ईरान युद्ध का असर: अप्रैल में 27 फीसदी घटा भारत का बासमती निर्यात, घरेलू बाजार में 10 फीसदी तक गिरे दाम
ईरान युद्ध के कारण खाड़ी देशों को निर्यात अटकने से अप्रैल 2026 में भारत से बासमती चावल के निर्यात करीब 27 फीसदी की गिरावट आई है। इससे घरेलू बाजार में बासमती के दाम 8-10 फीसदी तक गिर गये हैं।
पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और खाड़ी क्षेत्र में भू-राजनीतिक तनाव का असर भारत के बासमती चावल निर्यात पर दिखने लगा है। वित्त वर्ष 2026-27 के अप्रैल माह में भारत से बासमती चावल निर्यात में भारी गिरावट आई है। हालांकि, इस दौरान देश के कुल चावल निर्यात में करीब 9 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल 2026 के दौरान भारत से बासमती चावल का निर्यात 4.74 लाख टन रहा, जबकि अप्रैल 2025 में यह 6.47 लाख टन था। इस प्रकार, सालाना आधार पर बासमती निर्यात में 26.72 फीसदी की कमी आई है। निर्यात में गिरावट से घरेलू बाजार में बासमती की कीमतें 8-10 फीसदी तक गिर गई हैं। ईरान युद्ध शुरू होने से पहले बासमती चावल का दाम लगभग 88-90 रुपये किलो था जो अब घटकर 78-80 रुपये किलो के आसपास आ गया है।
भारत दुनिया का सबसे बड़ा चावल निर्यातक है। देश से सालाना करीब 50 हजार करोड़ रुपये के बासमती निर्यात को ईरान युद्ध से बड़ा झटका लगा है। भारत का बासमती चावल मुख्य रूप से ईरान, सऊदी अरब, इराक और संयुक्त अरब अमीरात जैसे खाड़ी देशों को निर्यात होता है। बासमती निर्यात में गिरावट का असर खरीफ सीजन में धान की बुवाई पर भी पड़ सकता है क्योंकि कम दाम मिलने के कारण किसानों का रुझान घट सकता है।

हरियाणा चावल निर्यातक संघ के अध्यक्ष सुशील कुमार जैन ने रूरल वॉयस को बताया कि युद्ध के चलते ईरान और अफगानिस्तान को बासमती चावल का निर्यात नहीं हो पा रहा है। क्योंकि जहाजों की आवाजाही लगभग बंद हो गई है। इसी के चलते अप्रैल के बासमती निर्यात में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। समुद्री मार्ग में रूकावट के चलते शिपिंग और बीमा कंपनियों ने चार्ज कई गुना तक बढ़ा दिए हैं। इससे भी व्यापार प्रभावित हो रहा है।
निर्यात बाधाओं और महंगे शिपिंग खर्च को देखते हुए निर्यातकों ने केंद्र सरकार से राहत उपायों और वैकल्पिक शिपिंग सहायता की मांग की है। सुशील जैन का कहना है कि मौजूदा स्थितियों को देखते हुए बासमती चावल के निर्यात पर 70 रुपये प्रति टन की लेवी पर रोक लगाने की मांग की है। चावल निर्यातकों से यह वसूली बासमती एक्सपोर्ट डेवलपमेंट फंड (BEDF) के लिए की जाती है जिसके तहत सालाना करीब 45 करोड़ रुपये जुटाए जाते हैं। जैन का कहना है कि निर्यातकों को मिलने वाली 3 फीसदी की ब्याज छूट पर सरकार ने 50 लाख रुपये की लिमिट लगा दी है। इसे भी खत्म किया जाना चाहिए।
गैर-बासमती चावल निर्यात बढ़ा
अप्रैल 2026 में भारत से गैर-बासमती चावल के निर्यात में बढ़ोतरी हुई है, जिससे देश का कुल चावल निर्यात 20.44 लाख टन तक पहुंच गया, जो अप्रैल 2025 में 18.76 लाख टन था। अप्रैल 2026 में भारत से 15.70 लाख टन गैर-बासमती चावल का निर्यात हुआ, जबकि पिछले साल की समान अवधि में यह 12.29 लाख टन था। भारत से गैर-बासमती चावल का निर्यात मुख्यत: अफ्रीकी देशों और बांग्लादेश को होता है।
वर्ष 2025-26 के दौरान देश में रिकॉर्ड 15.40 करोड़ टन चावल उत्पादन के कारण घरेलू बाजार में चावल की कीमतें पहले ही दबाव में हैं। ऐसे में गैर-बासमती चावल निर्यात में बढ़ोतरी राहत की खबर है, लेकिन देश के बासमती निर्यात के लिए आने वाले महीने मुश्किल भरे हो सकते हैं।
युद्ध की आशंका के बीच ईरान ने वर्ष 2025-26 में भारत से लगभग डेढ़ लाख टन अधिक बासमती चावल का आयात कर भंडारण कर लिया था। साथ ही भारत से यूएई, यमन, कुवैत और जॉर्डन को भी अधिक बासमती निर्यात हुआ। इसी के चलते वर्ष 2025-26 में भारत से रिकॉर्ड 65.21 लाख टन बासमती चावल का निर्यात हुआ था, जबकि वर्ष 2024-25 में यह आंकड़ा 60.65 लाख टन रहा था। लेकिन साल 2026-27 की शुरुआत से ही बासमती निर्यात में गिरावट दर्ज की जा रही है।


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