खुरपका-मुंहपका रोग के SAT1 वायरस का बढ़ता प्रकोप, FAO ने जारी किया अलर्ट

खुरपका-मुंहपका रोग (FMD) के SAT1 वायरस के तेजी से फैलाव को लेकर FAO ने एशिया-प्रशांत देशों को अलर्ट किया है। भारत समेत दक्षिण एशिया के लिए यह खतरा गंभीर माना जा रहा है, जहां उच्च पशुधन घनत्व, पशुओं की आवाजाही और SAT1 वैक्सीन की कमी जोखिम बढ़ा रही है। एफएओ ने निगरानी, बायो-सिक्योरिटी और त्वरित तैयारियां बढ़ाने पर जोर दिया है।

खुरपका-मुंहपका रोग के SAT1 वायरस का बढ़ता प्रकोप, FAO ने जारी किया अलर्ट

संयुक्त राष्ट्र की एजेंसी फूड एंड एग्रीकल्चर ऑर्गनाईजेशन (FAO) ने पशुओं में खुरपका-मुंहपका रोग (FMD) के SAT1 वायरस के बढ़ते प्रकोप को लेकर अलर्ट जारी किया है। संगठन ने एशिया और प्रशांत क्षेत्र के देशों को संभावित गंभीर पशुधन संकट से निपटने के लिए निगरानी और तैयारियों को मजबूत करने की सलाह दी है।

यह अलर्ट SAT1 सीरोटाइप के तेजी से भौगोलिक विस्तार के बाद जारी किया गया है, जो पारंपरिक रूप से उप-सहारा अफ्रीका तक सीमित था, लेकिन अब पश्चिम एशिया, यूरोप और पूर्वी एशिया के कुछ हिस्सों तक फैल चुका है। हालिया मामलों ने इसके प्रसार को लेकर चिंता बढ़ा दी है। FAO ने 15 अप्रैल 2026 को जारी अपने अलर्ट में एशिया और प्रशांत क्षेत्र के देशों से अपील की है कि वे FMD वायरस के सीरोटाइप SAT1 के लगातार फैलाव को देखते हुए सतर्कता और तैयारियों को बढ़ाएं। 

अप्रैल 2025 में FAO ने इराक में FMD वायरस के सीरोटाइप SAT1 का पता चलने के बाद एक क्षेत्रीय अलर्ट जारी किया था। इराक में मवेशियों और भैंसों में संक्रमण के मामले सामने आए थे, जबकि बहरीन में आयात क्वारंटाइन के दौरान संक्रमित पशुधन की पहचान हुई थी। तब से यह वायरस अलग-अलग दिशाओं में तेजी से फैलता रहा है और साइप्रस, ग्रीस, इजराइल, लेबनान, फिलिस्तीन और हाल ही में चीन में इसके प्रकोप की पुष्टि हुई है।

एफएमडी के इस नए सीरोटाइप का नए क्षेत्रों के पशुओं में संक्रमण भारी आर्थिक और उत्पादन नुकसान का कारण बन सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, पशुओं और पशु उत्पादों की आवाजाही, व्यापार तथा परिवहन के दौरान पशुओं का आपसी संपर्क इसके प्रसार के प्रमुख कारण हैं।

भारत के पशुधन क्षेत्र के लिए खतरा

एफएमडी के संभावित खतरे को देखते हुए केंद्र सरकार के पशुपालन एवं डेयरी विभाग ने तैयारियां पहले ही शुरू कर दी हैं। मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी राज्यों के पशुपालन विभागों और शोध संस्थानों के साथ मिलकर इस खतरे से निपटने की रणनीति तैयार कर रहे हैं।

देश के कई राज्यों को एफएमडी मुक्त बनाने के प्रयास पहले से चल रहे थे, लेकिन यह नया खतरा इन योजनाओं को प्रभावित कर सकता है। एफएमडी नियंत्रण से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी ने रूरल वॉयस को बताया कि इस बीमारी की रोकथाम न केवल पशुपालन और दुग्ध उत्पादन के लिए, बल्कि इससे जुड़े वैल्यू चेन और निर्यात के लिए भी बेहद अहम है। यह पशुपालकों की आजीविका से भी जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा है।

भारत और दक्षिण एशिया के लिए यह खतरा इसलिए अधिक गंभीर है क्योंकि यहां पशुधन का घनत्व अधिक है, पशुओं की अनौपचारिक आवाजाही व्यापक है और व्यापार नेटवर्क में पशुओं का मिश्रण बढ़ रहा है। वहीं, SAT1 के अनुरूप वैक्सीन की सीमित उपलब्धता इस चुनौती को और जटिल बनाती है।

भारत में एफएमडी टीकाकरण कार्यक्रम मुख्य रूप से O, A और Asia1 सीरोटाइप पर केंद्रित हैं। SAT1 आमतौर पर इन टीकों में शामिल नहीं होता, जिससे बड़ी पशुधन आबादी इस नए खतरे के प्रति असुरक्षित बनी हुई है।

तत्काल कदम उठाने की जरूरत

FAO ने एशिया और प्रशांत क्षेत्र के देशों से तुरंत कदम उठाने की अपील की है। इसमें रोग निगरानी प्रणाली को मजबूत करना, संदिग्ध मामलों की त्वरित लैब जांच सुनिश्चित करना और फार्म, मंडी व सीमा स्तर पर बायो-सिक्योरिटी को बढ़ाना शामिल है।

संगठन ने जागरूकता बढ़ाने, आपातकालीन योजनाओं की समीक्षा करने, पशुपालकों और पशु चिकित्सकों को सतर्क करने तथा पशुओं की आवाजाही और व्यापार पर सख्त नियंत्रण लागू करने की भी सलाह दी है।

खुरपका-मुंहपका रोग (FMD)

एफएमडी एक अत्यंत संक्रामक वायरल बीमारी है, जो गाय, भैंस, भेड़, बकरी और सूअर जैसे खुर वाले पशुओं को प्रभावित करती है। यह मनुष्यों के लिए खतरनाक नहीं है, लेकिन खाद्य सुरक्षा, आजीविका और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर इसका गंभीर प्रभाव पड़ता है।

एफएमडी वायरस के सात सीरोटाइप होते हैं—A, O, C, SAT1, SAT2, SAT3 और Asia1। इनमें से किसी एक सीरोटाइप के प्रति विकसित इम्युनिटी दूसरे से सुरक्षा नहीं देती। इसके अलावा, प्रत्येक सीरोटाइप के भीतर अलग-अलग टोपोटाइप होते हैं, जो वैक्सीन चयन और उसकी प्रभावशीलता को प्रभावित करते हैं।

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