कांग्रेस नेता नरेश कुमार का दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता पर निशाना, कहा किसानों के मुद्दों पर दोहरा रवैया अपना रही हैं सीएम
कांग्रेस प्रवक्ता डॉ. नरेश कुमार ने किसानों के मुद्दों पर कथित दोहरे रवैये को लेकर दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की आलोचना की। उन्होंने दिल्ली सरकार पर भूमि अधिकार, एमएसपी और मुआवजे की अनदेखी का आरोप लगाया, जबकि पश्चिम बंगाल के किसानों के मुद्दे उठाने को राजनीतिक और पाखंडी बताया।
कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता डॉ. नरेश कुमार ने दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता पर तीखा हमला करते हुए आरोप लगाया है कि वह किसानों के नाम पर राजनीति कर रही हैं, जबकि राष्ट्रीय राजधानी में किसानों की समस्याओं की अनदेखी की जा रही है।
पश्चिम बंगाल में किसानों के मुद्दों पर गुप्ता के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कुमार ने कहा कि दिल्ली में किसानों के साथ “विश्वासघात” करने वाली सरकार को अन्य राज्यों में इस तरह के मुद्दे उठाने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि जहां दिल्ली सरकार भूमि से जुड़े मुद्दों पर दूसरों की आलोचना करती है, वहीं स्थानीय किसानों से जुड़े अहम विषयों - जैसे भूमि अधिकार, मुआवजा और सर्किल रेट में संशोधन पर पूरी तरह चुप्पी साधे हुए है।
मुख्य मुद्दों को रेखांकित करते हुए कुमार ने कहा कि दिल्ली में कृषि भूमि के सर्किल रेट 2008 से संशोधित नहीं किए गए हैं, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। उन्होंने लंबे समय से लंबित भूमि पूलिंग नीति के लागू होने में देरी का भी मुद्दा उठाया और कहा कि इससे किसानों को उनकी जमीन का उचित लाभ नहीं मिल पा रहा है।
कांग्रेस नेता ने आगे आरोप लगाया कि दिल्ली के किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर खरीद की कोई गारंटी नहीं है, जिससे उन्हें मजबूरी में अपनी उपज कम कीमत पर बेचनी पड़ रही है। हालिया बेमौसम बारिश का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि व्यापक फसल नुकसान के बावजूद सरकार ने प्रति एकड़ 50,000 रुपये मुआवजे की मांग को नजरअंदाज कर दिया है।
कुमार ने भाजपा पर भी निशाना साधते हुए कहा कि सत्ता में आने से पहले किसानों से किए गए वादों को भुला दिया गया है। उन्होंने सरकार से दिल्ली का “किसान राज्य” का दर्जा बहाल करने और सभी वादों को पूरा करने की मांग की।
मुख्यमंत्री की जवाबदेही पर सवाल उठाते हुए कुमार ने कहा कि उन्हें पहले दिल्ली के किसानों के लिए उठाए गए ठोस कदमों की जानकारी देनी चाहिए, न कि अन्य राज्यों को निशाना बनाना चाहिए। उन्होंने सरकार के भीतर समन्वय की कमी का भी आरोप लगाया, जिससे शासन प्रभावित हो रहा है और आम लोगों की मुश्किलें बढ़ रही हैं।

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