चीनी की कीमतों पर सरकार सख्त, खाद्य सचिव ने की उद्योग के साथ बैठक
चीनी की बढ़ती कीमतों को लेकर केंद्र सरकार ने सख्त रुख अपनाते हुए चीनी उद्योग और प्रमुख उत्पादक राज्यों के अधिकारियों के साथ बैठक की। उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र में एक्स-मिल कीमतों के बढ़ते अंतर, त्योहारी सीजन में कीमतों पर नियंत्रण और आगामी पेराई सीजन में जल्द पेराई शुरू करने को लेकर सरकार ने उद्योग से सहयोग मांगा है।
चालू पेराई सीजन 2025-26 में चीनी उत्पादन के अनुमानों के गड़बड़ाने के बाद कीमतों में आई अप्रत्याशित तेजी को देखते हुए केंद्र सरकार कीमतों को नियंत्रित करने की लगातार कोशिश कर रही है। सरकार की सख्ती के बावजूद अपेक्षित परिणाम नहीं आने से परेशान खाद्य मंत्रालय के सचिव ने देश के प्रमुख चीनी उत्पादक राज्यों के अधिकारियों और चीनी उद्योग के संगठनों के साथ मंगलवार को एक अहम बैठक की। यह बैठक काफी गरमा-गरमी वाली रही और सरकार ने साफ किया कि उद्योग को कीमतों को व्यावहारिक स्तर पर बनाए रखने के लिए सरकार का पूरी तरह साथ देना होगा।
सरकार द्वारा चीनी के मासिक कोटे में किए गए बदलाव, बिक्री के नए मानक और चीनी कारोबारियों पर छापेमारी जैसे कदमों के बाद चीनी के एक्स-मिल दाम 4,250 से 4,300 रुपये प्रति क्विंटल पर आ गए थे। इसके बाद इनमें बढ़ोतरी हुई और गुरुवार को दोनों बड़े चीनी उत्पादक राज्यों उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र में कीमतें 4,800 रुपये प्रति क्विंटल रहीं।
यूपी-महाराष्ट्र में कीमतों का अंतर
उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र में चीनी की कीमतों में अंतर बढ़ने के बाद यह अहम बैठक हुई। सामान्य रूप से दोनों राज्यों के बीच कीमतों में करीब 200 रुपये प्रति क्विंटल का अंतर रहता है, लेकिन पिछले दिनों यह अंतर 700 रुपये प्रति क्विंटल तक हो गया था। महाराष्ट्र में चीनी का एक्स-मिल दाम 4,400 रुपये प्रति क्विंटल था, जबकि उत्तर प्रदेश में यह 5,100 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गया था। त्योहारी सीजन शुरू होने के समय इस स्थिति ने खाद्य मंत्रालय की चिंता बढ़ा दी थी और इसके चलते ही उद्योग के साथ बैठक बुलाई गई।
इस बैठक में निजी चीनी मिलों के संगठन इस्मा के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और महानिदेशक, सहकारी चीनी मिलों के संगठन नेशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फैक्टरीज (एनएफसीएसएफ) के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक, उत्तर प्रदेश की गन्ना एवं चीनी आयुक्त, महाराष्ट्र के चीनी आयुक्त और कर्नाटक के चीनी आयुक्त के साथ खाद्य मंत्रालय के अधिकारी शामिल हुए। कर्नाटक के चीनी आयुक्त ने बैठक में ऑनलाइन शिरकत की। बैठक में उत्तर प्रदेश की सहकारी और निजी चीनी मिलों के एक्स-मिल दामों में अंतर की बात राज्य की चीनी आयुक्त मिनिस्ठी एस. ने कही। इस दौरान चीनी उद्योग को कीमतों के मामले में संवेदनशील रहने के लिए कहा गया।
मौजूदा कीमतों से उद्योग संतुष्ट
चीनी उद्योग से जुड़े एक बड़े पदाधिकारी ने रूरल वॉयस को बताया कि मौजूदा कीमतों से उद्योग संतुष्ट है, क्योंकि इन कीमतों के चलते लागत निकल रही है और कुछ फायदा भी हो रहा है। उक्त सूत्र के मुताबिक, अब उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र में चीनी के एक्स-मिल दाम करीब 4,800 रुपये प्रति क्विंटल हैं और दोनों राज्यों में लगभग समान स्तर पर बने हुए हैं।
उन्होंने बताया कि सरकारी अधिकारियों द्वारा छापेमारी की कार्रवाई अब काफी कम हो गई है, इसलिए कीमतों में स्थायित्व आया है। छापेमारी की कार्रवाई के बाद ट्रेड में अनिश्चितता पैदा हुई थी और उसके चलते कीमतें 4,300 रुपये प्रति क्विंटल तक आ गई थीं। हालांकि, अब कीमतों में जो सुधार हुआ है, वह मौजूदा परिस्थितियों के मुताबिक है।
15 अक्तूबर से पेराई पर असमंजस
जहां तक चीनी मिलों में 15 अक्तूबर, 2026 से पेराई शुरू करने की बात है, तो महाराष्ट्र में इसे मुख्यमंत्री की मंजूरी मिल गई है। हालांकि, उद्योग सूत्रों का मानना है कि 20 अक्तूबर को दशहरा पूजन के बाद ही कुछ मिलें पेराई शुरू कर पाएंगी, जबकि कुछ मिलें दिवाली के बाद ही पेराई शुरू करेंगी। सरकार ने चीनी की आपूर्ति बढ़ाने के लिए मिलों से 15 अक्तूबर से पेराई शुरू करने के लिए कहा है।
एथेनॉल डायवर्जन पर नजर
सरकार की लगातार नजर और उद्योग के साथ बैठकों से संकेत मिलता है कि वह त्योहारी सीजन में कीमतों में भारी बढ़ोतरी का कोई जोखिम नहीं लेना चाहती है। हालांकि, आगामी सीजन में भी गन्ने की फसल बहुत बेहतर होने की संभावना कम है। चालू सीजन में 279 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ था और करीब 30 लाख टन चीनी एथेनॉल के लिए डायवर्ट की गई थी।
ऐसे में आगामी सीजन (2026-27) में एथेनॉल के लिए चीनी के डायवर्जन को लेकर सरकार बहुत सकारात्मक रहेगी या नहीं, यह अभी कहना मुश्किल है, क्योंकि जनवरी तक ही चीनी उत्पादन की स्थिति साफ होगी। वहीं, खुदरा बाजार में चीनी के दाम करीब 65 रुपये प्रति किलो बने हुए हैं। इसलिए उद्योग और सरकार के बीच कीमतों को लेकर बैठकों का दौर आगे भी जारी रहने की संभावना है।

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