वैश्विक चुनौतियों के बीच 2025-26 में भारत का कृषि निर्यात बढ़कर 52.55 अरब डॉलर पर पहुंचा
वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का कृषि निर्यात 2.8% बढ़कर 52.55 अरब डॉलर तक पहुंच गया। इसमें मूल्य संवर्धित उत्पादों, फलों और प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों का अहम योगदान रहा। तिलहन और काजू जैसे विशिष्ट क्षेत्रों में भी मजबूत प्रदर्शन रहा।
वित्त वर्ष 2025-26 में भारत के कृषि निर्यात में वृद्धि दर्ज की गई और यह बढ़कर 52.55 अरब अमेरिकी डॉलर हो गया। यह पिछले वर्ष के 51.12 अरब डॉलर से 2.8 प्रतिशत अधिक है। वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, यह वृद्धि ऐसे समय में हुई है जब वैश्विक व्यापार अनिश्चितताओं से जूझ रहा है। निर्यात में यह वृद्धि पारंपरिक कृषि उत्पादों के साथ-साथ उच्च मूल्य और उभरते उत्पादों के योगदान से संभव हुआ।
कृषि और संबद्ध उत्पाद निर्यात का मुख्य आधार बने रहे, जबकि समुद्री और बागान (प्लांटेशन) उत्पादों ने अतिरिक्त गति प्रदान की। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बेहतर मूल्य प्राप्ति और भारतीय कृषि उत्पादों की निरंतर मांग का संकेत मिलता है।
कृषि एवं संबद्ध श्रेणी के भीतर कई वस्तुओं ने निर्यात वृद्धि में योगदान दिया, विशेष रूप से मूल्य संवर्धित और उभरते उत्पादों का प्रदर्शन उल्लेखनीय रहा। दलहन निर्यात में 21.83 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई और यह बढ़कर 94.81 करोड़ डॉलर हो गया।
ताजे फलों का निर्यात भी अच्छा रहा और इसमें 12.89 प्रतिशत की वृद्धि हुई। इसका निर्यात वित्त वर्ष के दौरान 1.32 अरब डॉलर तक पहुंच गया। इस वृद्धि का मुख्य कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्थिर मांग और आपूर्ति श्रृंखला में सुधार को माना जा रहा है।
वनस्पति तेलों का निर्यात 15.88 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 73.21 करोड़ डॉलर तक पहुंच गया। वहीं, प्रसंस्कृत एवं मूल्य संवर्धित खाद्य उत्पादों में सीरियल प्रिपरेशन 7.8 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 1.01 अरब डॉलर के पार पहुंच गए। यह रुझान उच्च मूल्य वाले कृषि निर्यात की ओर बढ़ते झुकाव को दर्शाता है।
भारत के निर्यात पोर्टफोलियो को कई विशिष्ट और उच्च मूल्य वाले उत्पादों ने मजबूती दी है। काजू निर्यात में 12.21 प्रतिशत की वृद्धि हुई और यह 37.951 डॉलर तक पहुंच गया, जबकि कोको उत्पादों का निर्यात 7.59 प्रतिशत बढ़कर 31.79 डॉलर हो गया।
हालांकि चावल निर्यात में 7.5 प्रतिशत की गिरावट आई है। डीजीसीआईएस पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार अप्रैल 2025 से मार्च 2026 के दौरान कुल 11.53 अरब डॉलर का चावल निर्यात किया गया, जबकि पिछले साल इसका निर्यात 12.47 अरब डॉलर का था। तंबाकू, मसाले, ऑयल मील और तिलहन निर्यात भी कम हुआ है।
गेहूं का निर्यात भले ही सीमित मात्रा में हुआ, लेकिन यह बढ़कर 1.03 करोड़ डॉलर तक पहुंच गया, जो कुछ चुनिंदा अंतरराष्ट्रीय बाजारों में मांग के फिर से बढ़ने का संकेत है। प्रसंस्कृत खाद्य श्रेणी का प्रदर्शन भी उल्लेखनीय रहा। विविध प्रसंस्कृत उत्पादों का निर्यात 1.71 अरब डॉलर तक पहुंच गया। यह भारत के निर्यात में मूल्य संवर्धन और खाद्य प्रसंस्करण के बढ़ते महत्व को दर्शाता है। वित्त वर्ष के दौरान टेक्सटाइल निर्यात 2.1 प्रतिशत बढ़ा है। यह 3.09 लाख करोड़ से बढ़कर 3.16 लाख करोड़ रुपये हो गया।

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