उत्पादन लागत से भी कम हुए प्याज के दाम, किसानों का बढ़ा संकट, निर्यात सब्सिडी बढ़ाने की मांग
ईरान युद्ध के कारण भारत से प्याज का निर्यात बाधित होने से घरेलू बाजार में प्याज के दाम किसानों की लागत से भी नीचे चले गए हैं। हालांकि बांग्लादेश को निर्यात और सरकारी खरीद के कारण दो हफ्ते से कीमतों में थोड़ा सुधार का रुख देखने को मिल रहा है, लेकिन खाड़ी देशों को प्याज निर्यात में अब भी मुश्किल आ रही है। ऐसे में किसान नेताओं ने सरकार से तत्काल हस्तक्षेप करते हुए निर्यात सब्सिडी बढ़ाने की मांग की है।
ईरान युद्ध के कारण भारत से प्याज का निर्यात बाधित होने से घरेलू बाजार में प्याज के दाम किसानों की लागत से भी नीचे चले गए हैं। हालांकि मलेशिया और श्रीलंका जैसे देशों को निर्यात और सरकारी खरीद के कारण दो हफ्ते से कीमतों में थोड़ा सुधार का रुख देखने को मिल रहा है, लेकिन खाड़ी देशों को प्याज निर्यात में अब भी मुश्किल आ रही है। ऐसे में किसान नेताओं ने सरकार से तत्काल हस्तक्षेप करते हुए किसानों की मदद करने और निर्यात सब्सिडी बढ़ाने की मांग की है।
कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के पोर्टल एग-मार्कनेट (agmarknet) पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार महाराष्ट्र की लासलगांव एपीएमसी में 9-15 अप्रैल 2026 को दाम 1098 रुपये प्रति क्विंटल रहे जबकि 1-8 अप्रैल 2026 को 1088 रुपये क्विंटल थे। महीने भर पहले, 9-15 मार्च 2026 को दुनिया की इस सबसे बड़ी प्याज मंडी में दाम करीब 927 रुपये क्विंटल और साल भर पहले 9-15 अप्रैल 2025 को 1100 रुपये क्विंटल थे। इस तरह, हफ्ते भर में कीमतों में एक प्रतिशत और महीने भर में 18.6 प्रतिशत का इजाफा हुआ है। हालांकि सालाना आधार पर दाम 0.2 प्रतिशत नीचे हैं।
महाराष्ट्र की दूसरी मंडियों की बात करें तो 9-15 अप्रैल के दौरान जामखेड़ मंडी में सबसे कम 600 रुपये क्विंटल तो हिंगणा मंडी में 1471 रुपये और कामथी मंडी में सबसे अधिक 1770 रुपये क्विंटल का भाव रहा। जामखेड़ में महीने भर पहले 613 रुपये, हिंगणा में 1382 रुपये और कामथी में 2290 रुपये क्विंटल का भाव था। इस तरह, कामथी मंडी में एक महीने में दाम 22.7 प्रतिशत गिरे हैं।
किसान संगठनों की सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग
स्वाभिमानी शेतकरी संघटना के अध्यक्ष और पूर्व लोकसभा सांसद राजू शेट्टी ने रूरल वॉयस को बताया कि प्याज की लागत लगभग 1500 रुपये प्रति क्विंटल है, जबकि भाव 900 रुपये तक गिर गए थे। अब रबी की फसल आने लगी है तो आने वाले दिनों में दाम और गिर सकते हैं। उन्होंने बताया कि बांग्लादेश को प्याज का निर्यात लगभग बंद है। फिलहाल मलेशिया और श्रीलंका को निर्यात किया जा रहा है। निर्यात बाधित होने से भी घरेलू बाजार में दाम में गिरावट आई है। उन्होंने बताया कि किसान अपने पास प्याज को होल्ड कर सकें, इसमें मदद के लिए सरकार को चिट्ठी लिखी है। लेकिन सरकार की तरफ से अभी तक कोई कदम नहीं उठाया गया है।
शेतकरी संघटना के पूर्व प्रेसिडेंट अनिल घनवत ने रूरल वॉयस को बताया कि दो हफ्ते पहले तक प्याज के दाम काफी गिर गए थे। हालांकि उसके बाद इसमें सुधार देखने को मिल रहा है। उन्होंने बताया कि नाफेड के जरिए सरकार दो लाख टन प्याज की खरीद कर रही है और बीज कंपनियां भी खरीद रही हैं। इसके अलावा सितंबर-अक्टूबर में दाम बढ़ने की आशंका के चलते ट्रेडर और किसान प्याज का स्टॉक कर रहे हैं। इन वजहों से भी दाम बढ़े हैं। घनवत ने बताया कि खाड़ी देशों को प्याज निर्यात की लागत बढ़ गई है, क्योंकि अब उन्हें लंबे रूट से प्याज भेजना पड़ रहा है। इसलिए निर्यात पर सब्सिडी की बढ़ाने की मांग की जा रही है।
सोशल मीडिया एक्स पर जारी एक बयान में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार) के नेता जयंत पाटिल ने कहा कि प्याज की उत्पादन लागत करीब 2,200 रुपये प्रति क्विंटल है, जबकि बाजार में किसानों को केवल 900 से 1,300 रुपये प्रति क्विंटल का भाव मिल रहा है। उन्होंने इसे किसानों के लिए “घाटे का सौदा” बताते हुए कहा कि ऐसी स्थिति में प्याज की खेती जारी रखना मुश्किल हो गया है।
पाटिल ने कहा कि एक तरफ युद्ध जैसी परिस्थितियों के कारण प्याज का निर्यात रुका हुआ है, वहीं दूसरी ओर बेमौसम बारिश ने फसल को नुकसान पहुंचाया है। इस दोहरे संकट ने किसानों को आर्थिक रूप से बुरी तरह जकड़ लिया है और उनमें निराशा बढ़ रही है।
उन्होंने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडनवीस से अपील की कि वे तुरंत हस्तक्षेप कर प्याज निर्यात को बढ़ावा देने के लिए प्रयास तेज करें और किसानों के लिए उचित न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) घोषित करें, ताकि उन्हें उनकी लागत के अनुरूप कीमत मिल सके।
थोक महंगाई के आंकड़ों में भी गिरे हुए भाव की पुष्टि
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय की तरफ से बुधवार को ही जारी थोक महंगाई के आंकड़ों में बताया गया है कि मार्च 2026 में प्याज के दाम एक साल पहले की तुलना में 42.11 प्रतिशत कम रहे। अप्रैल 2025 से मार्च 2026 तक पूरे वित्त वर्ष के दौरान तो प्याज की औसत कीमत 47.53 प्रतिशत कम रही है।
प्याज की थोक कीमतों में कम से कम छह महीने से गिरावट का माहौल है। सालाना आधार पर प्याज के दाम अक्टूबर 2025 में 66.06 प्रतिशत, नवंबर में 64.70 प्रतिशत, दिसबंर में 54.40 प्रतिशत, जनवरी 2026 में 33.42 प्रतिशत, फरवरी में 40.95 प्रतिशत और मार्च में 42.11 प्रतिशत कम रहे हैं। उपभोक्ता मंत्रालय के अनुसार करीब एक महीने से प्याज के खुदरा दाम 25 रुपये प्रति किलो से नीचे चल रहे हैं।

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