कम बारिश के चलते खरीफ फसलों के बुआई रकबे में 17 फीसदी की कमी

देश में कई राज्यों में सामान्य वर्षा से काफी कम बारिश होने के काऱण खरीफ फसलों बुवाई का रकबा 17 फीसदी कम रहा है। कृषि मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक अभी तक 127.94 लाख हेक्टेयर खरीफ फसलों की बुआई की गई है जबकि पिछले साल इसी समय तक 153.81 में खरीफ फसलों की बुआई की गई थी

कम बारिश के चलते खरीफ फसलों के बुआई रकबे में 17 फीसदी की कमी

देश में कई राज्यों में सामान्य वर्षा से काफी कम बारिश होने के काऱण   खरीफ फसलों बुवाई का रकबा 17 फीसदी कम रहा है। कृषि मंत्रालय  द्वारा  जारी  आंकड़ों के मुताबिक अभी तक  127.94 लाख हेक्टेयर खरीफ फसलों की बुआई की गई है जबकि पिछले साल इसी समय तक  153.81 में खरीफ फसलों की बुआई की गई थी 

देश के कुछ हिस्सों में मानसूनी बारिश में देरी के चलते मौजूदा खरीफ सीजन में कुछ फसलों की बुआई कम हुई है। इस साल 1 जुलाई से 6 जुलाई के बीच कुल बारिश 'सामान्य के करीब' रही। लेकिन जून के दूसरे सप्ताह और  चौथे सप्ताह  में उत्तर प्रदेश. बिहार ,मध्य प्रदेश पंजाब और हरियाणा सहित कई राज्यों में सामान्य वर्षा से काफी कम बारिश होने के काऱण  खरीफ फसलों बुवाई का रकबा 17 फीसदी कम रहा है  कृषि मंत्रालय  द्वारा  जारी  किया गया सप्ताहिक अपडेट में  पिछले सप्ताह (2 जूलाई से लेकर 8 जूलाई तक) 127.94 लाख हेक्टेयर खरीफ फसलों की खेती की गई है जबकि पिछले साल इसी दौरान 153.81 में खरीफ फसलों की बुआई की गई थी। अभी तक धान की बुवाई का रकबा 24 फीसदी घटकर 72.24 लाख हेक्टेयर रह गया है। इस प्रकार तिलहन का रकबा 20 प्रतिशत घटकर 77.80 लाख हेक्टेयर रह गया है जबकि पिछले 2021-22 (जून- जुलाई) की इसी अवधि में 95 लाख हेक्टेयर में धान और 97.56 लाख हेक्टेयर में तिलहन बोया गया था।

भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी ) ने इस साल सामान्य मॉनसून का अनुमान लगाया है और इस सात एक जून से छह जुलाई के बीच कुल वर्षा सामान्य के करीब थी. हालांकि इस दौरान मध्य भारत में वर्षा में 10 प्रतिशत और देश के उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र में दो प्रतिशत कम थी। मौसम विभाग के ताजा अनुमानों के मुताबिक छह जुलाई को  सप्ताह के दौरान पूर्व और उत्तर-पूर्वी भारत के प्रमुख धान उगाने वाले क्षेत्र में 36 फीसदी  बारिश  कम  बारिश हुई है।

कृषि मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के अनुसार चालू खरीफ सत्र में आठ जुलाई तक वाणिज्यिक फसलों गन्ना, कपास और जूट का रकबा करीब एक प्रतिशत कम है जबकि दालों का रकबा एक प्रतिशत बढ़कर 46.55 लाख हेक्टेयर हो गया जबकि इसी अवधि के दौऱान पिछले साल यह रकबा 46.10 लाख हेक्टेयर था।

तिलहनों में, सोयाबीन का रकबा 21.74 प्रतिशत घटकर 54.43 लाख हेक्टेयर रह गया, जबकि मूंगफली का रकबा 19 प्रतिशत घटकर 20.51 हेक्टेयर रह गया।  चालू खरीफ सीजन में मोटे अनाज का रकबा मामूली बढ़कर 65.31 लाख हेक्टेयर हो गया है।जून के दूसरे और चौथे सप्ताह में पर्याप्त बारिश नहीं हुई इसी वजह से रकबे में कमी आई है।कई राज्यों में अभी भी बारिश ने रफ्तार नहीं पकड़ी है बिहार और उत्तर प्रदेश के बड़े हिस्से में किसान अभी भी धान रोपाई शुरू करने के लिए पर्याप्त बारिश का इंतजार कर रहे हैं। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि शेष तीन सप्ताह में समान्य बारिश होने की संभावना है इसलिए खरीफ फसलों की बुवाई में तेजी आएगी।