बारिश और ओलावृष्टि से कई राज्यों में फसलों को नुकसान, किसानों को मुआवजे की मांग

अप्रैल के पहले सप्ताह में सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ के कारण मौसम में अचानक बदलाव हुआ। उत्तर, मध्य व पश्चिमी भारत में बारिश और ओलावृष्टि की तीव्र घटनाएं देखी जा रही हैं। राजस्थान, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में फसलों को काफी नुकसान पहुंचा है और किसानों को तुरंत मुआवजे की मांग उठ रही है।

बारिश और ओलावृष्टि से कई राज्यों में फसलों को नुकसान, किसानों को मुआवजे की मांग

देश के कई राज्यों में बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया है। खासकर गेहूं, सरसों, चना और सब्जियों की फसलें बड़े पैमाने पर प्रभावित हुई हैं। असामान्य मौसम की मार कटाई के लिए तैयार खड़ी फसलों पर पड़ी है।

भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) के कारण उत्तर, मध्य और पश्चिमी भारत के बड़े हिस्सों में बारिश और ओलावृष्टि हुई है। राजस्थान, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में फसलों को काफी नुकसान पहुंचा है। फसलों के भीगने से उपज की गुणवत्ता प्रभावित होती है, जिससे किसानों को मंडी में उचित कीमत मिलने में दिक्कत आती है।

राज्यों में नुकसान की स्थिति

राजस्थान: जयपुर, बीकानेर, श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, जोधपुर, अजमेर, चूरू और सीकर सहित कई जिलों में ओलावृष्टि से गेहूं, सरसों, इसबगोल और जीरा की फसल को नुकसान पहुंचा है। कुछ इलाकों में कटाई के लिए तैयार फसलें पूरी तरह बर्बाद हो गईं। कई क्षेत्रों में भारी ओलावृष्टि के कारण खेतों में बर्फ जैसी सफेद चादर बिछ गई, जिसे देखकर लोग आश्चर्यचकित हैं। 

महाराष्ट्र: बारिश और ओलावृष्टि से राज्य में लगभग 1.22 लाख हेक्टेयर क्षेत्र की फसल प्रभावित हुई है। उत्तरी महाराष्ट्र (नासिक, अहमदनगर आदि) में करीब 64,151 हेक्टेयर खेती को नुकसान पहुंचा है। नासिक, जलगांव, अहिल्यानगर और बुलढाणा जैसे जिलों में अंगूर, आम, प्याज और केले के बागानों को भारी क्षति हुई है।

उत्तर प्रदेश: कई जिलों में गेहूं और सरसों की फसलें गिर गई हैं। राज्य के 17 जिलों में 4,000 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में नुकसान दर्ज किया गया है। तेज हवाओं, बारिश और ओलावृष्टि के कारण गेहूं की फसल खेतों में बिछ गई है, जिससे दाने के सिकुड़ने और काला पड़ने की आशंका है।

हरियाणा और पंजाब: हिसार, जींद और अन्य क्षेत्रों में ओलावृष्टि से गेहूं और सरसों की खड़ी फसलें चपटी हो गई हैं। पंजाब में 4 अप्रैल के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है।

अन्य राज्य: बिहार, मध्य प्रदेश और आंध्र प्रदेश में भी स्थानीय स्तर पर नुकसान की खबरें सामने आई हैं।

ग्रामीण इलाकों से मिली रिपोर्टों के अनुसार, कई जगहों पर 30 से 40 प्रतिशत तक फसल खराब होने की आशंका जताई जा रही है। गेहूं की फसल, जो इस समय पककर तैयार थी, ओलों की मार से जमीन पर बिछ गई है या कटाई के दौरान भीग गई है। वहीं, सरसों की फलियां टूटने से उत्पादन में गिरावट की संभावना है। मंडियों में भी उपज के भीगने से किसानों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। 

गेहूं उत्पादन पर असर

व्यापारियों और किसानों के अनुसार, 2026 में गेहूं उत्पादन पिछले साल से अधिक रह सकता है, लेकिन शुरुआती अनुमानों के मुकाबले कम रहने की संभावना है। मार्च की शुरुआत में पड़ी अत्यधिक गर्मी से फसल प्रभावित हुई थी, और पिछले दो सप्ताह से बारिश व ओलावृष्टि की मार पड़ रही है। इससे गेहूं उत्पादन प्रभावित हो सकता है।

मुआवजे की मांग

किसान नेता राकेश टिकैत का कहना है कि देशभर में बेमौसम वर्षा और ओलावृष्टि से फसलों को भारी नुकसान हुआ है। यह किसानों के लिए आर्थिक और अन्न, दोनों रूपों में बड़ी क्षति है। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकारों से मांग की है कि खेत को इकाई मानते हुए सर्वे कराकर किसानों को उचित मुआवजा दिया जाए।

राज्य सरकारों ने प्रभावित क्षेत्रों में फसल नुकसान का आकलन करने के लिए टीमों को भेजने की बात कही है। कुछ राज्यों ने अंतरिम राहत देने की घोषणा भी की है, लेकिन किसानों की मांग है कि जमीनी स्तर पर सहायता जल्द पहुंचनी चाहिए।

मौसम का पूर्वानुमान

मौसम विभाग के अनुसार, उत्तर-पश्चिमी भारत में सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ के कारण बारिश और ओलावृष्टि का दौर 4 अप्रैल को भी जारी रहने की प्रबल संभावना है। इस सप्ताह एक और पश्चिमी विक्षोभ उत्तर-पश्चिमी भारत को प्रभावित कर सकता है, जिसकी तीव्रता 7 और 8 अप्रैल को चरम पर रहने की संभावना है। 4 अप्रैल को कश्मीर घाटी में कुछ स्थानों पर भारी बारिश हो सकती है।

मध्य, पूर्वी और प्रायद्वीपीय भारत में 8 अप्रैल तक गरज और बिजली कड़कने के साथ बारिश के आसार हैं। साथ ही, 4 अप्रैल को मराठवाड़ा, मध्य महाराष्ट्र, विदर्भ, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में; 7 और 8 अप्रैल को पश्चिम बंगाल, सिक्किम और बिहार में; तथा 5 से 7 अप्रैल, 2026 के दौरान झारखंड में कुछ स्थानों पर ओलावृष्टि होने की संभावना है। अगले 7 दिनों के दौरान देश के अधिकांश हिस्सों में दिन का तापमान सामान्य से कम या सामान्य के आसपास रहने की संभावना है।

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