भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता के बीच फीड निर्माताओं का अमेरिका दौरा, अंतरिम समझौते में है फीड पर आयात शुल्क घटाने का प्रस्ताव

भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता के बीच CLFMA का अमेरिकी दौरा चर्चा में है। अंतरिम समझौते में DDGs और रेड सोरघम जैसे अमेरिकी पशु आहार उत्पादों पर आयात शुल्क घटाने का प्रस्ताव है। ऐसे में इस दौरे को संभावित आयात, आपूर्ति श्रृंखला सहयोग और भारतीय फीड उद्योग की भविष्य की तैयारी से जोड़कर देखा जा रहा है।

भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता के बीच फीड निर्माताओं का अमेरिका दौरा, अंतरिम समझौते में है फीड पर आयात शुल्क घटाने का प्रस्ताव

कंपाउंड लाइवस्टॉक फीड मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (CLFMA) के एक प्रतिनिधिमंडल ने हाल ही अमेरिका का दौरा किया। वैसे तो आधिकारिक तौर पर इसे "लर्निंग टूर" बताया गया है, लेकिन भारत-अमेरिका के बीच जारी व्यापार वार्ता के संदर्भ में यह नई चर्चा का विषय बन गया है। यह दौरा भविष्य में अमेरिका से पशु आहार (Animal Feed) और उससे जुड़े कच्चे माल के आयात को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।

CLFMA चेयरमैन दिव्य कुमार गुलाटी के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने न्यू ऑरलियन्स और आयोवा में पशु और फीड वैल्यू चेन से जुड़े प्रमुख संस्थानों एवं उद्योगों का दौरा किया। इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने कारगिल रिजर्व एक्सपोर्ट टर्मिनल, आयोवा सोयाबीन एसोसिएशन, इंस्टा-प्रो इंटरनेशनल, कारगिल क्रश प्लांट तथा आयोवा स्टेट यूनिवर्सिटी का दौरा किया, जहां उन्हें फीड मैन्युफैक्चरिंग, बायोसिक्योरिटी, गुणवत्ता प्रबंधन, सोयाबीन व अन्य तिलहन प्रसंस्करण और आधुनिक पशु पोषण तकनीकों का प्रशिक्षण दिया गया।

एसोसिएशन के अनुसार इस यात्रा का उद्देश्य वैश्विक स्तर पर अपनाई जा रही सर्वोत्तम प्रथाओं को समझना, व्यापार, लॉजिस्टिक्स, परिवहन, गुणवत्ता परीक्षण, फीड मैन्युफैक्चरिंग और टिकाऊ कृषि पद्धतियों के बारे में जानकारी प्राप्त करना था। प्रतिनिधिमंडल ने आयोवा के कृषि मंत्री माइक नेग सहित कई उद्योग प्रतिनिधियों से भी मुलाकात की।

इस दौरे का समय विशेष महत्व रखता है क्योंकि यह भारत और अमेरिका के बीच जारी द्विपक्षीय व्यापार वार्ता के दौरान हुआ है। दोनों देशों के बीच पिछली बातचीत तब हुई जब 22-24 जून को अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि जेमीसन ग्रीर भारत दौरे पर आए थे।

इस साल 6 फरवरी 2026 को अंतरिम समझौते के बाद व्हाइट हाउस की तरफ से जारी साझा बयान में पहला बिंदु यही है कि “भारत, अमेरिका के सभी औद्योगिक उत्पादों और अनेक खाद्य एवं कृषि उत्पादों पर शुल्क समाप्त करेगा या कम करेगा।” जिन उत्पादों का विशेष रूप से उल्लेख किया गया, उनमें ड्राइड डिस्टिलर्स ग्रेन्स (DDGs), पशु आहार के लिए रेड सोरघम (ज्वार), सोयाबीन तेल, ट्री नट्स, ताजे एवं प्रसंस्कृत फल, वाइन एवं स्पिरिट्स सहित अन्य कृषि उत्पाद शामिल हैं।

इनमें डीडीजीएस और रेड सोरघम अमेरिका में पशु एवं पोल्ट्री आहार के प्रमुख घटक हैं। यदि भारत इन उत्पादों पर आयात शुल्क में कमी करता है, तो इससे भारतीय फीड उद्योग को कच्चे माल के नए स्रोत तो मिलेंगे, लेकिन साथ ही घरेलू मक्का, ज्वार तथा अन्य फीड अनाज का उत्पादन करने वाले किसानों के लिए प्रतिस्पर्धा बढ़ जाएगी। गौर करने वाली बात यह है कि CLFMA प्रतिनिधिमंडल का पूरा कार्यक्रम उन्हीं क्षेत्रों पर केंद्रित था, जो अमेरिकी पशु आहार निर्यात श्रृंखला की रीढ़ माने जाते हैं। 

वैसे तो इस प्रकार के विदेशी अध्ययन दौरे सामान्यतः तकनीकी ज्ञान और उद्योग के बीच सहयोग बढ़ाने के उद्देश्य से आयोजित किए जाते हैं, लेकिन वर्तमान परिदृश्य में यह भारतीय उद्योग को उन अमेरिकी आपूर्ति श्रृंखलाओं से परिचित कराने का भी माध्यम बन सकता है, जिनका महत्व शुल्क कटौती लागू होने के बाद काफी बढ़ सकता है।

भारत का पशुधन क्षेत्र दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते फीड उपभोक्ताओं में शामिल है। पोल्ट्री, डेयरी और एक्वाकल्चर क्षेत्रों के विस्तार के साथ प्रोटीन युक्त पशु आहार की मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में प्रतिस्पर्धी कीमतों पर आयातित फीड सामग्री उपलब्ध होने से उद्योग को लाभ मिल सकता है। लेकिन घरेलू किसान संगठनों और उद्योग से जुड़े समूह यह चिंता जताते रहे हैं कि बड़े पैमाने पर आयात से देश के स्थानीय उत्पादकों और फीड अनाज की खेती करने वाले किसानों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

हालांकि CLFMA ने स्पष्ट किया है कि इस दौरे का उद्देश्य केवल ज्ञान साझा करना और उद्योग के बीच सहयोग को बढ़ावा देना था। चेयरमैन दिव्य कुमार गुलाटी ने कहा कि इस यात्रा से प्रतिनिधिमंडल को व्यापार, लॉजिस्टिक्स, परिवहन, क्वालिटी, फीड मैन्युफैक्चरिंग, सोया एवं ऑयलसीड प्रसंस्करण तथा टिकाऊ कृषि पद्धतियों की बेहतर समझ विकसित करने का अवसर मिला।

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