लगातार ऊंची महंगाई के कारण रिजर्व बैंक ने कर्ज किया महंगा, रेपो रेट 0.4 फ़ीसदी बढ़ने से सभी तरह के लोन पर बढ़ेंगी ब्याज दरें

वैसे तो रिजर्व बैंक की मॉनेटरी पॉलिसी कमिटी कि हर 2 महीने बाद बैठक होती है लेकिन इस बार सामान्य शेड्यूल से हटकर उसने जल्दी बैठक की और कर्ज महंगा करने का फैसला किया। गौरतलब है कि खुदरा महंगाई दर लगातार तीन महीने से 6 फ़ीसदी से ऊपर चल रही है जो रिजर्व बैंक की ऊपरी सीमा से अधिक है। थोक महंगाई भी लगातार 12 महीने से दहाई अंकों में है

लगातार ऊंची महंगाई के कारण रिजर्व बैंक ने कर्ज किया महंगा, रेपो रेट 0.4 फ़ीसदी बढ़ने से सभी तरह के लोन पर बढ़ेंगी ब्याज दरें

लगातार ऊंची महंगाई दर को देखते हुए भारतीय रिजर्व बैंक ने कर्ज महंगा कर दिया है। बुधवार को उसने रेपो रेट 0.4 फ़ीसदी पढ़ाकर 4.4 फ़ीसदी कर दिया। आरबीआई जिस ब्याज पर सामान्य बैंकों को कर्ज देता है उसे रेपो रेट कहते हैं। वैसे तो रिजर्व बैंक की मॉनेटरी पॉलिसी कमिटी कि हर 2 महीने बाद बैठक होती है लेकिन इस बार सामान्य शेड्यूल से हटकर उसने जल्दी बैठक की और कर्ज महंगा करने का फैसला किया।

गौरतलब है कि खुदरा महंगाई दर लगातार तीन महीने से 6 फ़ीसदी से ऊपर चल रही है जो रिजर्व बैंक की ऊपरी सीमा से अधिक है। थोक महंगाई भी लगातार 12 महीने से दहाई अंकों में है। आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि अप्रैल में भी खुदरा महंगाई 6 फ़ीसदी से ऊपर ही रहने के आसार हैं। मार्च में यह 6.9 फ़ीसदी पर पहुंच गई थी।

आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास की अध्यक्षता में मौद्रिक नीति समिति की बैठक में सीआरआर (कैश रिजर्व रेशियो भी बढ़ाने का फैसला किया गगया। इसे 4 फ़ीसदी से बढ़ाकर 4.5 फ़ीसदी किया गया है। सीआरआर में बढ़ोतरी 21 मई से लागू होगी। इससे बैंकिंग सिस्टम में 87000 करोड़ रुपए कम हो जाएंगे। आरबीआई ने अगस्त 2018 के बाद पहली बार ब्याज दरों में बढ़ोतरी की है। इससे पहले उसने 22 मई 2020 को रेपो रेट में संशोधन किया था। तब इसे 0.4 फ़ीसदी घटाकर 4 फ़ीसदी किया गया था।

आरबीआई ने कहा है कि दुनिया भर में कमोडिटी के दाम ऊंचे होने के कारण भारत में भी खाद्य महंगाई काफी बढ़ गई है। निकट भविष्य में इसके ऊंचे ही बने रहने के आसार हैं। चीन तथा अन्य कई देशों में कोविड-19 महामारी की नई लहर के कारण सप्लाई चैन बाधित हुई है। उर्वरक और अन्य इनपुट की कीमतें बढ़ने का सीधा असर खाद्य पदार्थों की कीमतों पर होगा। रूस यूक्रेन युद्ध के कारण वैश्विक बाजार में गेहूं की जो किल्लत हुई है उससे घरेलू बाजार पर भी असर हुआ है। हालांकि देश में गेहूं की सप्लाई की कोई समस्या नहीं है।