आईपीएल बायोलॉजिकल्स ने वडोदरा में शुरू किया जैव उत्पाद संयंत्र, रासायनिक उर्वरकों का विकल्प देने पर जोर
आईपीएल बायोलॉजिकल्स लिमिटेड ने गुजरात के वडोदरा में रुपये 200 करोड़ के निवेश से अपने तीसरे जैव उत्पाद संयंत्र का उद्घाटन किया है। कंपनी का कहना है कि रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने और टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देने की दिशा में यह संयंत्र महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
वडोदरा। जैव उर्वरक कंपनी आईपीएल बायोलॉजिकल्स लिमिटेड ने गुरुवार को गुजरात के वडोदरा में रुपये 200 करोड़ के निवेश से अपने तीसरे जैव उत्पाद संयंत्र का उद्घाटन किया। यह संयंत्र 400 करोड़ रुपये की व्यापक परियोजना का पहला चरण है।
आयात पर निर्भर रासायनिक उर्वरकों का उपयोग घटाने की केंद्र सरकार की कोशिशों को आईपीएल बायोलॉजिकल्स बड़े अवसर के तौर पर देख रही है और नए संयंत्र के जरिए कंपनी का प्रयास जैव उर्वरक, जैव कीटनाशक और फसल सुरक्षा से जुड़े अन्य उत्पादों का उत्पादन बढ़ाने पर है।
वडोदरा में संयंत्र के उद्घाटन समारोह में कंपनी के ब्रांड एंबेसडर और क्रिकेटर युवराज सिंह, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य सुरेश सोनी, पर्यावरणविद् गोपाल आर्य, प्रगतिशील किसान, वैज्ञानिक और कंपनी के वितरक मौजूद रहे।
12 एकड़ क्षेत्र में फैले लगभग 2 लाख वर्ग फुट निर्मित क्षेत्र वाले इस संयंत्र के साथ आईपीएल बायोलॉजिकल्स की कुल उत्पादन क्षमता बढ़कर 70,000 लीटर प्रतिदिन हो गई है। संयंत्र में पूरी तरह स्वचालित उत्पादन लाइन, ऑटोमेटिक हार्वेस्टिंग और ट्रांसफर सिस्टम लगाए गए हैं। यह इकाई जीरो-लिक्विड-डिस्चार्ज (ZLD) प्रणाली पर आधारित है, जिसमें समूचे अपशिष्ट जल को रिसाइकिल किया जाता है और 500 किलोवाट सौर ऊर्जा का उत्पादन भी होता है।

आईपीएल बायोलॉजिकल्स ने इस विस्तार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की राष्ट्रीय अपील के अनुरूप बताया है, जिसमें उन्होंने रासायनिक उर्वरकों के उपयोग को कम कर प्राकृतिक खेती और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाने पर जोर दिया गया है।
आईपीएल बायोलॉजिकल्स लिमिटेड के अध्यक्ष हर्षवर्धन भगचंदका ने कहा कि कंपनी के पास जैव उर्वरकों और जैव कीटनाशकों के उत्पादन के क्षेत्र में तीन दशक का अनुभव है और इस अनुभाव का लाभ उठाते हुए नए संयंत्र के जरिए क्षमता विस्तार किया गया है। इस पर करीब 200 करोड़ रुपये का निवेश हुआ है और अगले चरण में लगभग इतना ही निवेश प्रस्तावित है।

हर्षवर्धन भगचंदका का कहना है कि देश में रासायनिक उर्वरकों के उपयोग में 50 फीसदी तक कमी लाने के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आह्वान हमारी मिट्टी, स्वास्थ्य और देश के लिए बेहद आवश्यकता है। इसके लिए हमें ऐसे एक-दो नहीं बल्कि 8-10 संयंत्र लगाने पड़ सकते हैं। ताकि किसानों को उन्नत और पर्यावरण-अनुकूल जैविक समाधान उपलब्ध कराए जा सकें और खेती को टिकाऊ व लाभकारी बनाया जा सके।
कंपनी के ब्रांड एंबेसडर क्रिकेटर युवराज सिंह ने कहा, “हमारे किसान ही असली चैंपियन हैं और यह विश्वस्तरीय संयंत्र किसानों को मिट्टी की सेहत और बेहतर उत्पादन बनाए रखने हेतु श्रेष्ठ जैविक उत्पाद उपलब्ध कराएगा।” युवराज सिंह ने पंजाब में रासायनिक उर्वरकों के बढ़ते इस्तेमाल को लेकर भी चिंता जताई।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सुरेश सोनी ने मिट्टी की उर्वरता और लोगों के स्वास्थ्य की रक्षा के लिए रासायनिक उर्वरकों का इस्तेमाल कम से कम करने और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने पर जोर दिया। उन्होंने उम्मीद जताई कि आईपीएल बायोलोजिकल्स के प्रयास इस दिशा में मददगार साबित होंगे।
आईपीएल बायोलॉजिकल्स लिमिटेड के सीएमडी महेश भगचंदका ने कहा कि रासायनिक उर्वरकों के उपयोग में कमी केवल पर्यावरण के लिए जरूरी नहीं है, बल्कि यह आज के समय की बड़ी आवश्यकता है। यदि आयातित रासायनिक उर्वरकों की जगह उन्नत जैव उर्वरकों का उपयोग बढ़ाया जाए तो इससे किसानों की लागत और देश पर उर्वरक सब्सिडी का बोझ कम किया जा सकता है, साथ ही मिट्टी की उर्वरता भी सुरक्षित रहेगी। इससे रासायनिक उर्वरकों के आयात पर निर्भरता घटेगी और विदेशी मुद्रा बचाने में भी मदद मिलेगी। उनका मानना है कि जैव उर्वरकों को बढ़ावा देने के लिए सरकारी से नीतिगत प्रोत्साहन मिलना जरूरी है।
माइक्रोबियल आधारित उत्पादों में 30 वर्षों से अधिक के अनुभव वाली आईपीएल बायोलॉजिकल्स 8,000 से अधिक वितरकों के नेटवर्क के माध्यम से 27 देशों के किसानों तक पहुंच बना चुकी है। कंपनी के टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन सेंटर में 50 से अधिक वैज्ञानिकों की टीम द्वारा विकसित 90 से अधिक उत्पादों का पोर्टफोलियो है। कंपनी के पास वर्तमान में 19 पेटेंट हैं, जबकि 37 अतिरिक्त पेटेंट प्रक्रियाधीन हैं।
कंपनी ने वित्त वर्ष 2025-26 में अपने कारोबार में 40 प्रतिशत वृद्धि दर्ज करते हुए इसे 290 करोड़ रुपये तक पहुंचाया है और अब भारत सहित वैश्विक बाजारों में विस्तार की योजना बना रही है। कंपनी के अन्य दो संयंत्र उत्तराखंड के हरिद्वार में स्थित हैं।

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