मदर डेयरी की पहल: मिट्टी में प्राकृतिक रूप से नष्ट होने वाली थैली में बिकेगा गाय का दूध

मदर डेयरी ने नया दूध पाउच लॉन्च किया है जो मिट्टी में प्राकृतिक रूप से विघटित होकर प्राकृतिक तत्वों में बदल जाएगा। कंपनी 5 जून से दिल्ली-एनसीआर में गाय के दूध के लिए इस नई पैकेजिंग का उपयोग शुरू करेगी।

मदर डेयरी की पहल: मिट्टी में प्राकृतिक रूप से नष्ट होने वाली थैली में बिकेगा गाय का दूध
एनडीडीबी और मदर डेयरी के अध्यक्ष डॉ. मीनेश शाह (दाएं) और मदर डेयरी के प्रबंध निदेशक जयतीर्थ चारी

देश की प्रमुख दुग्ध कंपनी मदर डेयरी फ्रूट एंड वेजटेबल प्राइवेट लिमिटेड ने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में पहल करते हुए मंगलवार को मिट्टी में प्राकृतिक रूप से नष्ट होने वाली (नेचुरली डिग्रेडेबल) दूध की नई पैकेजिंग लॉन्च की। कंपनी का दावा है कि यह भारत का पहला ऐसा दूध पाउच है, जो कुछ वर्षों में प्राकृतिक रूप से मिट्टी में मिल जाता है।

राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी मदर डेयरी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस नई पैकेजिंग का अनावरण किया। एनडीडीबी और मदर डेयरी के अध्यक्ष डॉ. मीनेश शाह ने बताया कि मदर डेयरी का यह कदम सतत विकास के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। शुरुआत में यह नई पैकेजिंग दिल्ली-एनसीआर में बिकने वाले गाय के दूध के लिए 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस से लागू की जाएगी।

कंपनी के अनुसार, इस नए दूध पाउच में पहली बार ऐसी उन्नत तकनीक का उपयोग किया गया है, जिससे पैकेजिंग सामग्री पहले बायोएवलेबल वैक्स में परिवर्तित हो जाती है। इसके बाद मिट्टी में मौजूद सूक्ष्मजीव (माइक्रोब्स) इसे प्राकृतिक तत्वों में बदल देते हैं। कंपनी का दावा है कि यह पैकेजिंग सदियों तक पर्यावरण में बने रहने वाले पारंपरिक प्लास्टिक की तुलना में कुछ ही वर्षों के भीतर मिट्टी में विघटित हो जाती है।

मदर डेयरी के प्रबंध निदेशक जयतीर्थ चारी ने बताया कि नई पैकेजिंग मिट्टी में कुछ ही वर्षों के भीतर प्राकृतिक रूप से नष्ट होने के लिए तैयार की गई है, जबकि पारंपरिक प्लास्टिक को खत्म होने में सदियां लग सकती हैं। महत्वपूर्ण बात यह है कि इस बदलाव का उपभोक्ताओं के लिए दूध की कीमतों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। इस नई पैकेजिंग को मदर डेयरी की एक सहायक कंपनी में चार वर्ष से अधिक शोध के बाद विकसित किया गया है।

चारी ने बताया कि नए पाउच रिसाइक्लेबल बन रहेंगे, लेकिन उनकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि वे अंततः प्राकृतिक तत्वों में परिवर्तित हो जाती हैं, जिससे खुले वातावरण में फैलने वाले प्लास्टिक कचरे की समस्या को कम करने में मदद मिलेगी। साथ ही दूध की गुणवत्ता, स्वाद और शेल्फ लाइफ पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।

मदर डेयरी भारत की अग्रणी डेयरी कंपनियों में शामिल है और विभिन्न राज्यों में प्रतिदिन लगभग 55 लाख लीटर दूध की बिक्री करती है। दूध उत्पादों के अलावा कंपनी धारा’ ब्रांड के तहत खाद्य तेल तथा सफल’ ब्रांड के तहत ताजे फल-सब्जियां, फ्रोजन उत्पाद, स्नैक्स, पल्प और कंसंट्रेट जैसे उत्पाद भी बाजार में उपलब्ध कराती है।

मदर डेयरी की यह पहल डेयरी उद्योग में प्लास्टिक कचरे को नियंत्रित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है। भारत में प्रतिदिन बड़ी संख्या में उपयोग होने वाली दूध की थैलियों के कारण उत्पन्न कचरे की समस्या को देखते हुए पर्यावरण अनुकूल पैकेजिंग नवाचारों पर जोर दिया जा रहा है।

 

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