बहु-राज्य सहकारी समितियों में पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाए जाएंगे: कृष्ण पाल गुर्जर
सहकारिता राज्य मंत्री कृष्ण पाल गुर्जर ने कहा है कि बहु-राज्य सहकारी समितियों में पारदर्शी और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए सरकार महत्वपूर्ण सुधार लागू कर रही है। नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी में उन्होंने सहकारी निर्वाचन प्राधिकरण की भूमिका, चुनावों की प्रगति और सहकारी शासन में पारदर्शिता बढ़ाने के उपायों पर जोर दिया।
केंद्रीय सहकारिता राज्य मंत्री कृष्ण पाल गुर्जर ने कहा है कि सरकार बहु-राज्य सहकारी समितियों में पारदर्शी और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए मजबूत कदम उठा रही है, ताकि सहकारी संस्थाओं में लोकतांत्रिक शासन और जवाबदेही को और मजबूत किया जा सके।
नई दिल्ली स्थित विज्ञान भवन में आयोजित “पारदर्शिता और शुचिता से बहु-राज्य सहकारी समितियों के चुनाव” विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि सहकारी निर्वाचन प्राधिकरण द्वारा आयोजित यह कार्यक्रम ऐतिहासिक है और सहकारिता आंदोलन के लिए मील का पत्थर साबित होगा।
इस कार्यक्रम में बहु-राज्य सहकारी समितियों के अध्यक्ष, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, निदेशक मंडल के सदस्य, रिटर्निंग अधिकारी, जिला मजिस्ट्रेट, राज्य सहकारी निर्वाचन प्राधिकरणों के अध्यक्ष, सहकारिता क्षेत्र के विशेषज्ञ तथा केंद्र और राज्य सरकारों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।
अपने संबोधन में गुर्जर ने कहा कि पहली बार देशभर की बहु-राज्य सहकारी समितियों के प्रतिनिधि एक मंच पर एकत्र हुए हैं, जहां सहकारी चुनावों में पारदर्शिता और निष्पक्षता को मजबूत करने पर चर्चा की जा रही है। उन्होंने कहा कि यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “सहकार से समृद्धि” के विजन के अनुरूप है और केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में सहकारिता तंत्र को मजबूत करने के लिए सरकार निरंतर प्रयास कर रही है।

कार्यक्रम को संबोधित करते सहकारिता राज्य मंत्री कृष्ण पाल गुर्जर।
उन्होंने बताया कि सहकारी संस्थाओं को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और लोकतांत्रिक बनाने के लिए मल्टी-स्टेट कोऑपरेटिव सोसायटीज (अमेंडमेंट) एक्ट, 2023 के माध्यम से कई महत्वपूर्ण सुधार किए गए हैं। इस संशोधित अधिनियम के तहत सबसे महत्वपूर्ण कदम एक स्वतंत्र सहकारी निर्वाचन प्राधिकरण की स्थापना है, जिसे 11 मार्च 2024 को औपचारिक रूप से अधिसूचित किया गया। यह प्राधिकरण बहु-राज्य सहकारी समितियों में स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित करने के लिए जिम्मेदार है।
उन्होंने कहा कि एक अन्य महत्वपूर्ण सुधार बहु-राज्य सहकारी समितियों के निदेशक मंडलों के कार्यकाल को निश्चित करना है। पहले ऐसी व्यवस्था थी कि चुनाव होने तक बोर्ड अनिश्चितकाल तक कार्य करता रह सकता था, जिसे समाप्त कर दिया गया है। इससे प्रशासनिक अनुशासन बढ़ेगा और चुनाव कराने में देरी की आशंका कम होगी। गुर्जर ने बताया कि सहकारी निर्वाचन प्राधिकरण अब तक करीब 240 चुनाव सफलतापूर्वक आयोजित कर चुका है, जबकि लगभग 70 चुनाव वर्तमान में जारी हैं। आने वाले वित्त वर्ष में करीब 130 और चुनाव कराए जाने की संभावना है।
उन्होंने यह भी बताया कि संशोधित अधिनियम के तहत बहु-राज्य सहकारी समितियों के बोर्ड में महिलाओं के लिए दो सीटें तथा अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए एक-एक सीट आरक्षित की गई हैं, ताकि सहकारी शासन में अधिक समावेशिता सुनिश्चित की जा सके। हालांकि अब तक हुए चुनावों में महिलाओं के लिए आरक्षित छह सीटें और एससी/एसटी के लिए आरक्षित तेरह सीटें खाली हैं और मंत्रालय इन पदों को भरने के लिए आवश्यक कदम उठा रहा है।
सहकारिता राज्य मंत्री ने कहा कि बैंकिंग नियमन (संशोधन) अधिनियम, 2025 के माध्यम से सहकारी बैंकों, विशेषकर बहु-राज्य सहकारी बैंकों के बोर्ड के कार्यकाल को संविधान के अनुच्छेद 243ZJ के अनुरूप किया गया है, जिससे सहकारी बैंकिंग क्षेत्र में लोकतांत्रिक शासन को और मजबूती मिलेगी।
उन्होंने बताया कि सहकारी बैंकों में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के लिए यह प्रावधान किया गया है कि वे केंद्रीय सहकारी समितियों के रजिस्ट्रार द्वारा अनुमोदित पैनल से ही ऑडिटर नियुक्त करें। इसके अलावा बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट, 1949 में संशोधन कर यह भी सुनिश्चित किया गया है कि बहु-राज्य सहकारी बैंकों के निदेशक लगातार दस वर्ष से अधिक समय तक पद पर नहीं रह सकते, जिससे नए और युवा नेतृत्व को अवसर मिलेगा।
गुर्जर ने कहा कि सहकारी समितियां सहकारिता के मूल सिद्धांतों पर आधारित होती हैं, जिनमें सदस्यों की समान भागीदारी और लोकतांत्रिक नियंत्रण सुनिश्चित किया जाता है। उन्होंने कहा कि सहकारिता व्यवस्था में जनता का विश्वास मजबूत करने के लिए पारदर्शी और जवाबदेह प्रशासनिक ढांचे की आवश्यकता है। भर्ती और खरीद प्रक्रियाओं में भी पारदर्शिता और योग्यता आधारित व्यवस्था अपनानी चाहिए, ताकि सहकारी संस्थाएं पेशेवर ढंग से संचालित हो सकें और विकसित भारत के लक्ष्य में योगदान दे सकें।
उन्होंने यह भी बताया कि मल्टी स्टेट कोऑपरेटिव सोसायटीज एक्ट, 2002 में संशोधन के बाद सरकार ने 5 मार्च 2024 को राजपत्र अधिसूचना के माध्यम से सहकारी लोकपाल (Cooperative Ombudsman) की नियुक्ति की है, ताकि सहकारी समितियों के सदस्यों के हितों की रक्षा की जा सके। यह लोकपाल सदस्यों की शिकायतों की जांच करता है और सहकारी सूचना अधिकारियों के आदेशों के खिलाफ अपील की सुनवाई भी करता है। अब तक 38,000 से अधिक शिकायतें प्राप्त हुई हैं, जिनमें से बड़ी संख्या का निपटारा सहकारी लोकपाल द्वारा जारी आदेशों के माध्यम से किया जा चुका है।

सेमीनार को कोऑपरेटिव इलेक्शन अथॉरिटी के चेयरमैन देवेंद्र कुमार सिंह ने भी संबोधित किया।
इस अवसर पर सहकारी निर्वाचन प्राधिकरण के चेयरमैन देवेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि प्राधिकरण अपने कार्यकाल के तीसरे वर्ष में प्रवेश कर रहा है और विभिन्न सहकारी संस्थाओं में चुनाव कराने का महत्वपूर्ण अनुभव प्राप्त कर चुका है। उन्होंने कहा कि सहकारी समितियां लोकतांत्रिक सदस्य नियंत्रण के सिद्धांत पर कार्य करती हैं, इसलिए चुनाव प्रक्रिया का पारदर्शी, सहभागी और विश्वसनीय होना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने यह भी कहा कि सहकारी समितियों के उपनियमों में स्पष्टता होना जरूरी है, ताकि चुनाव के दौरान विवादों से बचा जा सके। विशेष रूप से मतदान अधिकार, सक्रिय सदस्यता और चुनाव लड़ने की पात्रता जैसे प्रावधान स्पष्ट रूप से परिभाषित होने चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि कई राज्यों और जिलों में काम करने वाली बड़ी बहु-राज्य सहकारी समितियों में बोर्ड का प्रतिनिधित्व सदस्यों की विविधता को प्रतिबिंबित करना चाहिए।
इस अवसर पर दो तकनीकी सत्र आयोजित किए गए, जिनके विषय थे “चुनावों के माध्यम से पारदर्शिता को बढ़ावा देना” और “चुनावी प्रक्रियाओं में शुचिता और निष्पक्षता को मजबूत करना”। इन सत्रों में सहकारी चुनाव प्रबंधन से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर प्रतिभागियों ने सक्रिय चर्चा की।
संगोष्ठी का समापन इस सामूहिक संकल्प के साथ हुआ कि सहकारी चुनावों में पारदर्शिता, निष्पक्षता और लोकतांत्रिक भागीदारी को और मजबूत किया जाएगा, ताकि सहकारिता आंदोलन भारत के सामाजिक-आर्थिक विकास का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बना रहे और 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को आगे बढ़ाने में योगदान दे सके।

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