नीति आयोग का AgriBio 2.0 मिशनः CRISPR तकनीक से जलवायु अनुकूल फसलें और जैविक इनपुट विकसित करने का लक्ष्य

नीति आयोग ने AgriBio 2.0 मिशन का प्रस्ताव दिया है, जिसके तहत CRISPR आधारित जीन एडिटिंग से जलवायु अनुकूल फसलें विकसित की जाएंगी और बायोफर्टिलाइजर व बायोपेस्टीसाइड को बढ़ावा दिया जाएगा। मिशन का उद्देश्य रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता घटाना, किसानों की आय बढ़ाना, खाद्य सुरक्षा मजबूत करना और भारत को टिकाऊ कृषि जैव प्रौद्योगिकी में वैश्विक अग्रणी बनाना है।

नीति आयोग का AgriBio 2.0 मिशनः CRISPR तकनीक से जलवायु अनुकूल फसलें और जैविक इनपुट विकसित करने का लक्ष्य

नीति आयोग ने भारतीय कृषि को जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों के अनुरूप बनाने और किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से AgriBio 2.0 नामक मिशन का प्रस्ताव रखा है। इसके तहत CRISPR आधारित जीन एडिटिंग, जैव उर्वरकों (बायोफर्टिलाइजर) और जैव कीटनाशकों (बायोपेस्टीसाइड) के व्यापक उपयोग के जरिए 2035 तक जलवायु अनुकूल फसलों का विकास, रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने और टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देने का लक्ष्य है।

यह प्रस्ताव नीति आयोग की रिपोर्ट ‘रोडमैप फॉर बिल्डिंग इंडिया एज ए लीडिंग बायोइकोनॉमी पावरहाउस बाइ 2035’ का हिस्सा है। रिपोर्ट में AgriBio 2.0 को छह राष्ट्रीय बायो मिशनों में शामिल किया गया है, जो अगले दशक में भारत की बायोइकोनॉमी को नई दिशा देंगे। इस मिशन का संचालन जैव प्रौद्योगिकी विभाग (DBT), भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) तथा कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय संयुक्त रूप से करेंगे। मिशन का प्रमुख उद्देश्य ऐसी फसल किस्मों का विकास करना है जो सूखा, अत्यधिक गर्मी, लवण और नए उभरते कीटों का बेहतर सामना कर सकें, साथ ही खेती को अधिक टिकाऊ और पर्यावरण अनुकूल बनाया जा सके।

रिपोर्ट में किसी नई योजना की बजाय मौजूदा कृषि कार्यक्रमों को एकीकृत करने पर जोर दिया गया है। इसके तहत राष्ट्रीय सतत कृषि मिशन (NMSA), परंपरागत कृषि विकास योजना (PKVY), राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन, मिशन फॉर इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट ऑफ हॉर्टिकल्चर, सॉयल हेल्थ कार्ड योजना तथा DBT की बायोटेक किसान, बायोटेक कृषि इनोवेशन साइंस एप्लीकेशंस नेटवर्क, फार्मर रिसोर्स ग्रुप्स, बायोफ्यूल एवं बायोएनर्जी मिशन और बायोफर्टिलाइजर एवं बायोपेस्टीसाइड क्वालिटी कंट्रोल लैब्स जैसी पहलों को एक साझा ढांचे में लाने की सिफारिश की गई है। उद्देश्य यह है कि प्रयोगशालाओं में विकसित नई तकनीकों को तेजी से किसानों के खेतों तक पहुंचाया जा सके।

AgriBio 2.0 का सबसे महत्वपूर्ण पहलू आधुनिक जैव प्रौद्योगिकी का उपयोग है। रिपोर्ट में CRISPR आधारित जीन एडिटिंग, जीनोमिक चयन (Genomic Selection) और मॉलिक्यूलर ब्रीडिंग के जरिए ऐसी नई फसल किस्में विकसित करने की सिफारिश की गई है जो जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न चुनौतियों का सामना कर सकें। इन तकनीकों से सूखा, गर्मी, लवण और नए कीटों के प्रति सहनशील फसलें विकसित होंगी, जिससे देश की खाद्य सुरक्षा भी मजबूत होगी।

मिशन में जैविक कृषि इनपुट्स के विस्तार पर भी विशेष जोर दिया गया है। नीति आयोग ने उच्च गुणवत्ता वाले बायोफर्टिलाइजर, बायोपेस्टीसाइड, माइक्रोबियल कंसोर्टिया और मृदा स्वास्थ्य सुधारकों के व्यापक उपयोग की सिफारिश की है। इसका उद्देश्य रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करना, मिट्टी की गुणवत्ता सुधारना और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना है। यह पहल भारत कृषि पहल (Bharat Krishi Initiative) और सतत कृषि मिशन के लक्ष्यों के अनुरूप है।

किसानों तक विश्वसनीय तकनीक पहुंचाने के लिए बायोटेक किसान हब, कृषि विज्ञान केंद्र (KVKs) और राज्य कृषि विश्वविद्यालयों के माध्यम से नई किस्मों और जैविक इनपुट्स का फील्ड ट्रायल, सत्यापन और बड़े स्तर पर प्रदर्शन का सुझाव दिया गया है। इससे किसानों का भरोसा बढ़ेगा और नई तकनीकों को अपनाने में तेजी आएगी।

नीति आयोग ने देशभर में बायोइनपुट प्रोडक्शन एंड इनोवेशन क्लस्टर्स स्थापित करने का भी प्रस्ताव दिया है। इन्हें मौजूदा ग्रामीण जैव प्रौद्योगिकी केंद्रों के साथ विकसित किया जाएगा, जहां बायोफर्टिलाइजर, बायोस्टिमुलेंट, बायोपेस्टीसाइड और माइक्रोबियल सीड कोटिंग्स का उत्पादन होगा। इन क्लस्टर्स को पीएम प्रणाम योजना, आत्मनिर्भर क्लीन प्लांट पहल तथा राज्यों की जैविक एवं प्राकृतिक खेती योजनाओं से जोड़ा जाएगा, ताकि पर्यावरण-अनुकूल कृषि तकनीकों का तेजी से विस्तार हो सके।

आयोग के अनुसार AgriBio 2.0 का उद्देश्य केवल फसल उत्पादन बढ़ाना नहीं, बल्कि मिट्टी के स्वास्थ्य की रक्षा करना, पर्यावरण नुकसान कम करना तथा मानव, पशु और पर्यावरण स्वास्थ्य की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी है। वर्ष 2035 तक इस मिशन के माध्यम से जलवायु अनुकूल फसलों का व्यावसायिक स्तर पर प्रसार, प्रमुख फसल प्रणालियों में जैविक इनपुट का मुख्यधारा में उपयोग तथा भारत को टिकाऊ कृषि जैव प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में वैश्विक अग्रणी बनाने का लक्ष्य रखा गया है।

AgriBio 2.0, नीति आयोग की व्यापक बायोइकोनॉमी रोडमैप का हिस्सा है, जिसका लक्ष्य भारत की बायोइकोनॉमी को 2025 के 195.3 अरब डॉलर से बढ़ाकर 2035 तक 691 अरब डॉलर और 2047 तक 2.6 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचाना है। इसके साथ ही 2035 तक 3 करोड़ से अधिक उच्च कौशल वाले रोजगार सृजित करने का भी लक्ष्य रखा गया है।

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