होर्मुज संकट से कच्चे तेल और एलपीजी आपूर्ति पर गहरा असर, वैश्विक ऊर्जा बाजार में बढ़ी चिंता: आईईए

अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (आईईए) ने चेतावनी दी है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जारी तनाव के कारण कच्चे तेल और एलपीजी की वैश्विक आपूर्ति गंभीर रूप से प्रभावित हुई है। खाड़ी देशों से निर्यात में भारी गिरावट के चलते ईंधन बाजार में संकट गहराया है, जिससे कीमतों, उद्योगों, कृषि और घरेलू रसोई गैस आपूर्ति पर दबाव बढ़ रहा है।

होर्मुज संकट से कच्चे तेल और एलपीजी आपूर्ति पर गहरा असर, वैश्विक ऊर्जा बाजार में बढ़ी चिंता: आईईए

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के आसपास जारी तनाव के कारण मध्य-पूर्व से कच्चे तेल और एलपीजी की आपूर्ति में भारी गिरावट आने से वैश्विक ऊर्जा बाजार हाल के वर्षों के सबसे गंभीर संकटों में से एक का सामना कर रहा है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (आईईए) की नवीनतम “ऑयल मार्केट रिपोर्ट” में यह चेतावनी दी गई है। आईईए के अनुसार युद्ध शुरू होने के बाद से वैश्विक तेल आपूर्ति में 1.28 करोड़ बैरल प्रतिदिन (mb/d) की भारी गिरावट आई है। केवल अप्रैल में वैश्विक आपूर्ति में 18 लाख बैरल प्रतिदिन की अतिरिक्त कमी दर्ज की गई और यह घटकर 9.51 करोड़ बैरल प्रतिदिन रह गई। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बंद रहने से संकट और गहरा गया है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि फरवरी के बाद से खाड़ी क्षेत्र से कच्चे तेल और कंडेनसेट की लोडिंग लगभग एक करोड़ बैरल प्रतिदिन कम हो गई है। इससे विशेष रूप से एशिया-प्रशांत क्षेत्र के आयातक देशों को वैकल्पिक आपूर्ति स्रोत तलाशने पड़ रहे हैं। हालांकि अमेरिका, ब्राजील, वेनेजुएला और कुछ अफ्रीकी ओपेक+ देशों ने उत्पादन बढ़ाने की कोशिश की है, लेकिन आईईए के मुताबिक यह वृद्धि मध्य-पूर्व में हुई भारी कमी की भरपाई के लिए पर्याप्त नहीं है।

एलपीजी बाजार में स्थिति और अधिक गंभीर हो गई है। आईईए ने कहा कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते मध्य-पूर्व से एलपीजी निर्यात में भारी गिरावट के कारण वैश्विक प्रोपेन और ब्यूटेन बाजार में जबरदस्त दबाव पैदा हो गया है।

वर्ष 2025 में खाड़ी देश स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के जरिए प्रतिदिन लगभग 15 लाख बैरल एलपीजी, खासकर एशियाई बाजारों को, निर्यात कर रहे थे। लेकिन अप्रैल में यह आपूर्ति घटकर केवल 2.7 लाख बैरल प्रतिदिन रह गई, जिसमें अधिकांश हिस्सा ईरान से आया। सऊदी अरब के यनबू बंदरगाह से अतिरिक्त आपूर्ति के बावजूद वैश्विक बाजार में लगभग 10 लाख बैरल प्रतिदिन की कमी बनी हुई है, जिसकी भरपाई अन्य निर्यातक देश अब तक नहीं कर पाए हैं।

इस संकट के बीच अमेरिका सबसे बड़ा वैकल्पिक आपूर्तिकर्ता बनकर उभरा है। अमेरिकी एलपीजी निर्यात में 4.5 लाख बैरल प्रतिदिन की वृद्धि हुई, जो 2025 के औसत से 20 प्रतिशत अधिक है। इससे अमेरिका का कुल एलपीजी निर्यात बढ़कर 27 लाख बैरल प्रतिदिन पहुंच गया, जो वैश्विक समुद्री एलपीजी आपूर्ति का 69 प्रतिशत है। आईईए ने कहा कि अमेरिका में मजबूत घरेलू उत्पादन के कारण निर्यात बढ़ने के बावजूद वहां के भंडार पर अधिक दबाव नहीं पड़ा है।

हालांकि रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि वैश्विक लॉजिस्टिक और बुनियादी ढांचे की सीमाओं के कारण मध्य-पूर्व से हुई कमी की पूरी भरपाई संभव नहीं हो पा रही है। निर्यात टर्मिनलों की क्षमता सीमित है। आईईए ने आगाह किया कि प्लास्टिक और फाइबर की कमी, जो पहले ही खाड़ी देशों से निर्यात में गिरावट के कारण बढ़ गई है, आने वाले समय में विनिर्माण, कृषि और निर्माण क्षेत्र पर भी असर डाल सकती है क्योंकि वैश्विक भंडार लगातार घट रहे हैं।

रिपोर्ट में भारत को उन देशों में शामिल बताया गया है जो एलपीजी संकट से सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं। इसके मुताबिक अप्रैल में भारत में एलपीजी आयात जनवरी-फरवरी के मुकाबले 40 प्रतिशत से अधिक घट गया, जबकि अमेरिका से आयात बढ़ा था। भारत में एलपीजी का अधिकांश उपयोग घरेलू और व्यावसायिक खाना पकाने में होता है, इसलिए इसका असर उपभोक्ताओं पर तेजी से पड़ा। आईईए के अनुसार अप्रैल में भारत की एलपीजी मांग में 16 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।

आईईए ने कहा कि यदि संघर्ष लंबा खिंचता है तो एशिया और अफ्रीका के अन्य देशों में भी ऐसी स्थिति पैदा हो सकती है, क्योंकि एलपीजी दुनिया में सबसे अधिक इस्तेमाल होने वाला खाना पकाने का ईंधन है।

रिपोर्ट के मुताबिक, एशियाई देशों द्वारा कच्चे तेल के आयात में कटौती और वैश्विक भंडार से रिकॉर्ड स्तर पर तेल निकासी ने फिलहाल कीमतों और आपूर्ति संकट के प्रभाव को कुछ हद तक कम किया है। लेकिन आईईए ने चेतावनी दी है कि जैसे-जैसे भंडार घटेंगे, आपूर्ति संकट और गहराएगा तथा रिफाइनरियों पर परिचालन दबाव बढ़ेगा।

आईईए का अनुमान है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जून की शुरुआत तक प्रभावी रूप से बंद रह सकता है। इसके बाद बारूदी सुरंग हटाने और बुनियादी ढांचे की मरम्मत के बावजूद व्यापार और निर्यात व्यवस्था को सामान्य होने में दो से तीन महीने और लग सकते हैं।

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