भारत का सरसों उत्पादन 3.5 फीसदी बढ़ने की उम्मीद, रबी 2025-26 में 119.4 लाख टन उत्पादन का अनुमान

देश में इस साल सरसों की बंपर पैदावार होने की उम्मीद है। सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एसईए) के अनुसार, रबी 2025-26 सीजन के लिए देश में रेपसीड-मस्टर्ड (सरसों) का कुल उत्पादन 119.4 लाख टन रहने का अनुमान है।

भारत का सरसों उत्पादन 3.5 फीसदी बढ़ने की उम्मीद, रबी 2025-26 में 119.4 लाख टन उत्पादन का अनुमान

तिलहन उत्पादन के मोर्चे पर अच्छी खबर है। साल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (SEA) ने रबी सीजन 2025-26 के लिए रेपसीड-सरसों उत्पादन का पहला अनुमान जारी किया है। एसोसिएशन के अनुसार, इस साल देश में सरसों का कुल उत्पादन 119.4 लाख टन रहने की संभावना है, जो पिछले साल के 115.2 लाख टन के मुकाबले लगभग 3.5 प्रतिशत अधिक है।

एसईए के अध्यक्ष संजीव अस्थाना ने जयपुर में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि उत्पादन में यह वृद्धि बेहतर खेती के तरीकों, किसानों में बढ़ती जागरूकता और सरकारी नीतियों के सकारात्मक प्रभाव का परिणाम है। उन्होंने कहा कि सरसों की अच्छी फसल देश में खाद्य तेलों की उपलब्धता बढ़ाने और आयात पर निर्भरता कम करने में अहम भूमिका निभाएगी।

संजीव अस्थाना ने बताया कि 2019-20 में सरसों का उत्पादन महज 86 लाख टन था, जो अब 120 लाख टन के करीब पहुंच रहा है। यह वृद्धि खाद्य तेलों के आयात पर देश की निर्भरता कम करने में अहम भूमिका निभाएगी। 

प्रमुख आंकड़ों पर एक नजर

एसोसिएशन द्वारा नियुक्त एजेंसी 'एग्रीवाच' के सर्वेक्षण और रिमोट सेंसिंग आंकड़ों के आधार पर निम्नलिखित महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं:

  • बुवाई का रकबा: इस साल सरसों की बुवाई का क्षेत्रफल बढ़कर 93.91 लाख हेक्टेयर हो गया है, जो पिछले साल 92.15 लाख हेक्टेयर था।
  • औसत पैदावार (Yield): बेहतर मौसम और खेती की उन्नत तकनीकों के कारण औसत पैदावार भी 1,250 किग्रा/हेक्टेयर से बढ़कर 1,271 किग्रा/हेक्टेयर होने का अनुमान है।

सरसों में राजस्थान फिर अव्वल

राज्यवार आंकड़ों में राजस्थान देश का सबसे बड़ा सरसों उत्पादक बना हुआ है, जहां उत्पादन 53.9 लाख टन रहने का अनुमान है। उत्तर प्रदेश में उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि के साथ यह 18.1 लाख टन तक पहुंच सकता है। हरियाणा में भी उत्पादन बढ़कर 12.7 लाख टन होने का अनुमान है।

हालांकि, मध्य प्रदेश में उत्पादन थोड़ा घटकर 13.9 लाख टन रहने का अनुमान है। वहीं पश्चिम बंगाल और गुजरात में क्रमशः 7.4 लाख टन और 5.9 लाख टन उत्पादन का अनुमान है। असम में उत्पादन घटकर 2.1 लाख टन रहने की संभावना है, जबकि बिहार में उत्पादन लगभग 0.9 लाख टन पर स्थिर रह सकता है।

राज्य बुवाई क्षेत्र 2024-25 (हेक्टेयर) बुवाई क्षेत्र 2025-26 (हेक्टेयर) पैदावार 2024-25 (किग्रा/हे.) पैदावार 2025-26 (किग्रा/हे.) उत्पादन 2024-25 (लाख टन) उत्पादन 2025-26 (लाख टन)
राजस्थान 34,74,000 35,77,958 1,498 1,506 52.0 53.9
उत्तर प्रदेश 14,23,000 15,41,444 1,096 1,172 15.6 18.1
मध्य प्रदेश 14,86,000 14,04,368 987 993 14.7 13.9
हरियाणा 7,14,000 7,30,270 1,723 1,733 12.3 12.7
पश्चिम बंगाल 6,83,000 7,37,861 995 997 6.8 7.4
गुजरात 2,62,000 2,83,970 2,055 2,067 5.4 5.9
असम 3,15,000 3,20,332 798 667 2.5 2.1
बिहार 85,581 85,942 1,086 1,031 0.9 0.9
निगरानी वाले राज्य 84,42,581 86,82,145 1,306 1,322 110.2 114.9
अन्य राज्य 7,72,419 7,09,273 638 640 4.9 4.5
भारत (कुल) 92,15,000 93,91,418 1,250 1,271 115.2 119.4

बदलते मौसम पर रहेगी नजर

SEA के कार्यकारी निदेशक डॉ. बी.वी. मेहता ने स्पष्ट किया कि यह अनुमान फिलहाल प्रारंभिक हैं और मौसम की स्थिति, फसल की प्रगति तथा रिमोट सेंसिंग व फील्ड सर्वे के आधार पर इनमें बदलाव संभव है। अंतिम अनुमान अप्रैल-मई के दौरान तीसरे और अंतिम सर्वे के बाद जारी किया जाएगा। एसोसिएशन के अनुसार, कुल मिलाकर इस वर्ष सरसों की फसल सकारात्मक संकेत दे रही है, जिससे देश में तिलहन क्षेत्र को मजबूती मिलने की उम्मीद है। 

रेपसीड-मस्टर्ड प्रमोशन काउंसिल के चेयरमैन विजय डाटा ने इस फसल को भारतीय तिलहन क्षेत्र के लिए एक सकारात्मक संकेत बताया है, जिससे बाजार में खाद्य तेलों की उपलब्धता बेहतर होगी।

 

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