होर्मुज संकट के बावजूद सरकार का खरीफ 2026 के लिए पर्याप्त उर्वरक भंडार होने का दावा

सरकार ने आश्वस्त किया है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में शिपिंग बाधाओं के बावजूद खरीफ 2026 के लिए देश में उर्वरकों की उपलब्धता पर्याप्त बनी हुई है। हालांकि 390.54 लाख मीट्रिक टन की अनुमानित जरूरत के मुकाबले अभी 200.12 लाख मीट्रिक टन का स्टॉक उपलब्ध है।

होर्मुज संकट के बावजूद सरकार का खरीफ 2026 के लिए पर्याप्त उर्वरक भंडार होने का दावा

खरीफ सीजन में उर्वरकों की उपलब्धता को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय ने दावा किया है कि देश में उर्वरकों की कुल स्टॉक स्थिति फिलहाल संतोषजनक बनी हुई है। मंत्रालय के अनुसार, भारत की उर्वरक सुरक्षा मजबूत, स्थिर और सुव्यवस्थित है तथा सभी प्रमुख उर्वरकों की उपलब्धता लगातार जरूरत से अधिक बनी हुई है।

आगामी खरीफ 2026 सीजन के लिए कृषि एवं किसान कल्याण विभाग ने कुल उर्वरक आवश्यकता 390.54 लाख मीट्रिक टन आंकी है। इसके मुकाबले वर्तमान में लगभग 200.12 लाख मीट्रिक टन का स्टॉक उपलब्ध है, जो कुल आवश्यकता का लगभग 51 प्रतिशत है। हालांकि होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते शिपिंग अब भी काफी सीमित होने के कारण यह चिंता बनी हुई है कि बुवाई के चरम समय और बाद के चरणों में उर्वरकों की उपलब्धता कितनी रहेगी।

उर्वरक विभाग ने कहा कि हालिया संकट की स्थिति के बाद आयात और घरेलू उत्पादन के जरिए लगभग 117.6 लाख टन उर्वरक उपलब्धता बढ़ी है। ईरान संकट शुरू होने के बाद उर्वरकों के घरेलू उत्पादन और आयात का विवरण इस प्रकार है:

यूरिया: घरेलू उत्पादन 57.66 लाख टन, जबकि 13.60 लाख टन आयात भारतीय बंदरगाहों पर पहुंचा।
डीएपी: घरेलू उत्पादन 7.93 लाख टन और 0.88 लाख टन आयात।
एनपीके: घरेलू उत्पादन 18.71 लाख टन और 4.44 लाख टन आयात।
एसएसपी: घरेलू उत्पादन 10.70 लाख टन, कोई आयात नहीं।
एमओपी: घरेलू उत्पादन नहीं हुआ, जबकि 3.68 लाख टन आयात हुआ।
कुल मिलाकर घरेलू उत्पादन 95 लाख टन रहा, जबकि भारतीय बंदरगाहों पर कुल 22.60 लाख टन उर्वरकों का आयात पहुंचा।

विभाग ने कहा कि पीक सीजन के दौरान पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए भारत ने होर्मुज जलडमरूमध्य क्षेत्र से बाहर के देशों से लगभग 13.5 लाख मीट्रिक टन डीएपी और 9 लाख मीट्रिक टन एनपीके (एएस सहित) की व्यवस्था की है। इन खेपों के मई और जून में भारतीय बंदरगाहों पर पहुंचने की संभावना है। इसके अलावा, उद्योग की परिचालन क्षमता बनाए रखने के लिए विभाग कंपनियों द्वारा प्रस्तुत सभी सब्सिडी बिलों का भुगतान साप्ताहिक आधार पर लगातार कर रहा है।

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