता जैसी वैश्विक चुनौतियों से निपटने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

कृषि ऋण तक पहुंच आसान

भारत में Terrastack ने ALU और AMED एपीआई का इस्तेमाल करते हुए एक स्पेशियल इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म तैयार किया है, जिसके जरिए 14 करोड़ हेक्टेयर से अधिक कृषि भूमि की मैपिंग की गई है। कंपनी का कहना है कि इससे खेतों के भौतिक निरीक्षण की जरूरत कम हो रही है और ऋणदाता, बीमा कंपनियां तथा कृषि क्षेत्र से जुड़े अन्य संस्थान तेजी से और बेहतर फैसले ले सकते हैं, जिसका सीधा लाभ किसानों को मिल सकता है।

टेरास्टैक के सह-संस्थापक और सीईओ आर्यन डांगी के अनुसार, भारत में 10 करोड़ से अधिक कृषक परिवार अब भी पर्याप्त सेवाओं और सुविधाओं से वंचित हैं, क्योंकि खेत स्तर पर वास्तव में क्या हो रहा है, इसे समझने का कोई विश्वसनीय तरीका उपलब्ध नहीं है। एआई आधारित भू-स्थानिक डेटा इस अंतर को कम करने में मदद कर सकता है।

उन्होंने कहा, “Google के ALU और AMED मॉडलों ने हमें एक स्थानिक इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म विकसित करने में सक्षम बनाया है, जो बिखरे हुए भूमि, फसल और आय संबंधी आंकड़ों को भारत के हर खेत के लिए उपयोगी और कार्रवाई योग्य जानकारी में बदलने में मदद कर रहा है।”

टिकाऊ खेती में मददगार

सस्टेनेबल कृषि के क्षेत्र में CarbonFarm ने ALU मॉडल और जेमिनी का उपयोग कर खेत स्तर की जानकारियों को स्वचालित किया है। Google AI समर्थित ये जानकारियां न केवल कागज आधारित रिपोर्टिंग की जगह ले रही हैं, बल्कि धान किसानों की कार्बन क्रेडिट और जलवायु वित्त कार्यक्रमों तक पहुंच बढ़ाने में भी मददगार हो रही हैं। यह प्लेटफॉर्म फिलहाल 12 देशों में काम कर रहा है और इसके 20 देशों तक विस्तार की उम्मीद है। कंपनी ने वर्ष 2030 तक 20 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में कम-कार्बन धान उत्पादन को समर्थन देने का लक्ष्य रखा है।

कार्बनफार्म की सीईओ अपर्णा रतूड़ी का कहना है, “Google के ALU मॉडल और जेमिनी का उपयोग कर हम खेत स्तर की जानकारियों, जैसे कृषि पद्धतियों, पानी के उपयोग और मीथेन उत्सर्जन में कमी को माप सकते हैं। यह डेटा किसानों को जलवायु-अनुकूल तकनीकों को अपनाने में मदद करता है, जबकि विश्वसनीय और सत्यापन योग्य नतीजों के आधार पर परिणाम-आधारित प्रोत्साहन कार्यक्रमों को भी सक्षम बनाता है।”

कृषि के लिए डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI)

निजी क्षेत्र के अलावा, गूगल डीपमाइंड के कृषि मॉडल भारत में कृषि के लिए डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

तेलंगाना सरकार ने ALU और AMED डेटासेट को अपने कृषि डेटा एक्सचेंज (ADeX) में एकीकृत किया है। यह पहल राज्य के 50 लाख से अधिक किसानों के लिए डिजिटल कृषि सेवाओं और नवाचार को मजबूत करने की दिशा में काम कर रही है।

कर्नाटक के जल संसाधन विभाग ने भी ALU और AMED को स्थानीय मौसम तथा रिमोट सेंसिंग डेटा के साथ जोड़कर राज्य के 26 लाख हेक्टेयर सिंचित क्षेत्र में जल प्रबंधन को मजबूत करने की पहल की है। विभाग का मानना है कि खेत और फसल स्तर पर अधिक सटीक तथा समयबद्ध जानकारी से जल उत्पादकता बढ़ाने और नदी बेसिन स्तर पर संसाधन प्रबंधन से जुड़े बेहतर निर्णय लेने में मदद मिल सकती है।

वहीं, संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) की geoAI4stats पहल में भी इन मॉडलों को वैश्विक CROPGRIDS डेटा रिपॉजिटरी के साथ जोड़ने की योजना है। इस पहल को Google.org के AI Collaborative: Food Security कार्यक्रम से समर्थन मिला है।

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