MC14: डब्ल्यूटीओ वार्ता में भारत पर बढ़ा दबाव; कृषि, फिशरीज सब्सिडी और ई-कॉमर्स समझौतों पर फोकस

डब्ल्यूटीओ के 14वें मंत्रिस्तरीय सम्मेलन (MC14) में ई-कॉमर्स शुल्क और निवेश पर मतभेद तेज हो गए हैं। विकसित देशों की तरफ से भारत पर दबाव बढ़ रहा है। कृषि में पब्लिक स्टॉकहोल्डिंग और फिशरीज सब्सिडी में सीमित प्रगति की उम्मीद है और नतीजे मामूली समझौते तक सीमित रह सकते हैं।

MC14: डब्ल्यूटीओ वार्ता में भारत पर बढ़ा दबाव; कृषि, फिशरीज सब्सिडी और ई-कॉमर्स समझौतों पर फोकस
डब्ल्यूटीओ के 14वें मंत्रिस्तरीय सम्मेलन में भारत के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल।

कैमरून के याउंडे में आयोजित WTO के 14वीं मंत्रिस्तरीय सम्मेलन (MC14) का तीसरा दिन निर्णायक बनता दिख रहा है। मंत्रियों की बैठक चार प्रमुख क्षेत्रों- कृषि, फिशरीज सब्सिडी, निवेश सुविधा और ई-कॉमर्स- पर हो रही है। साथ ही खुली बैठकों में देश अपने-अपने रुख स्पष्ट कर रहे हैं। इस बीच, वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने सम्मेलन के दूसरे दिन कहा कि सहमति आधारित निर्णय प्रक्रिया डब्ल्यूटीओ की वैधता की आधारशिला है। उन्होंने जोर दिया कि डब्ल्यूटीओ सुधारों में उरुग्वे वार्ता से उत्पन्न असमानताओं को शामिल किया जाना चाहिए। साथ ही, सभी सदस्य देशों को उत्पादन क्षमता बढ़ाने, रोजगार सृजन करने और वैश्विक व्यापार में सार्थक भागीदारी का समान अवसर मिलना जरूरी है।

हालांकि किसी बड़े मुद्दे पर समाधान की संभावना कम है, लेकिन शनिवार की चर्चा अंतिम नतीजों की दिशा तय कर सकती है। दिल्ली स्थित थिंक टैंक ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनीशिएटिव (GTRI) के अनुसार सबसे बड़ा मतभेद ई-कॉमर्स पर कस्टम ड्यूटी मोरेटोरियम को लेकर है। अमेरिका इसे स्थायी रूप से बढ़ाने की वकालत कर रहा है, जबकि भारत और अन्य विकासशील देश राजस्व नुकसान और नीतिगत सीमाओं का हवाला देते हुए इसका विरोध कर रहे हैं। इस मुद्दे पर 2-4 साल के अस्थायी समझौते की संभावना सबसे अधिक मानी जा रही है।

निवेश सुविधा समझौते (IFD) पर अब भारत लगभग अकेला पड़ता दिख रहा है, क्योंकि अन्य देशों का विरोध कमजोर पड़ गया है। तुर्किये ने भी अपना विरोध वापस ले लिया है। छोटे समूहों की “ग्रीन रूम” बैठकों और WTO के महानिदेशक के सीधे हस्तक्षेप के जरिए नई दिल्ली पर दबाव बढ़ने की संभावना है। भारत की चिंता इस समझौते से अधिक उस बात को लेकर है, जो यह स्थापित कर सकता है कि ऐसे बहुपक्षीय समझौतों का रास्ता खोलना डब्ल्यूटीओ की बहुपक्षीय प्रकृति को बदल सकते हैं।

कृषि क्षेत्र में कुछ सदस्य, जिनमें केयर्न ग्रुप भी शामिल है, नए वार्ता एजेंडा की मांग कर सकते हैं, जिससे मौजूदा मुद्दे पीछे छूट सकते हैं। इनमें कुछ मुद्दे खासकर भारत के लिए महत्वपूर्ण विषय हैं। खाद्य सुरक्षा के लिए सार्वजनिक भंडारण (PSH) पर भारत की स्थायी समाधान की मांग पर किसी नतीजे की उम्मीद नहीं है। फिशरीज सब्सिडी के मुद्दे पर भी मतभेद बने रहने से सीमित प्रगति की संभावना है। 

भारत ने उठाए संरचनात्मक असमानताओं के मुद्दे

सम्मेलन के दूसरे दिन पीयूष गोयल ने कहा कि सहमति आधारित निर्णय ही डब्ल्यूटीओ  की विश्वसनीयता का आधार है और किसी भी सदस्य के संप्रभु अधिकार की अनदेखी नहीं की जानी चाहिए। इसके तहत वह उन नियमों से बंधने के लिए बाध्य नहीं है जिनसे वह सहमत नहीं है। भारत ने यह भी कहा कि सहमति से निर्णय लेने में आ रही चुनौतियों को दूर करने के लिए भरोसे का पुनर्निर्माण जरूरी है। इसके साथ ही, डब्ल्यूटीओ  को मौजूदा गतिरोध और उसके कारणों की गंभीर समीक्षा करनी चाहिए। 

‘समान अवसर (लेवल प्लेइंग फील्ड)’ के मुद्दे पर गोयल ने कहा कि चर्चाओं में उरुग्वे दौर से उत्पन्न असमानताओं को ध्यान में रखना होगा। उन्होंने खाद्य सुरक्षा, सार्वजनिक भंडारण (PSH) और कपास पर विशेष सुरक्षा तंत्र (SSM) जैसे लंबे समय से लंबित मुद्दों को प्राथमिकता देने की आवश्यकता पर जोर दिया। विवाद निपटान प्रणाली की लगातार निष्क्रियता को रेखांकित करते हुए भारत ने कहा कि प्रभावी न्यायिक व्यवस्था के बिना नियमों का पालन सुनिश्चित नहीं हो सकता।

भारत ने यह भी चेतावनी दी कि पारदर्शिता का इस्तेमाल व्यापारिक प्रतिशोध को उचित ठहराने या घरेलू नीतियों को चुनौती देने के लिए नहीं किया जाना चाहिए। इसके बजाय, इसे ठोस और निरंतर क्षमता निर्माण के साथ जोड़ा जाना चाहिए, ताकि सभी सदस्य अपने दायित्वों को निष्पक्ष और प्रभावी ढंग से पूरा कर सकें। भारत ने दोहराया कि सभी देशों को उत्पादन क्षमता बढ़ाने, रोजगार सृजन करने और वैश्विक व्यापार में भागीदारी का समान अवसर मिलना चाहिए।

दूसरे दिन का समापन WTO सुधार और पारदर्शिता पर मंत्रीस्तरीय पूर्ण सत्र के साथ हुआ। इस सत्र में वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने समयबद्ध तरीके से सुधार प्रक्रिया को दोबारा शुरू करने के लिए भारत का समर्थन जताया। उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया ठोस साक्ष्यों और सदस्य देशों के प्रस्तावों व मंत्रीस्तरीय निर्णयों के आधार पर आगे बढ़नी चाहिए। भारत ने स्पष्ट रूप से कहा कि चुनिंदा मुद्दों को प्राथमिकता देने और पूर्व निर्धारित रुख अपनाने से बचना चाहिए।

भारत ने डब्ल्यूटीओ समितियों की भूमिका को अधिक महत्व देने की भी आवश्यकता बताई। बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली को कमजोर करने वाले बहुपक्षीय समझौतों के प्रति सावधान करते हुए अग्रवाल ने कहा कि सहमति आधारित प्रक्रिया खुलापन, पारदर्शिता, समावेशिता और सदस्य-प्रधान सिद्धांतों पर आधारित होनी चाहिए।

सम्मेलन के दूसरे दिन गोयल ने अमेरिका, चीन, कोरिया, स्विट्जरलैंड, न्यूजीलैंड, कनाडा, मोरक्को और ओमान के प्रतिनिधियों के साथ द्विपक्षीय बैठकें भी कीं। इन बैठकों में MC14 के एजेंडा के साथ-साथ द्विपक्षीय व्यापार संबंधों को मजबूत करने से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई।

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