नागौरी मेथी पर किसानों को मिला कानूनी अधिकार, भारत सरकार के पौध किस्म प्राधिकरण ने किया पंजीकृत

राजस्थान की प्रसिद्ध नागौरी पान मेथी को भारत सरकार के पौध किस्म एवं किसान अधिकार संरक्षण प्राधिकरण (PPVFRA) ने किसानों की सामुदायिक किस्म के रूप में पंजीकृत कर मान्यता दी है। इससे नागौर के किसानों को इस विशिष्ट मेथी पर कानूनी अधिकार मिला है, साथ ही इसकी असली पहचान स्थापित होने और वैश्विक बाजार में ब्रांड वैल्यू बढ़ने का रास्ता भी खुला है।

नागौरी मेथी पर किसानों को मिला कानूनी अधिकार, भारत सरकार के पौध किस्म प्राधिकरण ने किया पंजीकृत

राजस्थान के नागौर जिले की पहचान नागौरी पान मेथी को कानूनी मान्यता मिल गई है। भारत सरकार के पौध किस्म एवं कृषक अधिकार संरक्षण प्राधिकरण (PPVFRA) ने “नागौरी पान मेथी” की बीज किस्म को आधिकारिक रूप से किसानों की सामुदायिक किस्म (कम्युनिटी राइट्स) के रूप में पंजीकृत किया है। यह जानकारी 02 फरवरी 2026 को प्रकाशित प्लांट वैरायटी जर्नल में दी गई है जो भारत सरकार के गजैट के समतुल्य है।

इस पंजीकरण का अर्थ है कि अब नागौर के किसान कानूनी रूप से नागौरी पान मेथी के असली मालिक माने जाएंगे। यह पहली बार है कि इस विशेष पान मेथी के बीजों को वैश्विक स्तर पर कानूनी बौद्धिक संपदा अधिकार प्राप्त हुआ है। यह उन किसानों की सामूहिक नवाचार, संरक्षण और पारंपरिक ज्ञान को मान्यता देता है, जिन्होंने पीढ़ियों से नागौर की शुष्क कृषि-जलवायु में इस विशिष्ट और उपेक्षित पौध आनुवंशिक संसाधन को संरक्षित और विकसित किया है।

किसानों को मिले कानूनी अधिकार

पौध किस्म एवं कृषक अधिकार अधिनियम, 2001 के तहत नागौर के मुंडवा किसान समुदाय, जिसका प्रतिनिधित्व महिला प्रधान गीता देवी कर रही हैं, को नागौरी पान मेथी का वैधानिक संरक्षक और अधिकारधारी माना गया है।

संयुक्त राष्ट्र का खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) वर्ष 2026 को अंतरराष्ट्रीय महिला किसान वर्ष के रूप में मना रहा है, ऐसे समय में किसानों को सामुदायिक अधिकार प्रदान कर पौध किस्म एवं किसान अधिकार प्राधिकरण (PPVFRA) ने नागौरी पान मेथी पर किसानों, विशेषकर महिला किसानों को अधिकार देकर महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है।

पंजीकरण से किसानों को लाभ

  • अब कोई भी बाहरी व्यक्ति या कंपनी नागौरी पान मेथी का नाम या बीज गलत तरीके से इस्तेमाल नहीं कर सकेगी।
  • दुनिया भर में नागौरी पान मेथी के बीजों से उत्पादित खुशबूदार पान मेथी को एक ब्रांड के रूप में स्थापित करने में मदद मिलेगी।
  • यह पंजीकरण नागौरी पान मेथी को भौगोलिक संकेतक (GI टैग) दिलाने की दिशा में एक मजबूत कदम है, जिससे किसानों को बेहतर दाम और बाजार में पहचान मिलेगी।

साउथ एशिया बायोटेक्नोलॉजी सेंटर (SABC) के डॉ. भागीरथ चौधरी का कहना है, “पौध किस्म एवं किसान अधिकार प्राधिकरण द्वारा ‘नागौरी पान मेथी’ का पंजीकरण कर नागौर के किसानों की पीढ़ियों की कड़ी मेहनत को ऐतिहासिक पहचान दी गई है। नागौर के किसान समुदाय को नागौरी मेथी पर बौद्धिक संपदा अधिकार मिल गया है।”

भारत सरकार के जैवप्रौद्योगिकी विभाग के बायोटेक किसान हब और नाबार्ड-पोषित कृषि निर्यात सुविधा केंद्र के सहयोग से नागौरी मेथी को पिछले वर्ष मसाला बोर्ड की अनुसूची-I में शामिल किया गया था, जिससे इसे मसाला श्रेणी में स्थान मिला और निर्यात के रास्ते खुले।

डॉ. चौधरी ने कहा कि “कसूरी मेथी” नाम से लंबे समय से चली आ रही गलत पहचान को अब ठीक कर दिया गया है, जिससे नागौरी मेथी को घरेलू और वैश्विक बाजार में उसकी वास्तविक पहचान मिलेगी।

नागौरी पान मेथी खास क्यों?

नागौरी पान मेथी की खेती राजस्थान में नागौर जिले के लगभग 7,000 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में होती है। यह मुख्य रूप से मूंडवा, नागौर, मेड़ता, जायल, डेगाना और खींवसर क्षेत्रों में उगाई जाती है।

नागौरी पान मेथी एक बहु-कटाई (मल्टी-कटिंग) वाली पत्तेदार फसल है, जिसकी पत्तियों को धूप में सुखाकर बेचा जाता है। प्रत्येक कटाई में प्रति एकड़ लगभग 175 किलोग्राम सूखी पत्तियां प्राप्त होती हैं, जिससे किसानों को हर दस दिन में लगभग रुपये 25,000 की आय होती है।

एक सीजन में औसतन दस कटिंग के आधार पर किसान प्रति एकड़ लगभग रुपये 2.5 लाख की कमाई करते हैं। इस प्रकार नागौरी पान मेथी देश की सबसे अधिक आय देने वाली फसलों में से एक बन गई है।

सालाना 450 करोड़ की आय

वर्ष 2024-25 के सीजन में नागौर जिले के किसानों ने लगभग 30 हजार टन नागौरी पान मेथी की सूखी पत्तियों का उत्पादन किया, जिससे किसानों को लगभग रुपये 450 करोड़ की आय प्राप्त हुई।

नागौरी पान मेथी की कई विशिष्ट विशेषताएं हैं, जो इसे अन्य मेथी किस्मों से अलग पहचान देती हैं। इसकी सबसे बड़ी खासियत इसकी तेज और विशिष्ट खुशबू है, जो पत्तियों को सुखाने के बाद भी लंबे समय तक बनी रहती है। इसके बीज आकार में छोटे होते हैं तथा फलियां हंसिया के आकार की होती हैं।

सूखी पत्तियों में गहरा स्वाद और भरपूर सुगंध पाई जाती है, जो इसे मसालों और खाद्य पदार्थों में अत्यंत लोकप्रिय बनाती है। इसके अतिरिक्त नागौर क्षेत्र की विशिष्ट मिट्टी और अनुकूल जलवायु इस मेथी की गुणवत्ता को और भी विशेष बनाती है। यही कारण है कि नागौरी पान मेथी ने देश ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित की है।

कैसे मिली उपलब्धि?

नागौरी पान मेथी किस्म का पंजीकृत कराने के लिए साउथ एशिया बायोटेक्नोलॉजी सेंटर, जोधपुर ने पिछले 4-5 वर्षों से इस पर फील्ड आधारित अनुसंधान किया और 25 जून 2024 को आवेदन के साथ बीज सामग्री पौध किस्म प्राधिकरण में जमा कराई।

मेथी की पहचान और वैज्ञानिक अध्ययन भारत सरकार के जैवप्रौद्योगिकी विभाग (DBT) की बायोटेक किसान हब परियोजना के तहत किया गया। इसमें ICAR-राष्ट्रीय बीज मसाला अनुसंधान केंद्र, अजमेर और नाबार्ड-पोषित कृषि निर्यात सुविधा केंद्र का भी सहयोग रहा।

नागौरी पान मेथी के पंजीकरण से पहले भी साउथ एशिया बायोटेक्नोलॉजी सेंटर (SABC) ने किसानों की नवाचार क्षमता और उनके अधिकारों के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। यह उपलब्धि इस बात का प्रमाण हैं कि राजस्थान के किसान अब केवल कृषि उत्पादक ही नहीं, बल्कि जैव विविधता के संरक्षक, नवाचारकर्ता और बीज प्रजनक के रूप में भी उभर कर सामने आ रहे हैं।

किसान-केंद्रित मॉडल

नागौरी पान मेथी का सामुदायिक किस्म के रूप में पंजीकरण एक ऐसा उदाहरण है, जिसमें पारंपरिक किसान किस्मों को आधुनिक कानूनी ढांचे के माध्यम से संरक्षित किया जा सकता है। इससे किसानों की उपज का अधिक मूल्य सुनिश्चित होगा और बीजों के व्यापार से होने वाला लाभ किसानों के साथ साझा किया जा सकेगा।

 

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