महाराष्ट्र: किसानों को सशक्त बनाने के लिए अलग बीज कानून लाने की तैयारी, गुणवत्ता और जवाबदेही पर जोर

महाराष्ट्र सरकार अलग बीज कानून लाने की तैयारी कर रही है। इसके तहत किसानों को बीजों को सुरक्षित रखने, उपयोग करने, आपस में आदान-प्रदान करने और बेचने का अधिकार मिलेगा। नए कानून में बीज क्षेत्र से जुड़े सभी पक्षों के लिए पंजीकरण अनिवार्य किया जाएगा, साथ ही गुणवत्ता मानकों को सुनिश्चित किया जाएगा। यदि बीज खराब पाए जाते हैं, तो किसानों को त्वरित मुआवजा देने का प्रावधान भी होगा।

महाराष्ट्र: किसानों को सशक्त बनाने के लिए अलग बीज कानून लाने की तैयारी, गुणवत्ता और जवाबदेही पर जोर

महाराष्ट्र सरकार किसानों को उनके बीजों पर कानूनी अधिकार देने और बीज क्षेत्र में गुणवत्ता नियंत्रण तथा जवाबदेही मजबूत करने के उद्देश्य से एक अलग बीज कानून लाने की तैयारी कर रही है। राज्य के कृषि मंत्री दत्तात्रेय भरने ने बताया कि प्रस्तावित कानून किसानों को बीजों को संग्रहित करने, उनका उपयोग करने, आपस में विनिमय करने और बेचने की स्वतंत्रता देगा, बशर्ते वे उन्हें ब्रांडेड नाम से बाजार में न बेचें। इस पहल का उद्देश्य पारंपरिक खेती प्रथाओं की रक्षा करना और साथ ही किसानों को विश्वसनीय बीज उपलब्ध कराना है।

मंत्रालय में आयोजित समीक्षा बैठक के दौरान भरने ने कहा कि नया कानून बीजों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने, किसानों को कानूनी सुरक्षा प्रदान करने और बीज खराब पाए जाने पर तुरंत मुआवजा देने के लिए मजबूत प्रावधान शामिल करेगा। महाराष्ट्र विधानसभा के 2025 के मानसून सत्र के दौरान इस आशय की घोषणा की थी। इस पहल को मौजूदा बीज अधिनियम, 1966 से आगे नियामक ढांचे को अपडेट करने के व्यापक प्रयासों का हिस्सा माना जा रहा है।

कृषि मंत्री ने बताया कि प्रस्तावित कानून में बीज कंपनियों के लिए कड़े जवाबदेही प्रावधान शामिल किए जाने की उम्मीद है, जिसमें घटिया क्वालिटी वाले बीजों के लिए स्पष्ट जिम्मेदारी तय की जाएगी। साथ ही, यह महाबीज़ (Mahabeej) के कामकाज में सुधार लाने और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करने का भी प्रयास करेगा।

कृषि मंत्री के अनुसार, शिकायत निवारण तंत्र को मजबूत करने के लिए जिला स्तर पर बीज शिकायत निवारण केंद्र स्थापित किए जाएंगे। इसके अलावा, सरकार ने अधिकारियों को ‘ट्रुथफुल सीड्स’ के पंजीकरण की प्रक्रिया साथी पोर्टल पर शुरू करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही, कृषि विश्वविद्यालयों द्वारा किए गए शोध को भी नियामक ढांचे में शामिल करने के प्रावधान किए जाएंगे।

नई व्यवस्था के तहत बीज आपूर्ति श्रृंखला से जुड़े सभी हितधारकों - जैसे उत्पादक, प्रसंस्करण इकाइयां, वितरक, विक्रेता और नर्सरी - के लिए पंजीकरण अनिवार्य होगा। नर्सरियों को पौध सामग्री के स्रोत से संबंधित विस्तृत रिकॉर्ड भी सुरक्षित रखने होंगे।

पारदर्शिता बढ़ाने के लिए बीज पैकेटों पर क्यूआर कोड लगाए जाएंगे और उत्पादन से लेकर बिक्री तक बीजों की आवाजाही पर नजर रखने के लिए एक केंद्रीकृत ट्रेसबिलिटी प्रणाली लागू की जाएगी। इसके साथ ही कानून के तहत बीज स्वास्थ्य मानकों को भी लागू किया जाएगा, जिसमें वायरस, बैक्टीरिया और फफूंद के स्वीकार्य स्तरों को नियंत्रित किया जाएगा, ताकि बेहतर फसल परिणाम सुनिश्चित किए जा सकें।

उन्होंने बताया कि राज्य ने ‘साथी पोर्टल’ पर बीज उत्पादन से जुड़े संस्थानों का 100 प्रतिशत पंजीकरण पहले ही पूरा कर लिया है। खरीफ 2026 सीजन से बीजों का उत्पादन, वितरण और बिक्री पूरी तरह इसी पोर्टल के माध्यम से की जाएगी, जिससे पूरे क्षेत्र में ट्रेसबिलिटी, प्रमाणन और जवाबदेही में उल्लेखनीय सुधार होगा।

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