शहरों में पलायन से नहीं , बेहतर टेक्नोलॉजी और कनेक्टिविटी से ग्रामीण आबादी का विकास संभव: वर्ल्ड सोशल रिपोर्ट 2021

20 मई को न्यूयार्क में साल 2021 की जारी की गई यएन की विश्व सामाजिक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि दुनिया भर के गावों में रहने वाले 3.4  अरब लोगों का  शहरो में बिना पलायन किए ही इंटरनेट कनेक्टिविटी के माध्यम से उनके जीवन स्तर को सुधार कर  ऊंचा किया जा सकता है      

शहरों में पलायन से नहीं , बेहतर टेक्नोलॉजी और कनेक्टिविटी से  ग्रामीण आबादी का विकास संभव: वर्ल्ड सोशल रिपोर्ट 2021

संयुक्त राष्ट्र संघ (यूएन) का कहना है कि नई तकनीक गांव के लाखों लोगों को गरीबी से बाहर निकालने के लिए और  बेहतर रोजगार के साथ बेहतर जीवन जीने  के लिए अवसर प्रदान कर सकती हैं । 20 मई को न्यूयार्क में साल 2021 की जारी की गई यएन की विश्व सामाजिक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि दुनिया भर के गावों में रहने वाले 3.4  अरब लोगों का  शहरो में बिना पलायन किए ही इंटरनेट कनेक्टिविटी के माध्यम से उनके जीवन स्तर को सुधार कर  ऊंचा किया जा सकता है ।      

संयुक्त राष्ट संघ द्वारा जारी रिपोर्ट में  कहा गया है कि पहले से ही गरीबी और असमानताओं के साथ जीवन जी रही ग्रामीण आबादी की प्रगति में कोरोना महामारी कई अड़चने डाल रही है । लेकिन दूसरी तरफ इस कोरोना महामारी ने प्रगति के लिए एक रास्ता दिखा दिया है कि कैसे नई तकनीक के माध्यम से ग्रामीण आबादी का विकास करके गांव और शहरी आबादी के बीच खिंची असमानता की रेखा  को मिटा सकते हैं।

संयुक्त राष्ट्र संघ के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने कहा कि नई तकनीकों ने ग्रामीण विकास के लिए नए अवसर खोले हैं। जिसमे सभी श्रेणी के लोगों के लिए अपना  भविष्य बनाने का सुनहरा अवसर मौजूद है । उनका कहना है कि इस महामारी के अनुभव से हमें यह सीख मिली है कि अच्छी अच्छी नौकरियां केवल शहर में रहकर ही नहीं की जा सकती है बल्कि  अगर  अच्छी इंटरनेट कनेक्टिविटी के साथ सुविधाजनक व्यवस्था हो तो इस धारणा को बदला जा सकता है और इस प्रकार की नौकरियां  गांव  में भी आसानी पूर्वक की जा सकती हैं ।

उभरती हुई नई डिजिटल टेक्नोलॉजी  शहरी और ग्रामीण  एरिया के बीच मे जो खाई को भरने का काम करेगी ।  डिजिटल टेक्नालॉजी के माध्यम से ग्रामीण आबादी वित्तीय अदान –प्रदान कर सकेगी साथ ही फसल की बेहतर उपज के लिए सही उपकरण का इस्तेमाल भी किया जा सकेगा औऱ  दूर रह कर  भी गांव से ग्रामीण लोग नौकरिया कर सकेंगे । 

भूमि क्षरण और रोगों की उत्पत्ति

                                                                                                                                                                                                                    कम आय वाले देशो में लगभग 67 प्रतिशत जबकि निम्न मध्यम आय वाले देशो में ग्रामीण आबादी  60  प्रतिशत   है।  अंतरराष्ट्रीय गरीबी रेखा के नीचे रहने वाले लोगों में से दुनिया के लगभग 80 प्रतिशत लोग   ग्रामीण क्षेत्रों में ही रहते हैं जिसमे से लगभग  20 प्रतिशत ग्रामीण लोग अत्यधिक गरीबी में जीवन यापन करते हैं । यह आंकड़ा शहरी आबादी की तुलना में चार गुना अधिक है औऱ इस आबादी को उचित शिक्षा, स्वास्थ्य संबंधी और अन्य आवश्यक सेवाएं कम ही पहुंच पाती है।

ग्रामीण महिलाओं, वृद्ध व्यक्तियों के साथ-साथ स्थानीय लोगों को भूमि अधिकारों और रोजगार के मामले में भेदभाव का सामना करना पड़ता है। अधिकांश प्राकृतिक पूंजी  ग्रामीण क्षेत्रों में ही समाहित है, जो अभी के समय में धीरे -धीरे समाप्त हो रही या घट रही है ।  वहीं दूसरी तरफ वनों की कटाई अनियमित तरीके  से बदलते खेती के तरीकों के कारण  जलवायु परिवर्तन और  घातक रोगों का प्रसार हो रहा है । 

इस  रिपोर्ट मे  ऐसे रणनीतियां पेश की गई हैं जिनसे ये सुनिश्चित किया जा सके की दुनिया की लगभग आधी आबादी, जो ग्रामीण है वह पीछे न रहे। दुनिया की अर्थव्यवस्था सही रहे उसके लिए जरूरी है कि असमानताओं को कम करने और जलवायु संकट से निपटने के  प्रयासों को  और बढ़ावा मिले । इस रिपोर्ट की माने तो लोगों का जीवन सुधारना है तो सबसे पहले  ग्रामीण जीवन स्तर में सुधार  लाने की जरूरत है ।

ग्रामीण एरिया में हो शहरी लाभ का विस्तार

ग्रामीण आबादी शहरी आबादी के जैसे जीवन स्तर का  आनंद ले सके वह भी बिना शहरी दुष्प्रभावों  के  ऐसे ही दृष्टिकोण को “इन सीटू शहरीकरण” कहा जाता है । इस रिपोर्ट में बताया  गया है कि  श्रीलंका, जापान और चीन जैसे देशों में ग्रामीण क्षेत्र में बेहतर शिक्षा और बेहतर स्वास्थ्य  सुविधाओं को उपल्बध कराने के साथ ग्रामीण बुनियादी ढांचे में  अधिक निवेश करके  ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच आय असमानता को कम  किया जा सका है और ग्रामीण आबादी को बेहतर जीवन स्तर का सुअवसर प्रदान किया है । 

इस रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन, भारत और इंडोनेशिया में जहां साल 2000 से लेकर साल 2015 के बीच ग्रामीण गरीबी तो कम हुई, वहीं दूसरी तरफ ग्रामीणों के बीच असमानता बढ़ी। इसलिए ग्रामीण क्षेत्रों मे गरीबी को कम करने  के साथ- साथ सामाजिक प्रगति को बढ़ावा देने के लिए, असमानताओं को दूर करने पर ध्यान केन्द्रित करना जरूरी है। इसके लिए नई भूमि सुधार नीतियां, विस्तारित सामाजिक सुरक्षा के साथ-साथ भेदभावपूर्ण कानूनों को निरस्त करना जरूरी है ताकि ग्रामीण महिलाए, स्थानीय लोग और अन्य कमजोर वर्ग की आबादी फैली असमानता से प्रभावी ढंग से निपट सके। इस रिपोर्ट के अनुसार  प्राकृतिक संपदा को कृषि भूमि में बदलने से कुल 60 प्रतिशत से 70  प्रतिशत जैव विविधता का नुकसान हुआ है और ऐसा माना जाता है कि जंगलों  के नुकसान से  ही  कोरोना जैसे जूनोटिक रोग की उत्पति हुई है । इंटरगवर्नमेंटल पैनल ऑन क्लाइमेट चेंज का कहना है कि बदलते कृषि प्रयोग और बदलते भूमि के उपयोग के कारण  वैश्विक ग्रीनहाउस गैस का लगभग  31 प्रतिशत गैस उत्सर्जन होता है। जलवायु परिवर्तन के कारण ग्रामीण आजीविका पर पड़ने   वाले  प्रभाव को  कम करने के लिए नीतियां बनानी  पड़ेगी । इस  रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि फसलों की ऐसी किस्मों को विकसित किया जाय जो कम जमीन में अधिक उपज  दे  सके। इसके अलावा मिश्रित खेती  को बढ़ावा दिया जाए और  चक्रीय अर्थव्यवस्था  की तरफ कदम  बढ़ाया  जाय ।                                                                                                                                                                                                                                एक अनुमान के अनुसार की सन 2030 तक लगभग 30 प्रतिशत तक पानी की कमी हो जाएगी और अगर मौजूदा ग्रामीण विकास की प्रणाली जारी रही तो सन् 2050 तक   दुनिया के लगभग 95 प्रतिशत उपयोगी भूमि  क्षेत्र  बेकार हो जाएंगे । संसाधनों के सही उपयोग के साथ-साथ खाद्य सुरक्षा को बढ़ाना बढ़ावा देने वाली नीतियों  पर विचार करना जरूरी है।

कृषि विविधीकरण ग्रामीण सुधार के लिए बहुत ही अहम कड़ी है।  गैर कृषि गतिविधियों का विस्तार करना बहुत ज़रूरी है क्योंकि  युवाओं  के लिए यह आय का एक संभावित स्रोत्र हो सकता है। इसीलिए गैर कृषि गतिविधियों के विस्तार के लिए बन रही नई रणनीतियों में शामिल करना आवश्यक है।

 कृषि और कृषि  उद्योगों को बढ़ावा                                   

ऐसे देश जहां 50 करोड़ से ज्यादा कृषि श्रमिक रहते हैं ‌ वह देश 2030 तक कृषि उत्पादकता और छोटे किसानों की आय को दुगना करने के सतत विकास लक्ष्यों ( एस. डी.जी) को पाने में ‍मौजूदा समय में असमर्थ दिखाई पड़ते हैं । रिपोर्ट ‌‌‌ मे यह माना गया है कि कृषि उत्पादकता में  बढ़ोतरी  लाने के लिए  अभी और ‌ प्रभावी कदम उठाने पड़ेंगे ‌‌‌‌जैसे बुनियादी ढांचे में सुधार , सही उपकरणों का इस्तेमाल , ‌‍प्रोत्साहन देना , अधिक  निवेश इत्यादि । साथ ही ऐसे कृषि  मॉडलों पर भी ध्यान केंद्रित करना जरूरी है ‌‌ जो देश विशिष्ट हैं और छोटे धारकों को समर्थन देते हैं।