खुदरा महंगाई 8 साल में सबसे ज्यादा, खाद्य पदार्थों की महंगाई 8.38 फीसदी पर पहुंची

महंगाई दर बढ़ने में खाने-पीने की चीजों ने का बड़ा हाथ है। अप्रैल में खाद्य महंगाई दर बढ़कर 8.38 फीसदी हो गई, जो मार्च में 7.68 फीसदी थी। एक साल पहले यह सिर्फ 1.96 फीसदी थी। फूड बास्केट में लगभग सभी चीजों की कीमतों में इजाफा हुआ है

खुदरा महंगाई 8 साल में सबसे ज्यादा, खाद्य पदार्थों की महंगाई 8.38 फीसदी पर पहुंची

महंगाई रुकने का नाम नहीं ले रही है। अप्रैल में खुदरा महंगाई आठ साल के उच्चतम स्तर 7.79 फीसदी पर पहुंच गई। मार्च में खुदरा महंगाई दर 6.95 फीसदी पर और अप्रैल 2021 में 4.23 फीसदी थी। यह लगातार चौथा महीना है जब खुदरा महंगाई (सीपीआई) दर भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की 6 फीसदी की ऊपरी सीमा के पार गई है। सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय की तरफ से जारी आंकड़ों से पता चलता है कि महंगाई दर बढ़ने में खाने-पीने की चीजों ने का बड़ा हाथ है। अप्रैल में खाद्य महंगाई दर बढ़कर 8.38 फीसदी हो गई, जो मार्च में 7.68 फीसदी थी। एक साल पहले यह सिर्फ 1.96 फीसदी थी।

फूड बास्केट में लगभग सभी चीजों की कीमतों में इजाफा हुआ है। खाद्य तेल की कीमतें अप्रैल में 17.28 फीसदी बढ़ गईं। इसके अलावा सब्जियों की कीमतों में 15.41 फीसदी, मसालों में 10.56 फीसदी और मांस-मछली की कीमतों में 6.97 फीसदी की तेजी देखी गई। तैयार भोजन, स्नैक्स, मिठाई आदि में 7.10 फीसदी की वृद्धि हुई। अनाज और इसके उत्पादों में 5.96 फीसदी और दूध और दुग्ध उत्पादों के दाम में 5.47 फीसदी की वृद्धि हुई।

आंकड़ों से यह भी पता चलता है कि गांवों में शहरों से ज्यादा महंगाई है। खुदरा महंगाई दर शहरों में 7.09 फीसदी थी तो गांवों में यह 8.38 फीसदी पर पहुंच गई। खाने-पीने की चीजें भले गांवों में उपजाई जाती हों, लेकिन खाद्य महंगाई गांवों में ही ज्यादा है। अप्रैल में गांवों में खाद्य महंगाई 8.50 फीसदी और शहरों में 8.09 फीसदी थी। अप्रैल 2021 में गांवों में खाद्य महंगाई 1.31 फीसदी और शहरों में 3.15 फीसदी थी।

खाद्य पदार्थों के अलावा अन्य सेगमेंट में भी चीजों के दाम बढ़े हैं। ईंधन 10.80 फीसदी महंगा हुआ है। कपड़े और जूते की कीमतों में 9.85 फीसदी था घरों में 3.47 फीसदी की वृद्धि हुई है।

भारतीय रिजर्व बैंक अपनी मौद्रिक नीति तय करने में खुदरा महंगाई को ही ध्यान में रखता है। वैसे तो यह बैठक हर दो महीने बाद होती है, लेकिन पिछले हफ्ते अचानक बीच में ही रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने बैठक की और रेपो दर को 0.40 फीसदी बढ़ाकर 4.40 फीसदी कर दिया। लगातार बढ़ती महंगाई को देखते हुए अगली बैठक में भी रेपो दर बढ़ाने जाने की उम्मीद है। रिजर्व बैंक सामान्य बैंकों को जिस ब्याज पर कर्ज देता है उसे रेपो कहते हैं। आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने पिछले हफ्ते कहा था कि रेपो दर बढ़ाने का उद्देश्य महंगाई पर लगाम लगाना है।