एनसीईएल ने सहकारी निर्यात को बढ़ावा देने के लिए पंजाब और लद्दाख के साथ किए समझौते
एनसीईएल ने पंजाब और लद्दाख पर विशेष ध्यान देते हुए सहकारी निर्यात तंत्र को मजबूत करने के लिए दो महत्वपूर्ण समझौते किए हैं।
राष्ट्रीय सहकारी निर्यात लिमिटेड (NCEL) ने सहकारी क्षेत्र के कृषि निर्यात को बढ़ावा देने के लिए मार्कफेड पंजाब और लद्दाख के बागवानी विभाग के साथ समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। इन साझेदारियों का उद्देश्य वैश्विक बाजारों तक पहुंच बढ़ाना, मूल्य श्रृंखलाओं को मजबूत करना और क्षेत्र-विशिष्ट उत्पादों को बढ़ावा देना है, जिससे किसानों की आय में वृद्धि हो और भारत एक विश्वसनीय कृषि निर्यात केंद्र के रूप में उभरे।
24 मार्च 2026 को चंडीगढ़ में एनसीईएल ने मार्कफेड पंजाब के साथ राज्य के कृषि और संबद्ध उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए समझौता किया। इस MoU पर एनसीईएल के प्रबंध निदेशक अनुपम कौशिक और मार्कफेड पंजाब के प्रबंध निदेशक गिरीश दयालन ने हस्ताक्षर किए।
इस साझेदारी का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप गुणवत्ता सुधारना, वैश्विक बाजार तक पहुंच बढ़ाना और कुशल व टिकाऊ मूल्य श्रृंखलाएं विकसित करना है, जिससे किसानों को बेहतर मूल्य मिल सके। अधिकारियों के अनुसार, यह साझेदारी सहकारी नेटवर्क के माध्यम से निर्यात क्षमता को मजबूत करेगी और ग्रामीण आय में वृद्धि करेगी।
इससे पहले 19 मार्च 2026 को एनसीईएल ने नई दिल्ली स्थित मुख्यालय में लद्दाख के बागवानी विभाग के साथ एक अन्य MoU पर हस्ताक्षर किए। इस समझौते पर अनुपम कौशिक और लद्दाख के बागवानी निदेशक त्सेवांग पंचोक ने वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में हस्ताक्षर किए।

यह दीर्घकालिक सहयोग लद्दाख की सहकारी समितियों से निर्यात योग्य कृषि और संबद्ध उत्पादों की पहचान और प्रोत्साहन पर केंद्रित होगा। इसके तहत बाजार संपर्क, खरीद सहायता और क्षेत्र की विशेष परिस्थितियों के अनुरूप टिकाऊ एवं लाभकारी मूल्य श्रृंखलाएं विकसित की जाएंगी।
इस पहल के तहत लद्दाख के विशिष्ट उत्पादों जैसे खुबानी, ऊन, सीबकथॉर्न और उच्च ऊंचाई वाले जैविक उत्पादों को वैश्विक बाजार में प्रदर्शित किया जाएगा।
एनसीईएल भारत में सहकारी निर्यात के लिए एक प्रमुख संस्था के रूप में कार्य करती है। ये पहलें “सहकार से समृद्धि” के उसके संकल्प को दर्शाती हैं, जिसका उद्देश्य सीमावर्ती क्षेत्रों सहित देशभर में किसानों और सहकारी संस्थाओं को सशक्त बनाना और भारत को वैश्विक कृषि बाजार में एक विश्वसनीय आपूर्तिकर्ता के रूप में स्थापित करना है।

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