Opinion
उत्तर प्रदेश चुनाव के बहाने गुर्जर खुद को सशक्त करें
उत्तर प्रदेश में 403 विधानसभा चुनाव क्षेत्र हैं, इनमें गुर्जर जाति की उपस्थिति 77...
सरकार और दलों की केंद्रीकृत व्यवस्था से कद्दावर नेताओं में बेचैनी
उत्तर प्रदेश में विधान सभा चुनावों के ऐन पहले पिछले दिनों अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी)...
पिछड़े राज्य पहले कृषि और फिर उद्योग को मजबूत करें, इससे विकास टिकाऊ और समावेशी होगा
विकास के एजेंडे में कृषि की अग्रणी भूमिका को लेकर पूरी दुनिया में एक नया विचार उभर...
कृषि को केंद्र में रखकर नीति बनाने से टिकाऊ और समावेशी विकास संभव
अर्थशास्त्रियों ने कृषि के विकास के गैर-कृषि क्षेत्र पर असर और दोनों के बीच संबंधों...
एग्री बिजनेस से गांवों का विकासः चुनौतियां और उनका समाधान
एग्री बिजनेस की पहल ग्रामीण क्षेत्र को प्रभावित करने वाले सभी मुद्दों के हल के लिए...
प्रभावी एमएसपी हो किसानों और सरकार की सहमति का केंद्र बिंदु
एक बेहतर कृषि नीति और उपज की लाभकारी कीमत की किसानों की मांग अभी पूरी होनी बाकी...
कृषि कानून तो खत्म लेकिन आगे का रास्ता क्या होगा
कानून वापस होने का मतलब क्या कृषि क्षेत्र में सुधारों का खत्म हो जाना है? उम्मीद...
समावेशी कृषि हो 2022 के लिए विकास का रोडमैप
अब देश के नीति निर्माताओं को अभी की जरूरत, वर्तमान संकट का उपाय जैसे शब्दों को नकार...
बढ़ती महंगाई से कोई अछूता नहीं, इस पर लगाम जरूरी
थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) के आधार पर थोक बाजारों में मुद्रास्फीति की दर...
क्यों चंपारण और खेड़ा के किसान आंदोलनों से बड़ा है मौजूदा किसान आंदोलन
आज यानी 11 दिसंबर को गुरू ग्रंथ साहिब के पाठ और हवन के बाद किसान दिल्ली की सीमाओं...
किसानों को वोट बैंक के रूप में खारिज करने की बजाय कारपोरेट जगत उन्हें सहयोगी मान कर काम करे
भारतीय कारपोरेट जगत को यह बात समझ लेनी चाहिए कि वोट बैंक जैसे शब्द के जो मायने वह...
सुधारों के जरिये इनपुट लागत पर नियंत्रण की कोशिश होती है, खाद्य सब्सिडी को लेकर भ्रम टूटना जरूरी
किसानों की आय में वृद्धि के लिए पानी, उर्वरक, बीज, परिवहन, भंडारण कृषि में डीजल...
राजनीतिक और आर्थिक परिदृष्य पर किसान लॉबी की वापसी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा तीन विवादास्पद कृषि कानूनों की वापसी की घोषणा करने...
महंगाई ले चुकी है स्थायी रूप , शहरी से ग्रामीण तक सभी प्रभावित
इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि उपभोक्ता मूल्य सूचकां (सीपीआई) या थोक मूल्य सूचकांक...
डब्ल्यूटीओ के 12वें मंत्रीस्तरीय सम्मेलन में भारत के लिए पीस क्लॉज से परमानेंट सलूशन तक जाने की गंभीर चुनौती
कृषि समझौते के तहत सब्सिडी प्रस्ताव पर आगे बढ़ने के पहले राजदूत पेराल्टा को कृषि...
किसान आंदोलन: दायरा बढ़ाकर राष्ट्रीय मंच बनाने की जरूरत
किसानों का 2024 तक दिल्ली की सीमाओं पर विरोध में बैठना पर्याप्त नहीं हो सकता उन्हें...
RECOMMENDED
भारत-ईयू एफटीए का कृषि पर असर तो होगा
इंटरनेशनल ट्रेड के जानकारों का साफ कहना है कि फ्रूट जूस, वाइन, खाद्य तेल और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों की एक लंबी फेहरिस्त है, जिनको...
आर्थिक सर्वेक्षण में एथेनॉल नीति पर किया आगाह, मक्का को प्रोत्साहन से घट रही दलहन-तिलहन की खेती
आर्थिक सर्वेक्षण 2025–26 ने एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम को भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए अहम बताया है, लेकिन खेती के पैटर्न में बदलाव और...
बजट, राजनीति और किसान: सवाल नीति और नीयत का
भारत कृषक समाज के अर्काइव (1955-1980) के डिजिटाइजेशन से नीतिगत चर्चा में एक अनोखी निरंतरता का पता चलता है। भारतीय कृषि से जुड़ी कई...
आर्थिक सर्वे में कृषि सुधारों की वकालत, उर्वरक असंतुलन पर चिंता, यूरिया के दाम बढ़ाने का सुझाव
आर्थिक सर्वेक्षण 2025–26 में कृषि सुधारों की जरूरत पर जोर देते हुए उर्वरक असंतुलन और कम पूंजी निवेश को बड़ी चुनौती बताया गया है। सर्वे...
भारत–ईयू व्यापार समझौता: यूरोप के किसानों की बड़ी जीत, भारतीय कृषि के लिए भी संतुलित अवसर
भारत–यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते से यूरोपीय कृषि और खाद्य उत्पादकों को बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है, क्योंकि भारत ने कई कृषि और...
बजट 2026: कृषि के बेहतर भविष्य के लिए तात्कालिक राहत और दीर्घकालिक सुधारों का संतुलित समावेश जरूरी
केंद्रीय बजट 2026-27 कृषि क्षेत्र की तात्कालिक चुनौतियों को हल करने के लिए आत्मनिर्भरता, जलवायु अनुकूलता और निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता...
