कई राज्यों में बारिश 42 से 53 फीसदी कम, खरीफ सीजन में खाद्यान्न उत्पादन पर पड़ सकता है प्रतिकूल असर

सरकार ने पिछले सप्ताह धान के रकबे के आंकड़े जारी नहीं किये। शुक्रवार 29 जुलाई को जो आंकड़े जारी होंगें वह शायद तसवीर को कुछ साफ कर सकते हैं। सरकार हर शुक्रवार को खरीफ सीजन के फसलों के एरिया कवरेज के आंकड़े जारी करती है। वहीं चालू मानसून सीजन में 1 जून से 27 जुलाई तक के बारिश के जो आंकड़े उपलब्ध हैं उनके मुताबिक उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिमी बंगाल में बारिश का स्तर सामान्य से 42 से 53 फीसदी तक कम बना हुआ है। इसका सीधा असर धान के रकबे और खरीफ सीजन के चावल उत्पादन पर पड़ना तय है

कई राज्यों में बारिश 42 से 53 फीसदी कम, खरीफ सीजन में खाद्यान्न उत्पादन पर पड़ सकता है प्रतिकूल असर

सरकार ने पिछले सप्ताह धान के रकबे के आंकड़े जारी नहीं किये। शुक्रवार 29 जुलाई को जो आंकड़े जारी होंगें वह शायद तसवीर को कुछ साफ कर सकते हैं। सरकार हर शुक्रवार को खरीफ सीजन के फसलों के एरिया कवरेज के आंकड़े जारी करती है। वहीं चालू मानसून सीजन में 1 जून से 27 जुलाई तक के बारिश के जो आंकड़े उपलब्ध हैं उनके मुताबिक उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिमी बंगाल में बारिश का स्तर सामान्य से 42 से 53 फीसदी तक कम बना हुआ है। इसका सीधा असर धान के रकबे और खरीफ सीजन के चावल उत्पादन पर पड़ना तय है।

बारिश के इस रूझान को देखते हुए सरकार को किसानों के लिए कंटींजेंसी प्लान जारी करना चाहिए ताकि वह बारिश की स्थिति को देखते हुए फसलों की सही किस्मों का चयन कर सकें। ऐसे में अगर अभी बारिश सुधरती है तो किसानों को 125 दिन की कम अवधि की चावल किस्मों की बुआई करने के लिए किसानों को जानकारी देनी चाहिए।

भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के मुताबिक 27 जुलाई तक पश्चिमी उत्तर प्रदेश में केवल 144 मिलीमीटर बारिश हुई है जो 1 जून से 27 जुलाई तक की अवधि के लॉन्ग टर्म एवरेज (एलपीए) 285 मिलीमीटर बारिश से 50 फीसदी कम है। इसी तरह पूर्वी उत्तर प्रदेश में अभी तक 349.6 मिलीमीटर के एलपीए के मुकाबले 27 जुलाई तक 162.8 मिलीमीटर बारिश हुई है यानी यहां घाटा 53 फीसदी है। बिहार में 27 जुलाई तक 462.9 मिलीमीटर बारिश सामान्य स्थिति में होनी चाहिए लेकिन यहां अभी तक 269.1 मिलीमीटर बारिश हुई है जो एलपीए से 42 फीसदी कम है। झारखंड  के लिए 27 जुलाई तक एलपीए 467.4 मिलीमीटर है लेकिन यहां 232.8 मिलीमीटर के साथ 50 फीसदी कम बारिश हुई है। वहीं पश्चिमी बंगाल के मैदानी इलाकों में 546.9 मिलीमीटर के एलपीए के मुकाबले 27 जुलाई तक 297.1 मिलीमीटर बारिश हुई  है जो सामान्य से 46 फीसदी कम है।

दिलचस्प बात यह है कि देश में हुई कुल बारिश सामान्य से करीब 10 फीसदी अधिक है। देश भर में 27 जुलाई तक सामान्य रूप से 408.9 मिलीमीटर बारिश होनी चाहिए जबकि वास्तविक बारिश 451.5 मिलीमीटर हुई है। ऐसे में बारिश का क्षेत्रीय असंतुलन चालू खरीफ सीजन में किसानों के लिए मुश्किलें लेकर आया है।

असल में खरीफ सीजन के लिए किसान 1 जून से 15 जून के बीच नर्सरी लगाते हैं और जून के अंतिम सप्ताह से जुलाई के मध्य तक नर्सरी की रोपाई करते हैं। अगर नर्सरी चार सप्ताह अधिक पुरानी होती है तो वह बेहतर उपज  लिए उपयोगी नहीं रहती है। ऐसे में उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल के लिए किसानों ने समय पर धान की रोपाई का समय गंवा दिया है। खासतौर से इन क्षेत्रों में जहां किसानों के पास सिंचाई के पुख्ता संसाधन नहीं हैं क्योंकि बिना बारिश करीब 20 से 25 सिंचाई वाली धान की फसल को बचाये रखने के लिए महंगा डीजल खर्च करना उन किसानों की की कूवत के बाहर है। जहां बिजली से सिंचाई की बेहतर सुविधा नहीं है। इस स्थिति में धान की उत्पादकता में गिरावट आने की आशंका पैदा हो गई है।  

उम्मीद है कि शुक्रवार 29 जुलाई  सरकार खरीफ सीजन के फसलों के कवरेज  आंकड़े जारी करेगी तो स्थिति साफ होगी। वहीं 15 जुलाई के आंकड़ों के मुताबिक देशभऱ में धान का रकबा पिछले साल के मुकाबले 17.38 फीसदी कम बना हुआ था। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक पिछले साल 15 जुलाई तक धान का रकबा 155.53 लाख हैक्टेयर था जबकि चालू खरीफ सीजन में यह 15 जुलाई तक केवल 128.501 लाख हैक्टेयर पर ही पहुंचा है।

खरीफ सीजन में धान के क्षेत्रफल में कमी का असर चावल की कीमतों पर पड़ सकता है। हालांकि जहां तक केंद्रीय पूल में खाद्यान्न भंडार की बात है तो स्थिति अभी बेहतर है। खासतौर से चावल के भंडार के मामले में स्थिति काफी संतोषजनक है। यह 1 जुलाई के बफर मानक से साढ़े तीन गुना है। केंद्रीय पूल में 1 जुलाई को चावल का स्टॉक 472.18 लाख टन था जो पिछले साल के 491.10 लाख टन के मुकाबले मामूली कम है। एक जुलाई के लिए केंद्रीय पूल में चावल का बफर मानक 135.4 लाख है। लेकिन गेहूं के मामले में स्थिति बेहतर नहीं है। एक जुलाई को केंद्रीय पूल में गेहूं का स्टॉक 285.10 लाख टन था जो 275.80 लाख टन के बफर मानक के लगभग करीब है। पिछले साल एक जुलाई को केंद्रीय पूल में गेहूं का स्टॉक 603.56 लाख टन था। एक जुलाई, 2022 को केंद्रीय पूल में गेहूं और चावल का कुल स्टॉक 757.28 लाख टन था जबकि पिछले साल एक जुलाई को केंद्रीय पूल में खाद्यान्नों का स्टॉक 1094.66 लाख टन था।