केंद्र ने प्याज का खरीद मूल्य बढ़ाकर 16.50 रुपये प्रति किलो किया, नई कीमत शनिवार से लागू

केंद्र सरकार ने प्याज का खरीद मूल्य 15.80 रुपये से बढ़ाकर 16.50 रुपये प्रति किलो कर दिया है। यह नई दर शनिवार, 13 जून 2026 से लागू हो गई है। हालांकि महाराष्ट्र के किसान बढ़ती उत्पादन लागत का हवाला देते हुए इस और बढ़ाने की मांग कर रहे हैं।

केंद्र ने प्याज का खरीद मूल्य बढ़ाकर 16.50 रुपये प्रति किलो किया, नई कीमत शनिवार से लागू

केंद्र सरकार ने बफर स्टॉक कार्यक्रम के तहत प्याज के न्यूनतम खरीद मूल्य को 15.80 रुपये प्रति किलोग्राम से बढ़ाकर 16.50 रुपये प्रति किलोग्राम कर दिया है। संशोधित दर शनिवार, 13 जून 2026 से लागू हो गई है। यह फैसला केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री प्रल्हाद जोशी की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक के बाद लिया गया। बैठक में उपभोक्ता मामले विभाग के अधिकारियों के साथ प्याज खरीद को बेहतर बनाने और किसानों को उचित मूल्य दिलाने के उपायों पर चर्चा की गई।

मंत्री ने बताया कि मंडियों में चल रही कीमतों और भंडारण योग्य प्याज की गुणवत्ता संबंधी आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए खरीद मूल्य में संशोधन किया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि खरीद मूल्य निर्धारण की प्रक्रिया को अधिक गतिशील बनाया गया है ताकि बाजार की परिस्थितियों के अनुसार समय पर हस्तक्षेप किया जा सके और किसानों के हितों की बेहतर सुरक्षा हो।

केंद्र सरकार हर वर्ष मूल्य स्थिरीकरण कोष (पीएसएफ) के तहत प्याज का बफर स्टॉक तैयार करती है, जिससे बाजार में कीमतों में अत्यधिक उतार-चढ़ाव की स्थिति में हस्तक्षेप किया जा सके। चालू सीजन के लिए सरकार ने 2 लाख टन प्याज खरीदने का लक्ष्य रखा है, जबकि वर्ष 2025-26 में 3 लाख टन प्याज की खरीद की गई थी। वर्तमान सीजन के लिए प्याज खरीद अभियान 15 मई से शुरू हो चुका है। यह खरीद मुख्य रूप से नाफेड और एनसीसीएफ के माध्यम से की जा रही है।

हालांकि खरीद मूल्य में बढ़ोतरी के बावजूद देश के सबसे बड़े प्याज उत्पादक राज्य महाराष्ट्र के किसान संतुष्ट नहीं हैं। कुछ किसान संगठनों का कहना है कि उत्पादन लागत में भारी वृद्धि को देखते हुए सरकार को कम से कम 3,000 रुपये प्रति क्विंटल यानी 30 रुपये प्रति किलो की दर से खरीद करनी चाहिए।

किसानों का तर्क है कि श्रम, उर्वरक, सिंचाई और अन्य कृषि लागतों में बढ़ोतरी के कारण मौजूदा खरीद मूल्य पर उन्हें पर्याप्त लाभ नहीं मिल पा रहा है। उनका कहना है कि सरकारी एजेंसियों द्वारा दी जा रही कीमत खेती की वास्तविक लागत की भरपाई करने और किसानों को उचित मुनाफा देने के लिए पर्याप्त नहीं है।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025-26 में देश का प्याज उत्पादन 307.37 लाख टन रहने का अनुमान है, जो पिछले वर्ष के 307.67 लाख टन उत्पादन से मामूली रूप से कम है।

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