प्रधानमंत्री मोदी ने पोस्ट-बजट वेबिनार में निर्यातोन्मुख कृषि और तकनीक अपनाने पर जोर दिया
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कृषि और ग्रामीण परिवर्तन पर पोस्ट-बजट वेबिनार को संबोधित करते हुए निर्यातोन्मुख कृषि, फसल विविधीकरण और तकनीक के व्यापक उपयोग पर जोर दिया। उन्होंने किसान कल्याण योजनाओं, मत्स्य और पशुपालन क्षेत्रों की उपलब्धियों को रेखांकित करते हुए ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए नवाचार और निवेश का आह्वान किया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को “कृषि और ग्रामीण परिवर्तन” विषय पर आयोजित तीसरे पोस्ट-बजट वेबिनार को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि कृषि भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और इसे तकनीक, निर्यात तथा फसल विविधीकरण के माध्यम से और मजबूत बनाने की आवश्यकता है। प्रधानमंत्री ने कहा कि कृषि देश के दीर्घकालिक विकास की एक रणनीतिक आधारशिला है और यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि केंद्रीय बजट के प्रावधानों का लाभ तेजी से जमीनी स्तर तक पहुंचे।
कृषि क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए सरकार के प्रयासों का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने किसानों की आय बढ़ाने और जोखिम कम करने के उद्देश्य से लागू की गई कई प्रमुख योजनाओं का जिक्र किया। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 10 करोड़ से अधिक किसानों को पीएम किसान सम्मान निधि के तहत 4 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि दी जा चुकी है। इसके अलावा पीएम फसल बीमा योजना के तहत लगभग 2 लाख करोड़ रुपये के बीमा दावों का भुगतान किया गया है, जबकि किसानों के लिए संस्थागत ऋण कवरेज 75 प्रतिशत से अधिक हो चुका है।
प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि भारत में खाद्यान्न और दलहन का रिकॉर्ड उत्पादन हुआ है, लेकिन 21वीं सदी के दूसरे क्वार्टर में प्रवेश करते समय कृषि क्षेत्र में नई ऊर्जा का संचार करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि वैश्विक मांग में बदलाव को देखते हुए भारतीय कृषि को निर्यातोन्मुख बनाना जरूरी है ताकि किसानों की आय बढ़ सके।
इस दिशा में सरकार ने क्षेत्र विशेष के अनुसार नारियल, कोको, काजू और चंदन जैसी उच्च मूल्य वाली फसलों को बढ़ावा देने का प्रस्ताव रखा है। बजट में पूर्वोत्तर राज्यों में अगरवुड और हिमालयी राज्यों में टेम्परेट नट फसलों को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया गया है। उन्होंने कहा, केरल और तमिलनाडु जैसे राज्यों में नारियल के पेड़ इतने पुराने हो चुके हैं कि उनमें वह क्षमता नहीं रही है। इसलिए इस बार बजट में नारियल पर विशेष बल दिया गया है, जिसका फायदा आने वाले दिनों में हमारे इन किसानों को मिलेगा। इन पहलों से मूल्य संवर्धन, ग्रामीण रोजगार और वैश्विक कृषि बाजारों में भारत की स्थिति मजबूत होने की उम्मीद है।
प्रधानमंत्री ने मत्स्य क्षेत्र की संभावनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मछली उत्पादक देश है। वर्तमान में जलाशयों और तालाबों से लगभग 4 लाख टन मछली का उत्पादन हो रहा है, जबकि इसमें 20 लाख टन अतिरिक्त उत्पादन की संभावना है, जो निर्यात और ग्रामीण आजीविका के लिए बड़ा अवसर बन सकता है। उन्होंने ब्लू इकोनॉमी की संभावनाओं को साकार करने के लिए हैचरी, फीड और लॉजिस्टिक्स में नए कारोबारी मॉडल विकसित करने की आवश्यकता बताई।
पशुपालन क्षेत्र का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत आज दुनिया का सबसे बड़ा दूध उत्पादक देश है और अंडा उत्पादन में दूसरे स्थान पर है। इस क्षेत्र को आगे बढ़ाने के लिए बेहतर नस्ल, रोग नियंत्रण और वैज्ञानिक प्रबंधन पर ध्यान दिया जा रहा है। पशुओं को खुरपका-मुंहपका रोग से बचाने के लिए बड़े पैमाने पर टीकाकरण अभियान चलाया गया है। सवा सौ करोड़ से अधिक डोज पशुओं को लगाई जा चुकी है।
प्रधानमंत्री ने एकल फसल पर निर्भरता कम करने के लिए फसल विविधीकरण पर भी जोर दिया। साथ ही उन्होंने कृषि में डिजिटल तकनीक के विस्तार और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास को महत्वपूर्ण बताया। ई-नाम, किसान आईडी और डिजिटल भूमि सर्वेक्षण जैसी पहलों को कृषि क्षेत्र के आधुनिकीकरण के लिए महत्वपूर्ण कदम बताया।
उन्होंने ग्रामीण विकास से जुड़ी योजनाओं जैसे पीएम आवास योजना और पीएम ग्राम सड़क योजना का भी उल्लेख किया तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में स्वयं सहायता समूहों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा, अभी तक गांव की 3 करोड़ महिलाओं को लखपति दीदी बनाने में हम सफल हो चुके हैं। अब 2029 तक और 3 करोड़ और लखपति दीदियां बनाने का लक्ष्य तय किया गया है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में महिला उद्यमिता को बढ़ावा मिलेगा।
प्रधानमंत्री ने विशेषज्ञों, उद्यमियों और राज्य सरकारों से कृषि आपूर्ति श्रृंखला, एग्री-फिनटेक और भंडारण ढांचे को मजबूत बनाने के लिए मिलकर काम करने का आह्वान किया ताकि ग्रामीण परिवर्तन की प्रक्रिया को तेज किया जा सके।

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