उत्तर प्रदेश में 20 लाख टन आलू खरीद को केंद्र की मंजूरी, आंध्र-कर्नाटक में चना और तूर खरीद पर भी अहम फैसला

केंद्र सरकार ने उत्तर प्रदेश में 20 लाख टन आलू खरीद के उत्तर प्रदेश सरकार के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इसके अलावा आंध्र प्रदेश में चना खरीद की मात्रा तथा कर्नाटक में तूर (अरहर) खरीद की समय सीमा बढ़ाने को भी मंजूरी दी गई है।

उत्तर प्रदेश में 20 लाख टन आलू खरीद को केंद्र की मंजूरी, आंध्र-कर्नाटक में चना और तूर खरीद पर भी अहम फैसला

केंद्र सरकार ने उत्तर प्रदेश में 20 लाख टन आलू खरीद के उत्तर प्रदेश सरकार के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इसके अलावा आंध्र प्रदेश में चना खरीद की मात्रा तथा कर्नाटक में तूर (अरहर) खरीद की समय सीमा बढ़ाने को भी मंजूरी दी गई है। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शनिवार को इन राज्यों के कृषि मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ वर्चुअल बैठक कर ये स्वीकृतियां दीं। इस मौके पर आगामी खरीफ सीजन की तैयारियों की भी समीक्षा की गई।

उत्तर प्रदेश: 20 लाख टन आलू खरीद को स्वीकृति

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने बाजार हस्तक्षेप योजना (MIS) के तहत वर्ष 2025-26 के लिए उत्तर प्रदेश सरकार के आलू खरीद प्रस्ताव को मंजूरी दी है। राज्य में 20 लाख टन आलू की खरीद 6,500.9 रु. प्रति टन के मूल्य पर की जाएगी। इस निर्णय में भारत सरकार का संभावित अंश 203.15 करोड़ रुपए रहेगा। कृषि मंत्रालय की तरफ से जारी बयान में कहा गया है कि इस फैसले से उत्तर प्रदेश के आलू उत्पादक किसानों को लाभकारी मूल्य सुनिश्चित करने में सहायता मिलेगी तथा उन्हें मजबूरी में कम कीमत पर उपज नहीं बेचनी पड़ेगी।

आंध्र प्रदेश: चना खरीद सीमा बढ़ाकर 1,13,250 मीट्रिक टन

केंद्रीय कृषि मंत्री ने आंध्र प्रदेश सरकार के प्रस्ताव को मंजूरी देते हुए रबी 2025-26 सीजन के दौरान मूल्य समर्थन योजना (PSS) के अंतर्गत 1,13,250 मीट्रिक टन चना (बंगाल ग्राम) की खरीद को स्वीकृति दी है। पहले 94,500 टन चना खरीदने की स्वीकृति थी। इस फैसले से राज्य के चना उत्पादक किसानों को राहत मिलने की उम्मीद है।

कर्नाटक: तूर खरीद अवधि 15 मई 2026 तक बढ़ी

कर्नाटक में खरीफ 2025-26 सीजन के दौरान मूल्य समर्थन योजना (PSS) के तहत न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर तूर (अरहर) की खरीद का समय 30 दिनों के लिए बढ़ाया गया है। अब यह खरीद 15 मई 2026 तक जारी रहेगी। इससे कर्नाटक के तूर उत्पादक किसानों को MSP पर अपनी उपज बेचने के लिए अतिरिक्त समय मिलेगा। 

खरीफ की तैयारियों की समीक्षा

चौहान ने आगामी खरीफ मौसम की तैयारियों की उच्चस्तरीय समीक्षा भी की और कृषि सचिव तथा संबंधित वरिष्ठ अधिकारियों को समय रहते आवश्यक प्रबंध करने के निर्देश दिए। बैठक में मौसम पूर्वानुमान, जल उपलब्धता, फसलों की स्थिति, बीज एवं अन्य कृषि इनपुट की व्यवस्था, राज्यों की तैयारियों तथा संभावित प्रतिकूल मौसम परिस्थितियों से निपटने की कार्ययोजना पर चर्चा हुई। बैठक में कृषि मंत्री ने कहा कि संभावित अल नीनो के प्रभाव को लेकर सरकार तैयार है।

मौसम विभाग ने इस वर्ष दक्षिण-पश्चिम मानसून सामान्य से कम रहने की आशंका व्यक्त की है। मौसमी वर्षा देशभर में दीर्घकालीन औसत के लगभग 92 प्रतिशत रहने का अनुमान है। यह संकेत दिया गया है कि मानसून सीजन के दौरान अल नीनो की स्थिति विकसित हो सकती है, हालांकि अंतिम और अद्यतन आकलन मई 2026 के अंतिम सप्ताह में जारी किया जाएगा। बैठक में बताया गया कि देश के जलाशयों का जलस्तर संतोषजनक है। यह सामान्य स्तर के 127.01 प्रतिशत पर है।

समीक्षा के दौरान यह भी उल्लेख किया गया कि वर्ष 2000 से 2016 के बीच अल नीनो का प्रभाव कृषि उत्पादन पर अपेक्षाकृत अधिक स्पष्ट दिखता था, क्योंकि तब वर्षा पर निर्भरता अधिक थी और जलवायु जोखिमों से निपटने की व्यवस्थाएं वर्तमान की तुलना में सीमित थीं। हाल के वर्षों में तकनीकी प्रगति, बेहतर कृषि प्रबंधन, जल संरक्षण, सिंचाई नेटवर्क के विस्तार और उन्नत बीजों के उपयोग से फसलों की उत्पादकता में अधिक स्थिरता आई है।

कृषि मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी राज्य किसी भी विपरीत मौसम की स्थिति से निपटने के लिए पूरी तैयारी रखें और जिला स्तर तक आकस्मिक योजनाओं को सक्रिय किया जाए। उन्होंने कहा कि बीज, उर्वरक और अन्य आवश्यक कृषि इनपुट की उपलब्धता सुनिश्चित करने के साथ वैकल्पिक फसल, देरी से बुवाई की रणनीति और सूखा-सहनशील किस्मों को बढ़ावा दिया जाए, ताकि किसानों को व्यवहारिक और त्वरित समाधान मिल सकें।

Subscribe here to get interesting stuff and updates!