भारत-न्यूजीलैंड एफटीए में कृषि उत्पादकता बढ़ाने के लिए साझेदारी, कृषि निर्यात बढ़ाने के भी अवसर

इस समझौते का एक प्रमुख स्तंभ कृषि उत्पादकता साझेदारी है, जिसका उद्देश्य दोनों देशों के बीच सहयोग के माध्यम से कृषि उत्पादन बढ़ाना, गुणवत्ता मानकों में सुधार करना और आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करना है। एफटीए में डेयरी और प्रमुख कृषि जिंसों जैसे संवेदनशील क्षेत्रों की रक्षा की गई है, ताकि बढ़ते आयात से छोटे किसानों और ग्रामीण आजीविका पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।

भारत-न्यूजीलैंड एफटीए में कृषि उत्पादकता बढ़ाने के लिए साझेदारी, कृषि निर्यात बढ़ाने के भी अवसर
भारत के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल, न्यूजीलैंड के व्यापार एवं निवेश मंत्री टॉड मैक्ले के साथ।

भारत और न्यूजीलैंड ने मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। इसमें कृषि क्षेत्र पर विशेष ध्यान दिया गया है। इसका उद्देश्य कृषि उत्पादकता बढ़ाना, कृषि निर्यात का विस्तार करना, किसानों को वैश्विक मूल्य श्रृंखला से जोड़ना और संवेदनशील घरेलू क्षेत्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी है। इस समझौते का एक प्रमुख स्तंभ कृषि उत्पादकता साझेदारी है, जिसका उद्देश्य दोनों देशों के बीच सहयोग के माध्यम से कृषि उत्पादन बढ़ाना, गुणवत्ता मानकों में सुधार करना और आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करना है।

इस साझेदारी के तहत भारतीय किसानों को उन्नत कृषि पद्धतियों, वैश्विक बाजारों तक बेहतर पहुंच और अंतरराष्ट्रीय मूल्य श्रृंखलाओं में भागीदारी का लाभ मिलने की संभावना है। यह समझौता विशेष रूप से उच्च मूल्य वाली कृषि और खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्रों में क्षमता निर्माण, इनोवेशन और ज्ञान के आदान-प्रदान पर जोर देता है।

समझौते में भारत ने अपने घरेलू कृषि क्षेत्र की सुरक्षा के लिए सतर्क दृष्टिकोण भी अपनाया है। एफटीए में डेयरी और प्रमुख कृषि जिंसों जैसे संवेदनशील क्षेत्रों की रक्षा की गई है, ताकि बढ़ते आयात से छोटे किसानों और ग्रामीण आजीविका पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।

ड्यूटी-फ्री पहुंच और निर्यात को बढ़ावा

समझौते की एक प्रमुख विशेषता यह है कि न्यूजीलैंड को होने वाले भारत के 100% निर्यात पर शुल्क समाप्त हो जाेगा। इससे कृषि, प्रसंस्कृत खाद्य और श्रम-प्रधान उद्योगों सहित विभिन्न क्षेत्रों को बड़ा प्रोत्साहन मिलेगा। इससे फल, सब्जियां, मसाले और प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों जैसे भारतीय कृषि उत्पादों के निर्यात अवसर बढ़ने की उम्मीद है। इससे किसान और कृषि-आधारित उद्योग न्यूजीलैंड और उससे आगे के प्रीमियम बाजारों तक पहुंच बना सकेंगे। यह समझौता भारत को व्यापक ओशिनिया और प्रशांत द्वीपीय बाजारों के लिए एक प्रवेश द्वार भी उपलब्ध कराता है, जिससे भारतीय कृषि निर्यात का दायरा बढ़ेगा और आपूर्ति श्रृंखला संबंध मजबूत होंगे।

निवेश और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर प्रभाव

इस एफटीए में अगले 15 वर्षों में न्यूजीलैंड द्वारा भारत में 20 अरब डॉलर के निवेश की प्रतिबद्धता शामिल है, जिससे बुनियादी ढांचे के विकास, कृषि प्रसंस्करण और ग्रामीण मूल्य श्रृंखलाओं को समर्थन मिलने की उम्मीद है। यह निवेश किसानों, कृषि उद्यमियों और एमएसएमई के लिए नए अवसर पैदा कर सकता है, साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन को भी प्रोत्साहित करेगा। यह कृषि में उन्नत तकनीक अपनाने को बढ़ावा देगा, जिससे उत्पादकता और स्थिरता में सुधार होगा। यह समझौता कृषि, खाद्य प्रसंस्करण, नवीकरणीय ऊर्जा, फार्मास्यूटिकल्स और सेवाओं सहित विभिन्न क्षेत्रों में अवसर खोलेगा, जिससे व्यापक आधार वाला विकास ढांचा तैयार होगा।

द्विपक्षीय व्यापार को मजबूती

भारत-न्यूजीलैंड के बीच व्यापारिक संबंधों में पहले ही वृद्धि देखने को मिली है। दोनों देशों के बीच वस्तु व्यापार 2023-24 में 87.3 करोड़ डॉलर से बढ़कर 2024-25 में 1.3 अरब डॉलर हो गया, जो लगभग 49% की वृद्धि दर्शाता है।

न्यूजीलैंड को भारत का वस्तु निर्यात 2024-25 में बढ़कर 71.1 करोड़ डॉलर हो गया, जो 32% की वृद्धि है। वहीं, 2024 में सेवाओं का निर्यात 13% बढ़कर 63.4 करोड़ डॉलर तक पहुंच गया, जिसमें यात्रा, आईटी और व्यवसायिक सेवाओं जैसे क्षेत्रों की प्रमुख भूमिका रही। एफटीए के तहत व्यापार बाधाओं को कम करने, बाजार पहुंच में सुधार और आर्थिक सहयोग को मजबूत करने से यह गति और तेज होने की उम्मीद है।

सेवा क्षेत्र को भी मिलेगा बढ़ावा

कृषि और वस्तु व्यापार के अलावा इस समझौते से सेवाओं के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी की उम्मीद है, जिसमें आईटी, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, इंजीनियरिंग और निर्माण शामिल हैं। यह कुशल पेशेवरों की आवाजाही को भी सुगम बनाता है, जिससे न्यूजीलैंड में भारतीय प्रतिभाओं के लिए नए अवसर खुलेंगे।

यह एफटीए एक पारदर्शी ढांचा तैयार करता है, सेवा व्यापार को बढ़ावा देता है, दीर्घकालिक निवेश को प्रोत्साहित करता है और दोनों देशों के आपसी संबंधों को मजबूत करता है। इसके अलावा आयुष जैसे उभरते क्षेत्रों, जिनमें योग प्रशिक्षक, भारतीय शेफ और सांस्कृतिक सेवाएं शामिल हैं, में सहयोग को भी इस समझौते के तहत गति मिलने की उम्मीद है।

रणनीतिक इंडो-पैसिफिक महत्व

भारत-न्यूजीलैंड एफटीए इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के संदर्भ में भी रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। यह छोटे लेकिन उच्च मूल्य वाले बाजारों के साथ भारत की भागीदारी को मजबूत करता है और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच व्यापार साझेदारियों का विविधीकरण करता है।

दूसरी तरफ, भारत के रूप में न्यूजीलैंड को दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक और बड़े उपभोक्ता आधार तक बेहतर पहुंच मिलेगी, विशेषकर कृषि और उच्च मूल्य वाले खाद्य उत्पादों के लिए। यह समझौता आर्थिक संबंधों को गहरा करने, आपूर्ति श्रृंखला की मजबूती बढ़ाने और विभिन्न क्षेत्रों में सतत विकास को बढ़ावा देने की व्यापक दृष्टि को दर्शाता है।

इस समझौते का स्वागत करते हुए निर्यातकों के संगटन फियो के अध्यक्ष एस. सी. रल्हन ने कहा कि यह एफटीए  भारतीय निर्यातकों के लिए नए रास्ते खोलेगा, जिससे कृषि, कपड़ा, दवा, इंजीनियरिंग सामान जैसे प्रमुख क्षेत्रों और आईटी व आईटीईएस, व्यावसायिक सेवाओं, इंजीनियरिंग, शिक्षा, निर्माण तथा स्वास्थ्य सेवाओं जैसे सेवा क्षेत्रों में न्यूज़ीलैंड के बाजार तक उनकी पहुंच बढ़ेगी। टैरिफ बाधाओं में कमी और व्यापार प्रक्रियाओं के सरलीकरण से भारतीय व्यवसायों को न्यूज़ीलैंड के बाज़ार में बेहतर प्रतिस्पर्धात्मकता का लाभ मिलेगा।

फियो  प्रमुख ने इस बात पर ज़ोर दिया कि एफटीए के दायरे में प्रसंस्कृत भोजन, डेयरी के विकल्प और जैविक उत्पादों जैसे क्षेत्रों में उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिल सकती है। यह जैविक प्रमाणन के लिए एमआरए (आपसी मान्यता समझौता) बाज़ार तक पहुंच को सुगम बनाएगा। पहली बार आयुष उत्पादों को भी वहां के बाज़ार तक पहुंच प्राप्त होगी। इसके अतिरिक्त, सेवा क्षेत्र को बढ़ी हुई गतिशीलता के प्रावधानों और पेशेवर योग्यताओं की आपसी मान्यता से लाभ मिलने की संभावना है।

रल्हन ने कहा कि एफटीए के लाभों को पूरी तरह से प्राप्त करने के लिए, निर्यातकों का ' उत्पत्ति के नियम', अनुपालन आवश्यकताओं और नियामक ढाँचों के बारे में सूचित रहना अत्यंत आवश्यक है। क्षमता-निर्माण की पहल, मार्केट इंटेलीजेंस और सरकारी सहायता यह सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएँगे कि भारतीय निर्यातक प्रस्तुत अवसरों का प्रभावी ढंग से लाभ उठा सकें।

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