आईसीएआर-आईवीआरआई ने उन्नत प्रजनन तकनीक से साहीवाल बछिया उत्पादन में हासिल की बड़ी सफलता
आईसीएआर-आईवीआरआई ने पहली बार OPU-IVF-ET तकनीक से साहीवाल बछिया का उत्पादन किया है। यह उपलब्धि स्वदेशी नस्लों के तेज आनुवंशिक सुधार, उत्पादकता वृद्धि और जर्मप्लाज्म संरक्षण में मदद करेगी। यह भारत में पशुधन अनुसंधान और सहायक प्रजनन तकनीक के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।
देश के पशुधन क्षेत्र में एक बड़ी वैज्ञानिक उपलब्धि हासिल करते हुए भारतीय पशु अनुसंधान संस्थान (आईसीएआर-आईवीआरआई) ने उन्नत सहायक प्रजनन तकनीक (ART) का उपयोग कर स्वदेशी साहीवाल नस्ल की बछियों का उत्पादन किया है। संस्थान को अल्ट्रासाउंड-निर्देशित ओवम पिक-अप, इन विट्रो फर्टिलाइजेशन और एम्ब्रियो ट्रांसफर (OPU-IVF-ET) तकनीक के माध्यम से यह पहली सफलता है। इससे स्वदेशी नस्लों के तेज आनुवंशिक सुधार का मार्ग प्रशस्त हो सकता है।
यह उपलब्धि वर्ष 2022-23 में शुरू किए गए उस विशेष कार्यक्रम का परिणाम है, जिसका उद्देश्य देश की प्रमुख दुग्ध नस्लों- साहीवाल, थारपारकर और मुर्रा भैंस की आनुवंशिक क्षमता को मजबूत करना था। वैज्ञानिकों ने खेत और फार्म दोनों परिस्थितियों में OPU-IVF-ET तकनीक को मानकीकृत करने पर काम किया।
वैज्ञानिकों के सतत प्रयासों का परिणाम 28 फरवरी 2026 से शुरू हुए मात्र पांच दिनों में देखने को मिला, जब OPU-IVF-ET तकनीक से पांच स्वस्थ साहीवाल बछियों का जन्म हुआ। ये बछड़े उच्च गुणवत्ता वाले जर्मप्लाज्म से तैयार किए गए। इसके लिए 12 लीटर प्रतिदिन से अधिक दूध देने वाली उच्च उत्पादक साहीवाल गाय से ओसाइट लिए गए, जबकि निषेचन के लिए ऐसे सांड के वीर्य का उपयोग किया गया जिसकी मातृ वंशावली का दुग्ध उत्पादन लगभग 3,320 किलोग्राम रहा है।

अनुसंधान के दौरान वैज्ञानिकों ने बिना हार्मोनल स्टिमुलेशन के भी सफलतापूर्वक ओसाइट प्राप्त किए। औसतन थारपारकर में 14.5, साहीवाल में 13.14 और मुर्रा भैंस में 4.5-5.5 ओसाइट प्राप्त हुए। वहीं भ्रूण विकास की सफलता दर भी उल्लेखनीय रही, जिसमें मवेशियों में 47 प्रतिशत से अधिक और भैंसों में 42 प्रतिशत से अधिक ब्लास्टोसिस्ट उत्पादन दर दर्ज की गई, जो वैश्विक स्तर की प्रयोगशालाओं के बराबर है।
इस उपलब्धि की सराहना करते हुए डॉ. राघवेंद्र भट्ट, उप महानिदेशक (पशु विज्ञान), आईसीएआर एवं निदेशक, आईसीएआर-आईवीआरआई ने कहा कि यह सफलता सहायक प्रजनन तकनीक के क्षेत्र में नए आयाम स्थापित करेगी और भविष्य में और भी महत्वपूर्ण उपलब्धियों का मार्ग प्रशस्त करेगी। यह शोध कार्य डॉ. बृजेश कुमार के नेतृत्व में वैज्ञानिकों की टीम द्वारा किया गया, जिसे डॉ. एस.के. सिंह का मार्गदर्शन प्राप्त था।
संस्थान के अनुसार, यह उपलब्धि भविष्य में बड़े पैमाने पर लागू की जा सकने वाली तकनीक का मॉडल है। आईसीएआर-आईवीआरआई अब इस तकनीक के विस्तार के माध्यम से उत्कृष्ट स्वदेशी पशुधन के उत्पादन को तेज़ करने की दिशा में कार्य करेगा, जिससे आनुवंशिक सुधार कार्यक्रमों को मजबूती मिलेगी और देशी जर्मप्लाज्म का संरक्षण होगा।
संस्थान क्षमता निर्माण पर भी विशेष ध्यान दे रहा है। OPU-IVF-ET तकनीक पर प्रशिक्षण कार्यक्रमों के जरिए कुशल मानव संसाधन तैयार किए जा रहे हैं, जिससे पशुधन क्षेत्र में उद्यमिता और स्टार्टअप को बढ़ावा मिल सके।

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