भारत के लिए बड़ी राहत, यूरिया आयात के नए टेंडर में 449 डॉलर प्रति टन तक नीचे आये दाम

उर्वरक आयात के मोर्चे पर भारत सरकार के लिए बड़ी राहत की खबर है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में यूरिया के दाम ईरान युद्ध शुरू होने से पहले के स्तर पर पहुंच गए हैं। सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी नेशनल फर्टिलाइजर्स लिमिटेड (एनएफएल) ने 17 लाख टन यूरिया आयात के लिए जो टेंडर जारी किए थे, उसमें 449.3 डॉलर प्रति टन की लैंडेड (लागत एवं मालभाड़ा सहित) कीमत तक की बोली प्राप्त हुई हैं। इससे पहले इंडियन पोटाश लिमिटेड (आईपीएल) के 25 लाख टन यूरिया आयात के टेंडर 959 डॉलर प्रति टन तक के भाव पर हुए थे।

भारत के लिए बड़ी राहत, यूरिया आयात के नए टेंडर में 449 डॉलर प्रति टन तक नीचे आये दाम

उर्वरक आयात के मोर्चे पर भारत सरकार के लिए बड़ी राहत की खबर है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में यूरिया के दाम ईरान युद्ध शुरू होने से पहले के स्तर पर पहुंच गए हैं। सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी नेशनल फर्टिलाइजर्स लिमिटेड (एनएफएल) ने 17 लाख टन यूरिया आयात के लिए जो टेंडर जारी किए थे, उसमें 449.3 डॉलर प्रति टन की लैंडेड (लागत एवं मालभाड़ा सहित) कीमत तक की बोली प्राप्त हुई हैं। इससे पहले इंडियन पोटाश लिमिटेड (आईपीएल) के 25 लाख टन यूरिया आयात के टेंडर 959 डॉलर प्रति टन तक के भाव पर हुए थे।

एनएफएल ने 17 लाख टन यूरिया आयात का टेंडर 27 मई को जारी किया था। रूरल वॉयस  को प्राप्त जानकारी के मुताबिक इस टेंडर के लिए कुल मिलाकर 62.5 लाख टन यूरिया आपूर्ति के प्रस्ताव प्राप्त हुए। इनमें से 31.7 लाख टन पूर्वी तट और 30.8 लाख टन पश्चिमी तट के लिए हैं। 

पूर्वी तट पर आदित्य बिड़ला ग्लोबल ट्रेडिंग ने सबसे कम 444.90 डॉलर प्रति टन के भाव पर 5 लाख टन यूरिया आपूर्ति का प्रस्ताव दिया है। पूर्वी तट पर सबसे महंगी बोली सैफ्ट्को (Saftco) कंपनी की है, जिसने 617 डॉलर के भाव पर 50 हजार टन यूरिया की आपूर्ति का प्रस्ताव दिया है।

आदित्य बिड़ला कंपनी ने पश्चिमी तट पर भी 6 लाख टन यूरिया आपूर्ति का प्रस्ताव दिया है, लेकिन उसका भाव 458.40 डॉलर प्रति टन का है। सबसे कम रेट की बोली एमेरोपा कंपनी की है। उसका 449.30 डॉलर के भाव पर 2.34 लाख टन सप्लाई का प्रस्ताव है। पश्चिमी तट पर सबसे महंगी बोली भी सैफ्टको ने ही लगाई है। उसने 605 डॉलर के भाव पर 50 हजार टन की आपूर्ति का प्रस्ताव दिया है।

उर्वरक उद्योग सूत्रों का कहना है कि यूरिया की कीमतों में गिरावट की बड़ी वजह चीन से यूरिया के निर्यात का खुल जाना है। वहीं ऊंची कीमतों पर निर्यातकों को सौदे नहीं मिल रहे थे। चीन ने मार्च में यूरिया निर्यात पर रोक लगा दी थी। उसने यह कदम अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच युद्ध शुरू होने तथा होर्मुज स्ट्रेट बंद होने के ठीक बाद उठाया था।

एनएफएल से पहले आईपीएल ने 4 अप्रैल, 2026 को 25 लाख टन यूरिया आयात के टेंडर जारी किए थे। उसमें 59 लाख टन से अधिक की आपूर्ति के प्रस्ताव मिले थे। आपूर्तिकर्ताओं ने पश्चिमी तट के लिए 935 डॉलर प्रति टन और पूर्वी तट के लिए 959 डॉलर प्रति टन की बोली लगाई थी।

एनएफएल की निविदा में यह शर्त रखी गई थी कि अनुबंधित मात्रा की लोडिंग 20 जुलाई तक पूरी हो जानी चाहिए। इससे यूरिया अगस्त तक भारत पहुंच सकेगा और किसान खरीफ सीजन में इसका उपयोग कर सकेंगे।

रूरल वॉयस ने सबसे पहले 2 जून को प्रकाशित खबर में बताया था कि ग्लोबल मार्केट में यूरिया के दाम 935-959 डॉलर प्रति टन से घटकर 650 डॉलर प्रति टन पर आ गए हैं। उर्वरक उद्योग के सूत्रों ने बताया था कि ऊंची कीमतों पर खरीदारों की कमी के कारण दाम घट रहे हैं। उसी वक्त आकलन लगाया गया था कि नये टेंडर में कीमतों में और गिरावट देखी जा सकती है और ताजा टेंडर में जो दाम आये हैं वही उसी दिशा में हैं।

देश में यूरिया की खपत करीब 400 लाख टन सालाना है। वहीं उत्पादन क्षमता 300 लाख टन से कुछ अधिक है। बाकी करीब 100 लाख टन यूरिया का आयात किया जाता है। हालांकि पिछले वित्त वर्ष में आयात 100 लाख टन से अधिक रहा था। चालू साल में भी खाड़ी युद्ध के कारण गैस की आपूर्ति प्रभावित होने के चलते घरेलू उत्पादन पर असर पड़ा है। यूरिया का घरेलू उत्पादन 25 लाख टन प्रति माह से घटकर करीब 17-18 लाख टन प्रति माह रह गया है। ऐसे में आयात अधिक हो सकता है। कीमतों में इस गिरावट का फायदा सरकार को चालू साल में उर्वरक सब्सिडी में संभावित भारी इजाफा कुछ कम होने के रूप में मिलेगा।

वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में उर्वरक सब्सिडी के लिए 1.71 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। ईरान युद्ध के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में तैयार उर्वरकों और उनके कच्चे माल के दाम में बढ़ोतरी को देखते हुए कुछ विशेषज्ञ यहां तक अनुमान लगा रहे थे कि वास्तविक सब्सिडी तीन लाख करोड़ रुपये से अधिक जा सकती है। हालांकि कीमतों में गिरावट के देखते हुए अब ऐसा नहीं लगता।

भारत में सरकार यूरिया पर भारी सब्सिडी देती है और चालू खरीफ सीजन में किसी तरह की किल्लत न हो, इसके लिए ऊंची कीमतों पर आयात सौदे किए गए। लेकिन दुनिया के अन्य देशों, जिनमें ब्राजील, यूरोप के देश तथा अफ्रीका और एशिया के अधिकांश देश शामिल हैं, वहां किसानों को उर्वरक बाजार मूल्य पर ही खरीदने पड़ते हैं। ऐसे में मांग पर प्रतिकूल असर पड़ा और कीमतों में गिरावट आ गई।

कृषि एवं किसान कल्याण विभाग ने पहले खरीफ सीजन के लिए लगभग 390.5 लाख टन उर्वरकों की खपत का अनुमान लगाया गया था। हालांकि बाद में उसने इसे संशोधित करते हुए 383.9 लाख टन कर दिया है। सरकार ने सोमवार को बताया था कि जून माह के दौरान 25 लाख टन से अधिक आयातित यूरिया, डीएपी और एनपीके भारतीय बंदरगाहों पर पहुंचने की उम्मीद है।

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