भारतीय किसान संघ ने कपास आयात पर सरकार को चेताया, शुल्क छूट आगे न बढ़ाने की मांग

भारतीय किसान संघ ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को पत्र लिखकर कपास आयात पर शुल्क छूट की समय सीमा को आगे न बढ़ाने की मांग की

भारतीय किसान संघ ने कपास आयात पर सरकार को चेताया, शुल्क छूट आगे न बढ़ाने की मांग

कपास पर आयात शुल्क छूट की समय-सीमा 30 सितंबर से बढ़ाकर 31 दिसंबर, 2025 करने के केंद्र सरकार के फैसले को लेकर किसान संगठनों ने विरोध जताना शुरू कर दिया है। भारतीय किसान संघ (BKS) ने केंद्र सरकार को आगाह करते हुए इस निर्णय को वापस लेने की मांग की है। 

भारतीय किसान संघ के महामंत्री मोहन मोहन मिश्र ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को लिखे पत्र में कहा है कि नई फसल बाजार में आने से पहले लिया गया यह फैसला किसानों के हितों के प्रतिकूल साबित हो सकता है। भारतीय किसान संघ की मांग है कि सरकार इस निर्णय पर अधिसूचना जारी न करते हुए, इस निर्णय को वापस ले। ऐसा नहीं करेंगे तो कपास क्षेत्र में भारत आत्मनिर्भर से परावलंबन की ओर कदम बढ़ाएगा। 

पत्र के अनुसार, सरकार की आयात नीति के कारण बाहर से यदि 51 हजार रुपये प्रति गांठ के रेट पर कपास का आयात किया जाता है तो हमारे यहां 61 हजार रुपये प्रति गांठ का कपास कौन खरीदेगा? यदि सरकार कपास आयात के इस निर्णय को वापस नहीं लेती है तो भारत कपास के क्षेत्र में आत्मनिर्भर की बजाय आयात पर निर्भर बन जाएगा। आयात शुल्क हटाने के निर्णय के पश्चात बाजार में कपास के भाव 1100 रुपये प्रति गांठ गिर चुका है। यदि शून्य आयात शुल्क के साथ कपास आयात को 31 दिसंबर तक बढ़ाया गया तो यह मूल्य और गिरने की संभावना है। 

भारत सरकार ने कपास उत्पादन की कमी को देखते हुए वस्त्र उद्योग की सहायता के लिए 19 अगस्त से 30 सितंबर 2025 तक कपास पर आयात शुल्क में छूट दी थी। अब सरकार ने इस छूट की अवधि को 31 दिसंबर 2025 तक बढ़ाने का निर्णय लिया है। 28 अगस्त को वित्त मंत्रालय की ओर से कपास आयात शुल्क छूट की समय सीमा बढ़ाने की विज्ञप्ति जारी हुई है। पहले देश में कपास आयात पर 11 प्रतिशत का आयात शुल्क लगाया जाता था, जिसे समाप्त कर सरकार ने घरेलू वस्त्र उद्योग के लिए कपास की उपलब्धता बढ़ाने का निर्णय लिया। 

हाल के वर्षों में कपास की खेती संकट में आ गई है। देश में कपास की खेती का क्षेत्र और उत्पादन घटता जा रहा है। कृषि मंत्रालय के अनुमान के मुताबिक, इस साल कपास की खेती के क्षेत्र में करीब 2.62 फीसदी की गिरावट आई है।

 

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