कम लागत में फसल उत्पादन के लिए प्राकृतिक खेती पर शोध की जरूरतः बद्री नारायण चौधरी

फसल उत्पादन बढ़ाने वाली महंगी तकनीक की बजाय कम लागत वाली तकनीक पर ध्यान देने की जरूरत है, ताकि किसानों के लाभ का दायरा बढ़ सके। यह प्राकृतिक खेती के माध्यम से किया जा सकता है

कम लागत में फसल उत्पादन के लिए प्राकृतिक खेती पर  शोध की जरूरतः बद्री नारायण चौधरी

भारतीय किसान संघ (बीकेएस) के अखिल भारतीय महामंत्री बद्री नारायण  चौधरी  ने कहा है कि अब फसल उत्पादन बढ़ाने वाली तकनीक की बजाय, कम लागत वाली उत्पादन की तकनीक पर जोर देने की जरूरत है ताकि, खेती में लाभ का दायरा बढ़ जा सके।  उन्होंने कहा कि देश के खाद्य उत्पादन में हरित क्रांति के योगदान को भुलाया नहीं जा सकता। लेकिन अब हरित क्रांति के कुछ दुष्परिणाम आने लगे हैं। इसलिए हरित क्रांति आधारित शोध के रास्ते से हटकर कृषि वैज्ञानिकों और अनुसंधान संस्थानों को प्राकृतिक खेती और पुराने तरीकों पर शोध पर ध्यान देना होगा। दिल्ली में आयोजित हुए रूरल वॉयस एग्रीकल्चर कॉन्क्लेव और नेडाक अवार्ड्स 2021 के  समापन सत्र के विषय  कृषि और ग्रामीण क्षेत्रों के विकास के लिए आवश्यक नीतियों पर बोलते हुए उन्होंने यह बातें कही।

बीकेएस के महामंत्री ने कहा कि, देश के किसानों की सबसे बड़ी शिकायत यह है कि सरकार के पास किसानों की समस्याओं को सुनने का समय नहीं है। उन्होंने कहा कि कुछ सदियों पहले जब हमारे देश में कोई उद्योग और व्यापार नहीं था. देश  पूरी तरह से कृषि पर निर्भर था। उस वक्त हमारे देश को सोने की चिड़िया कहा जाता था, क्योंकि उस वक्त  के लोग प्राकृतिक तरीके से खेती करते थे। प्रधानमंत्री भी प्राकृतिक खेती पर भी चर्चा कर रहे हैं इसलिए सभी को इसके बारे में सोचने की जरूरत है।

चौधरी ने कहा कि हरित क्रांति के बाद देश में उत्पादन के लिए सिर्फ धान-गेहूं की फसल पर शोध किया गया और इन फसलों का रकबा बढ़ा, मगर इन फसलों की  तुलना में दूसरी फसलों का उत्पादन ना मिलने के कारण किसानों ने खेती कम कर दिये ,इसलिए दूसरी फसलों पर शोध करने की जरूरत है  ।

पिछली सरकार की नीति पर बोलते हुए चौधरी ने कहा कि चौथी पंचवर्षीय योजना में कहा गया है कि अगर देश के किसानों को उनकी उपज का पूरा मूल्य दिया जाएगा तो देश की आर्थिक व्यवस्था बिगड़ जाएगी। बीकेएस महासचिव  ने कहा कि 1950 की पंचवर्षीय योजना से देश के ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि नीति होनी चाहिए थी लेकिन 60 वर्षों में केवल औद्योगिक नीति पर काम किया गया। उन्होंने कहा कि आजादी का अमृत महोत्सव मनाया जा रहा है। लेकिन सरकारों ने आज तक कृषि नीति नहीं बनाई है, इसलिए देश में कृषि नीति तैयार की जानी चाहिए। और इसकी हर पांच  साल पर समीक्षा होनी चाहिए।

चौधरी ने कहा कि पिछली सरकार की नीतियों के कारण गांव में पिछड़ापन है। खेती की लागत कम करने के लिए नीतियां बनानी चाहिए। वर्तमान में देश के कई किसान  प्राकृतिक खेती और जैविक खेती से  कम लागत पर बेहतर उत्पादन कर  रहे हैं। उन्होंने कहा कि पिछली सरकारों में किसानों का कोई सम्मान नहीं था। देश के  किसानों को पदम श्री सम्मान से नवाजा जा रहा है।