अमेरिका से चीन हर साल 17 अरब डॉलर के कृषि उत्पाद खरीदेगा, टैरिफ घटाने के भी दिए संकेत

चीन ने अमेरिकी कृषि उत्पादों पर टैरिफ में कटौती करने और अमेरिका से कृषि आयात बढ़ाने के संकेत दिए हैं। डोनाल्ड ट्रंप और शी जिनपिंग की बैठक के बाद हुए इस समझौते के तहत चीन 2026 से 2028 तक हर साल कम से कम 17 अरब डॉलर के अमेरिकी कृषि उत्पाद खरीदेगा, जिससे वैश्विक अनाज बाजारों में तेजी आई है।

अमेरिका से चीन हर साल 17 अरब डॉलर के कृषि उत्पाद खरीदेगा, टैरिफ घटाने के भी दिए संकेत

चीन ने अमेरिकी कृषि उत्पादों पर टैरिफ में कटौती करने और अमेरिका से कृषि आयात बढ़ाने के संकेत दिए हैं। यह समझौता अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच पिछले सप्ताह बीजिंग में हुई बैठक के बाद सामने आया है। 

चीन के वाणिज्य मंत्रालय ने कहा कि दोनों देशों ने सिद्धांततः कृषि उत्पादों को पारस्परिक टैरिफ कटौती ढांचे में शामिल करने पर सहमति जताई है, जिसका उद्देश्य द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ावा देना है। हालांकि, बीजिंग ने यह स्पष्ट नहीं किया कि किन उत्पादों को इसमें शामिल किया जाएगा, लेकिन इसे दोनों देशों के बीच लंबे समय से जारी व्यापार तनाव कम करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।

यह बयान व्हाइट हाउस की उस घोषणा के बाद आया है, जिसमें कहा गया था कि चीन 2026, 2027 और 2028 के दौरान हर साल कम से कम 17 अरब डॉलर के अमेरिकी कृषि उत्पाद खरीदेगा। यह प्रतिबद्धता अक्टूबर 2025 में हुए सोयाबीन खरीद समझौते के अतिरिक्त होगी। विश्लेषकों का मानना है कि यह समझौता अमेरिकी कृषि उत्पादों के चीनी आयात को फिर से रिकॉर्ड स्तर के करीब पहुंचा सकता है। 

व्हाइट हाउस के अनुसार, इस समझौते के तहत अमेरिकी कृषि क्षेत्रों को बाजार पहुंच भी बढ़ाई जाएगी। चीन ने अमेरिका की 400 से अधिक बीफ प्रसंस्करण इकाइयों का पंजीकरण रिन्यू कर दिया है और कुछ अन्य इकाइयों पर लगे प्रतिबंध हटाने के लिए अमेरिकी नियामकों के साथ काम करने पर सहमति जताई है। इसके अलावा, चीन ने उन अमेरिकी राज्यों से पोल्ट्री आयात फिर शुरू करने की मंजूरी दी है, जिन्हें अमेरिकी कृषि विभाग (USDA) ने बर्ड फ्लू से मुक्त घोषित किया है।

यह नया कृषि समझौता अक्टूबर 2025 में हुए उस समझौते के अतिरिक्त है, जिसके तहत चीन ने 2025-26 विपणन वर्ष में 1.2 करोड़ टन अमेरिकी सोयाबीन खरीदने और अगले तीन वर्षों तक हर साल 2.5 करोड़ टन सोयाबीन आयात करने पर सहमति दी थी।

अक्टूबर का समझौता मात्रा आधारित था, जबकि नया समझौता मूल्य आधारित है। इससे संकेत मिलता है कि चीन केवल सोयाबीन नहीं बल्कि कई अन्य कृषि उत्पादों की भी बड़ी मात्रा में खरीद कर सकता है।

चीन के वाणिज्य मंत्रालय ने यह भी कहा कि दोनों देश व्यापार परिषद और निवेश परिषद स्थापित करेंगे, जो व्यापार और निवेश से जुड़े मुद्दों तथा टैरिफ कटौती पर चर्चा करेंगे। अधिकारियों के अनुसार, टैरिफ में कमी लगभग 30 अरब डॉलर के उत्पादों पर लागू हो सकती है। चीन ने यह भी कहा कि वह कृषि जैव-प्रौद्योगिकी से जुड़े अमेरिकी मुद्दों पर चर्चा जारी रखेगा। हालांकि इस संबंध में अधिक जानकारी नहीं दी गई।

इन घटनाक्रमों का असर वैश्विक अनाज बाजारों पर भी दिखाई दिया। शिकागो मर्केंटाइल एक्सचेंज (CME) में मक्का वायदा लगभग 5 प्रतिशत तक उछल गया, जबकि गेहूं और सोयाबीन वायदा में भी तेज बढ़त दर्ज की गई। कारोबारियों को उम्मीद है कि चीन की मांग बढ़ने से अमेरिकी कृषि निर्यात को बड़ा सहारा मिलेगा।

कृषि व्यापार पर यह नया फोकस कई वर्षों के टैरिफ विवादों के बाद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वर्ष 2018 में शुरू हुए व्यापार युद्ध के दौरान चीन ने अमेरिकी कृषि उत्पादों पर जवाबी टैरिफ लगाए थे, जिससे अमेरिकी सोयाबीन निर्यात में भारी गिरावट आई थी।

USDA के अनुसार, 2018 के व्यापार युद्ध से अमेरिकी कृषि क्षेत्र को 27 अरब डॉलर से अधिक का नुकसान हुआ था, जिसमें सबसे बड़ा हिस्सा सोयाबीन क्षेत्र का था। 2025 में चीन को अमेरिकी सोयाबीन निर्यात पिछले वर्ष की तुलना में 75 प्रतिशत तक घट गया था। हालांकि समझौते के कई विवरण अभी तय होने बाकी हैं, लेकिन दोनों देशों ने बातचीत को सकारात्मक बताया है और कृषि व्यापार सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए वार्ता जारी रखने की बात कही है।

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