पश्चिम एशिया संकट से निपटने के लिए प्रधानमंत्री ने बनाए 7 एम्पावर्ड ग्रुप, आपूर्ति बनाए रखने पर जोर
पश्चिम एशिया में जारी संकट के असर से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने एक इंटर मिनिस्ट्रियल ग्रुप और सात एम्पावर्ड ग्रुप गठित किए हैं। ये समूह ईंधन, उर्वरक, सप्लाई चेन और महंगाई जैसे अहम क्षेत्रों पर नजर रखते हुए समाधान के लिए त्वरित कदम उठाएंगे।
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के दुष्प्रभाव से देश को बचाने के लिए केंद्र सरकार ने कोशिशें तेज कर दी हैं। ईरान युद्ध से पैदा हुए संकट को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सात सशक्त समूहों (एम्पावर्ड ग्रुप्स) के गठन की घोषणा की है, जो ईंधन, उर्वरक और अन्य आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति पर नजर रखेंगे और बाधाओं का समाधान सुनिश्चित करेंगे।
मंगलवार को राज्यसभा में अपने भाषण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि जैसे कोरोना काल में अलग-अलग सेक्टर्स की चुनौतियों से निपटने के लिए एक्सपर्ट्स और अधिकारियों के एम्पावर्ड ग्रुप बनाए गए थे, वैसे ही अब सात नए एम्पावर्ड ग्रुप गठित किए गए हैं। ये समूह सप्लाई चेन, पेट्रोल-डीजल, उर्वरक, गैस और महंगाई जैसे विषयों पर त्वरित और दीर्घकालिक रणनीति के तहत काम करेंगे। प्रधानमंत्री ने भरोसा जताया कि इन साझा प्रयासों से देश परिस्थितियों का बेहतर सामना कर पाएगा।
मौजूदा संकट से निपटने की रणनीति पर जानकारी देते हुए पीएम मोदी ने कहा कि सरकार शॉर्ट टर्म, मीडियम टर्म और लॉन्ग टर्म प्रभावों को ध्यान में रखते हुए काम कर रही है। भारत सरकार ने एक इंटर-मिनिस्ट्रियल ग्रुप भी बनाया है, जो नियमित रूप से बैठक कर आयात-निर्यात में आने वाली चुनौतियों का आकलन करता है और उनके समाधान पर काम करता है।
पीएम मोदी ने कहा कि वर्तमान संकट ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को झकझोर दिया है। पश्चिम एशिया में हुए नुकसान से उबरने में दुनिया को समय लगेगा। उन्होंने कहा कि भारत में इसका न्यूनतम असर हो, इसके लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने भरोसा जताया कि भारतीय अर्थव्यवस्था के फंडामेंटल्स मजबूत हैं और सरकार बदलते हालात पर लगातार नजर रखे हुए है।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, इन सात सशक्त समूहों का नेतृत्व सचिव स्तर के अधिकारी करेंगे। इनमें रणनीतिक मामलों, ऊर्जा, आर्थिक मामलों और आपूर्ति शृंखला, कृषि इनपुट, उपभोक्ता मामलों, परिवहन एवं लॉजिस्टिक्स, तथा संचार एवं जनसंपर्क जैसे क्षेत्र शामिल हैं।
आगामी खरीफ बुवाई सीजन को ध्यान में रखते हुए किसानों को पर्याप्त उर्वरक उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक तैयारियां की जा रही हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार का प्रयास है कि किसी भी संकट का बोझ किसानों पर न पड़े। उन्होंने किसानों को आश्वस्त किया कि सरकार हर चुनौती के समाधान के लिए उनके साथ खड़ी है।
राज्यसभा में बोलते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध ने वैश्विक ऊर्जा संकट को जन्म दिया है, जो भारत के लिए भी चिंता का विषय है। इस युद्ध के कारण व्यापार मार्ग प्रभावित हो रहे हैं, जिससे पेट्रोल, डीजल, गैस और उर्वरक जैसी आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति पर असर पड़ रहा है। होर्मुज स्ट्रेट में कई जहाज फंसे हुए हैं, जिनमें बड़ी संख्या में भारतीय क्रू मेंबर्स शामिल हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत ने पिछले 11 वर्षों में ऊर्जा आयात के स्रोतों का विविधीकरण किया है। पहले जहां क्रूड ऑयल, एलएनजी और एलपीजी जैसी जरूरतों के लिए 27 देशों से आयात होता था, वहीं अब यह संख्या बढ़कर 41 देशों तक पहुंच गई है। देश में 53 लाख मीट्रिक टन से अधिक का स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व भी विकसित किया गया है।
प्रधानमंत्री ने देशवासियों से हर चुनौती के लिए तैयार रहने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि इस युद्ध के दुष्प्रभाव लंबे समय तक रह सकते हैं। कोरोना संकट के दौरान केंद्र और राज्यों ने मिलकर ‘टीम इंडिया’ के रूप में जिस तरह कोविड प्रबंधन का सफल मॉडल पेश किया था, उसी भावना के साथ काम करने की जरूरत है। उन्होंने भरोसा जताया कि केंद्र और राज्य सरकारों के संयुक्त प्रयासों से देश इस वैश्विक संकट का प्रभावी तरीके से सामना करेगा।

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