ऊर्जा लागत और होर्मुज संकट से वैश्विक खाद्य बाजार प्रभावित, लगातार तीसरे महीने बढ़ी कीमतें: एफएओ

FAO के अनुसार अप्रैल में वैश्विक खाद्य वस्तुओं की कीमतें लगातार तीसरे महीने बढ़ीं। ऊर्जा लागत में वृद्धि और होर्मुज जलडमरूमध्य संकट से आपूर्ति बाधित होने के कारण यह बढ़ोतरी हुई। वनस्पति तेल और मांस की कीमतों में तेज उछाल आया, जबकि चीनी और डेयरी कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। अनाज की कीमतों में भी बढ़ोतरी हुई।

ऊर्जा लागत और होर्मुज संकट से वैश्विक खाद्य बाजार प्रभावित, लगातार तीसरे महीने बढ़ी कीमतें: एफएओ

संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) के नवीनतम फूड प्राइस इंडेक्स के अनुसार, वैश्विक खाद्य वस्तुओं की कीमतों में अप्रैल में लगातार तीसरे महीने बढ़ोतरी दर्ज की गई। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव के कारण सप्लाई में बाधा और ऊंची ऊर्जा लागतों के कारण ज्यादातर खाद्य श्रेणियों की कीमतों में वृद्धि हुई। FAO फूड प्राइस इंडेक्स अप्रैल में औसतन 130.7 अंक पर पहुंच गया। यह संशोधित मार्च स्तर की तुलना में 1.6 प्रतिशत अधिक था और पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 2 प्रतिशत ऊंचा रहा।

एफएओ के अनुसार, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और होर्मुज जलडमरूमध्य के प्रभावी रूप से बंद होने से उत्पन्न व्यवधानों के कारण परिवहन और उर्वरक लागत में वृद्धि हुई है। इसका असर दुनिया भर के कृषि बाजारों पर पड़ा है। इसका दबाव विशेष रूप से अनाज, वनस्पति तेल और चावल बाजारों में दिखाई दिया।

एफएओ अनाज मूल्य सूचकांक मार्च की तुलना में 0.8 प्रतिशत बढ़ा और सालाना आधार पर 0.4 प्रतिशत ऊंचा रहा। अमेरिका के कुछ हिस्सों में सूखे की आशंका और ऑस्ट्रेलिया में सामान्य से कम वर्षा की आशंका के कारण गेहूं की कीमतों में 0.8 प्रतिशत की वृद्धि हुई। एफएओ ने यह भी चिंता जताई कि बढ़ती उर्वरक कीमतों के चलते किसान कम उर्वरक-आधारित फसलों की ओर रुख कर रहे हैं, जिससे 2026 में गेहूं की बुवाई घट सकती है।

FAO के मुख्य अर्थशास्त्री मैक्सिमो टोरेरो (Máximo Torero) ने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट संकट से जुड़े व्यवधानों के बावजूद वैश्विक कृषि-खाद्य प्रणालियों ने अब तक मजबूती दिखाई है। उन्होंने कहा कि अपेक्षाकृत मजबूत भंडार और पिछले सीजनों से उपलब्ध पर्याप्त स्टॉक के कारण अनाज की कीमतों में अब तक केवल सीमित बढ़ोतरी हुई है। हालांकि, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों से बायोफ्यूल की मांग बढ़ने के कारण वनस्पति तेल बाजारों में अधिक तेज वृद्धि देखी जा रही है।

वैश्विक स्तर पर मक्का की कीमतों में 0.7 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जिसका कारण मौसमी आपूर्ति में कमी तथा ब्राजील और अमेरिका के कुछ हिस्सों में मौसम संबंधी चिंताएं रहीं। कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के कारण मजबूत एथेनॉल मांग ने भी मक्का बाजार को मजबूती दी। इसके विपरीत, कमजोर आयात मांग और प्रमुख निर्यातक देशों में बेहतर आपूर्ति संभावनाओं के कारण ज्वार की कीमतों में 4 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।

अप्रैल के दौरान चावल की कीमतों में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई। एफएओ ऑल राइस प्राइस इंडेक्स में 1.9 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जिसका मुख्य कारण इंडिका और सुगंधित चावल की किस्मों के दामों में तेजी रहा। एफएओ ने इस बढ़ोतरी के लिए निर्यातक देशों में उत्पादन और विपणन लागत बढ़ने को जिम्मेदार ठहराया।

सबसे तेज वृद्धि वनस्पति तेलों में देखी गई। एफएओ वेजिटेबल ऑयल प्राइस इंडेक्स मार्च की तुलना में 5.9 प्रतिशत बढ़कर जुलाई 2022 के बाद के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया। इस दौरान पाम, सोयाबीन, सूरजमुखी और रेपसीड तेलों की कीमतों में मजबूती दर्ज की गई। पाम तेल की कीमतों में लगातार पांचवें महीने बढ़ोतरी हुई, जिसे मजबूत बायोफ्यूल मांग, उत्पादक देशों में नीतिगत प्रोत्साहनों और दक्षिण-पूर्व एशिया में संभावित कम उत्पादन संबंधी चिंताओं से समर्थन मिला।

डेयरी और चीनी की कीमतों में गिरावट देखी गई। यूरोपीय संघ में दूध की प्रचुर आपूर्ति और ओशिनिया में अपेक्षा से बेहतर उत्पादन के कारण एफएओ डेयरी मूल्य सूचकांक में 1.1 प्रतिशत की कमी आई। चीनी की कीमतों में मार्च की तुलना में 4.7 प्रतिशत की तेज गिरावट दर्ज की गई और यह पिछले वर्ष की तुलना में 21.2 प्रतिशत नीचे रही। इसका कारण वैश्विक स्तर पर पर्याप्त आपूर्ति की उम्मीद, चीन और थाईलैंड में बेहतर उत्पादन संभावनाएं तथा दुनिया के सबसे बड़े चीनी उत्पादक ब्राजील में नए चीनी पेराई सत्र की शुरुआत रही।

अनाज की पर्याप्त आपूर्ति, लेकिन अनिश्चितताएं बरकरार 

एफएओ ने प्रमुख अनाजों के 2025 उत्पादन अनुमान को भी बढ़ाया है। वैश्विक अनाज उत्पादन का अनुमान अब 304 करोड़ टन लगाया गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 6.0 प्रतिशत अधिक है। वर्ष 2026 की फसलों के लिए एफएओ ने इस महीने विश्व गेहूं उत्पादन के अपने नवीनतम अनुमान को थोड़ा घटाकर 81.7 करोड़ टन कर दिया है। यह पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 2 प्रतिशत कम है, हालांकि उत्पादन अब भी पिछले पांच वर्षों के औसत से ऊपर रहने की संभावना है। एफएओ के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य के प्रभावी रूप से बंद होने से ऊर्जा और उर्वरकों जैसे कृषि इनपुट की लागत बढ़ गई है, जबकि गेहूं की कीमतें अपेक्षाकृत नरम बनी हुई हैं। ऐसे में उत्पादन परिदृश्य अनिश्चितताओं से घिरा हुआ है।

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