खाद्य प्रसंस्करण मंत्री ने पेश की भारत के मसाला उद्योग को दोगुना करने की रणनीति, गुणवत्ता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा पर जोर

केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री चिराग पासवान ने 'भारत स्पाइसेज कॉन्क्लेव 2026' में मसाला उद्योग को दोगुना करने की रणनीति पेश की। उन्होंने गुणवत्ता सुधार, वैल्यू एडिशन और निर्यात बढ़ाने पर जोर दिया। निर्यात की कुछ खेप लौटाए जाने के बीच उन्होंने वैश्विक भरोसा मजबूत करने और उद्योग को मूल्य-आधारित मॉडल की ओर ले जाने की आवश्यकता बताई।

खाद्य प्रसंस्करण मंत्री ने पेश की भारत के मसाला उद्योग को दोगुना करने की रणनीति, गुणवत्ता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा पर जोर

केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री चिराग पासवान ने शुक्रवार को पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (PHDCCI) द्वारा आयोजित “भारत स्पाइसेज कॉन्क्लेव 2026” का उद्घाटन किया और देश के मसाला क्षेत्र को विस्तार देने के लिए एक महत्वाकांक्षी रोडमैप पेश किया। उद्योग से जुड़े प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए पासवान ने कहा कि यह कॉन्क्लेव नवाचार, नीतिगत समन्वय और रणनीतिक विकास को बढ़ावा देने का एक महत्वपूर्ण मंच है। उन्होंने जोर दिया कि भारत को उत्पादन आधारित मॉडल से आगे बढ़कर वैल्यू एडिशन, बेहतर प्रोसेसिंग और वैश्विक बाजार से मजबूत जुड़ाव पर ध्यान देना होगा, ताकि इस क्षेत्र की पूरी क्षमता का उपयोग किया जा सके।

भारत के व्यापार इतिहास में मसालों की अहम भूमिका को रेखांकित करते हुए उन्होंने बताया कि देश 225 से अधिक मसालों और वैल्यू एडेड उत्पादों का निर्यात लगभग 200 देशों को करता है। घरेलू मसाला बाजार 10 अरब डॉलर से अधिक का है। भारत दुनिया का सबसे बड़ा मसाला उपभोक्ता है। इनका चार अरब डॉलर से अधिक का निर्यात होता है। प्रमुख निर्यात उत्पादों में मिर्च, जीरा, हल्दी, इलायची और मिश्रित मसाले शामिल हैं। चीन, अमेरिका और बांग्लादेश भारतीय मसालों के प्रमुख बाजार हैं।

हालांकि, पासवान ने गुणवत्ता को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों में अंतरराष्ट्रीय बंदरगाहों पर भारतीय मसालों की खेपों की वापसी बढ़ी है, जिसका कारण हानिकारक अवशेषों की मौजूदगी है। उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर भरोसा कायम करने के लिए गुणवत्ता में एकरूपता बेहद जरूरी है। एक बार खेप लौटने से वर्षों में बनी साख को नुकसान पहुंच सकता है।

मंत्री ने यह भी बताया कि 100% प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) और प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम औपचारिकीकरण योजना (PMFME) जैसी योजनाएं मूल्य श्रृंखला को मजबूत करने और उद्यमिता को बढ़ावा देने में सहायक हैं।

इस कॉन्क्लेव में सरकार और उद्योग के प्रमुख हितधारकों ने भाग लिया और मसाला क्षेत्र को मजबूत बनाने, निर्यात बढ़ाने और वैश्विक स्तर पर भारतीय मसालों की पहचान को सशक्त करने के लिए नीति, व्यापार और नवाचार से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की।

Subscribe here to get interesting stuff and updates!