ईरान युद्ध से अटका भारत का कृषि निर्यात, माल भेजने के वैकल्पिक रूट तलाश रहा एपीडा
एपीडा की कोशिश है कि पेरिशेबल उत्पादों का निर्यात पहले हो। इसके लिए संयुक्त अरब अमीरात की लॉजिस्टिक्स कंपनी डीपी वर्ल्ड के साथ मिलकर देश में अटके इन उत्पादों को यूएई और सऊदी अरब भेजा जाएगा। पहली कोशिश नामक्कल से अंडों के निर्यात की है।
इजराइल-अमेरिका और ईरान के बीच युद्भाध के बीच भारत से होने वाले कृषि उत्पादों के निर्यात संकट को हल करने की कोशिशें जारी हैं। हालांकि अभी बहुत सीमित राहत मिलने का ही रास्ता दिख रहा है। सूत्रों के मुताबिक एपीडा जल्दी खराब होने वाले (पेरिशेबल) उत्पादों के निर्यात को प्राथमिकता दे रहा है, जिसमें फल और सब्जियां शामिल हैं। इसके लिए संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) की लॉजिस्टिक्स कंपनी डीपी वर्ल्ड के साथ मिलकर देश में अटके इन उत्पादों को यूएई और सऊदी अरब भेजा जाएगा। पहली कोशिश नामक्कल से अंडों के निर्यात की है। इस योजना के तहत यूएई स्थित खोरफक्कन बंदरगाह के जरिये निर्यात करने की संभावनाएं देखी जा रही हैं। वहां पहुंचने वाले उत्पादों को सड़क के रास्ते जब्बाली और सऊदी अरब भेजा जाएगा।
इसके साथ ही एपीडा ने पोर्ट पर पहुंचे माल पर डेमरेज शुल्क कम कराने के लिए भी पोर्ट अथारिटीज से बात की है ताकि निर्यातकों को राहत मिल सके। वहीं कुछ निर्यातकों ने पोर्ट से अपना माल वापस मंगाकर घरेलू बाजार में बेचने का फैसला किया है। इसे कंटेनर रिटर्न करना का कहा जाता है। इस प्रक्रिया में औसतन पांच दिन का समय लगता है लेकिन एपीडा ने संबंधित विभागों के साथ तालमेल कर इसे घटाकर दो दिन कराने में निर्यातकों की मदद की है।
सूत्रों ने बताया कि कुछ कंपनियों के निर्यात के यूएई पहुंचने के बाद भी जहाज को बंदरगाह पर नहीं लगने दिया गया। इसमें एक कंपनी के 450 कंटेनर हैं। इसके लिए भारत सरकार वहां की सरकार से बातचीत कर मामले को सुलझाने की कोशिश कर रही है क्योंकि इस जहाज को वहां पहुंचे हुए एक सप्ताह से अधिक हो गया है।
सूत्रों के मुताबिक चावल के कंटेनर भी फंसे हुए हैं। निर्यातकों को शिपिंग कंपनियों द्वारा लगाया गया 2500 से 4000 डॉलर प्रति कंटेनर इमर्जेंसी कॉन्फलिक्ट चार्ज भी देना पड़ रहा है। इस संकट में सरकार जो कोशिश कर रही है उसमें खाड़ी देशों को होने वाले निर्यात का करीब 30 फीसदी माल पहुंचाने का रास्ता निकालने की कोशिश हो रही है। लेकिन अभी यह बातचीत के स्तर पर ही है और अभी माल जाना शुरू नहीं हो सका है।
अंडों की बड़ी खेप समुद्र में फंसी
भारत के सबसे बड़े अंडा उत्पादन केंद्र नमक्कल से निर्यात किए गए लगभग 3.5 करोड़ अंडे पिछले 10 दिनों से अधिक समय से समुद्र में फंसे हुए हैं। करीब 70 कंटेनरों को लेकर रवाना हुआ एक जहाज युद्ध के कारण मध्य-पूर्व के बंदरगाहों तक नहीं पहुंच सका। बताया जाता है कि प्रत्येक कंटेनर में लगभग पांच लाख अंडे हैं, जिन्हें 28 फरवरी को भेजा गया था। निर्यातकों का अनुमान है कि भारत से भेजे गए करीब छह करोड़ अंडे अभी तक अपने गंतव्य बाजारों तक नहीं पहुंच पाए हैं। कुछ कंटेनर समुद्र में लंगर डाले हुए हैं, जबकि अन्य इस समय मुंबई के जवाहरलाल नेहरू पोर्ट पर फंसे हुए हैं। पोल्ट्री किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि इन खेपों को नमक्कल वापस लौटाना पड़ा तो यहां भी स्थिति बिगड़ेगी, क्योंकि पहले से ही मांग कमजोर है और आपूर्ति अधिक है।
हाल के वर्षों में भारत से अंडों और मुर्गियों का निर्यात तेजी से बढ़ा है। एपीडा के आंकड़ों के अनुसार, 2022-23 में यह निर्यात 6.30 करोड़ डॉलर का था, जो 2023-24 में बढ़कर 11.35 करोड़ डॉलर हो गया। इसके बाद 2024-25 में यह थोड़ा घटकर 9.69 करोड़ डॉलर रह गया। इस व्यापार में मध्य-पूर्व का दबदबा है, जहां ओमान 46.66% हिस्सेदारी के साथ सबसे बड़ा बाजार है। इसके बाद संयुक्त अरब अमीरात (20.09%), मालदीव (17.82%), कतर (6.08%) और बहरीन (1.66%) का स्थान है।
फल निर्यातक तलाश रहे वैकल्पिक बाजार
पश्चिम एशिया में अनिश्चितता का असर फल निर्यातकों पर भी पड़ रहा है। कर्नाटक के आम उत्पादक, जो परंपरागत रूप से खाड़ी देशों के बाजारों पर काफी निर्भर रहे हैं, अब नई फसल का समय नजदीक आते ही वैकल्पिक बाजारों की तलाश कर रहे हैं।
धारवाड़ और बेलगावी जैसे जिलों के उत्पादक आम तौर पर अबू धाबी, ईरान, कुवैत और यूएई जैसे देशों को आम निर्यात करते रहे हैं। हालांकि, निर्यातकों का कहना है कि जो व्यापारी आम तौर पर महीनों पहले बागानों की बुकिंग कर लेते थे, उन्होंने इस वर्ष अभी तक खरीद की पुष्टि नहीं की है।
एपीडा के अनुसार भारत से ताजे आम का निर्यात 2022-23 में 4.85 करोड़ डॉलर था, जो 2023-24 में बढ़कर 6.01 करोड़ डॉलर हो गया और 2024-25 में घटकर 5.65 करोड़ डॉलर रह गया। संयुक्त अरब अमीरात 35.01% हिस्सेदारी के साथ सबसे बड़ा बाजार बना हुआ है। इसके बाद अमेरिका (20.39%), यूनाइटेड किंगडम (16.06%), कुवैत (5.23%) और कतर (4.21%) का स्थान है।
खाड़ी क्षेत्र में अनिश्चितता को देखते हुए उत्पादक संगठनों ने निर्यात को विविध बाजारों में फैलाने की कोशिश शुरू कर दी है। इसके तहत अमेरिका, इंग्लैंड और सिंगापुर जैसे बाजारों में निर्यात बढ़ाने पर विचार किया जा रहा है। निर्यातकों का कहना है कि विश्वभर में लोकप्रिय अल्फांसो किस्म अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अब भी सबसे अधिक मांग वाली बनी हुई है।

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