पेट्रोल-डीजल पर विशेष उत्पाद शुल्क में 10-10 रुपये की कटौती

ईरान युद्ध के कारण जारी उतार-चढ़ाव के बीच केंद्र सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क में कटौती की है। सरकारी आदेश के अनुसार पेट्रोल पर यह शुल्क घटाकर 13 रुपये से घटाकर 3 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। डीजल पर 10 रुपये प्रति लीटर शुल्क को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है।

पेट्रोल-डीजल पर विशेष उत्पाद शुल्क में 10-10 रुपये की कटौती

ईरान युद्ध के कारण जारी उतार-चढ़ाव के बीच केंद्र सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क में कटौती की है। सरकारी आदेश के अनुसार पेट्रोल पर यह शुल्क घटाकर 13 रुपये से घटाकर 3 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। डीजल पर 10 रुपये प्रति लीटर शुल्क को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है। इस तरह दोनों ईंधनों पर 10-10 रुपये प्रति लीटर की कटौती की गई है। वित्त मंत्रालय की अधिसूचना के अनुसार यह राहत तुरंत लागू हो गया है।

पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा, “सरकार ने कर राजस्व में बड़ा नुकसान उठाते हुए यह कदम उठाया है, ताकि अंतरराष्ट्रीय कीमतों में तेज उछाल के कारण तेल कंपनियों को हो रहे भारी नुकसान (पेट्रोल पर लगभग 24 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर 30 रुपये प्रति लीटर) को कम किया जा सके।” 

इससे पहले अप्रैल 2025 में केंद्र सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क में 2 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की थी। गुरुवार को ही देश की सबसे बड़ी निजी ईंधन खुदरा कंपनी नायरा एनर्जी ने पेट्रोल के दाम में 5 रुपये प्रति लीटर और डीजल में 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की थी। 

इसके अलावा सरकार ने अलग-अलग अधिसूचनाओं के जरिए विमान ईंधन (ATF) पर भी शुल्क ढांचे में बदलाव किया है। एक अधिसूचना में ATF पर 50 रुपये प्रति लीटर का विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क लगाया गया है, जबकि अन्य प्रावधानों के तहत कुछ हिस्सों में छूट या संशोधित दरें लागू की गई हैं। इससे विमानन क्षेत्र को आंशिक राहत मिलने की उम्मीद है।

शुल्क में यह कटौती ऐसे समय की गई है जब भारत वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और आपूर्ति बाधाओं का सामना कर रहा है। अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच युद्ध के चलते वैश्विक तेल आपूर्ति के प्रमुख मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) काफी हद तक बाधित है, जिससे शिपिंग और गैस आपूर्ति प्रभावित हुई है। भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक है और अपनी 90 प्रतिशत से अधिक कच्चे तेल की जरूरत आयात से पूरी करता है।

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