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Harvir Singh
RuralVoice.in एक ऐसा मीडिया प्लेटफार्म है जो रुरल अर्बन के बीच के विभाजन के बीच सूचना की खाई को करने के साथ ग्रामीण भारत की खबरों और उसके लिए जरूरी सूचना को प्राथमिकता देने का काम करता है। यह एक नालेज आधारित नया मीडिया स्टार्ट- अप है। इसे एग्रीकल्चर, रुरल, इकोनामी, पालिटिक्स और बिजनेस रिपोर्टिंग के तीस साल के अनुभवी जर्नलिस्ट हरवीर सिंह ने शुरू किया है। प्रिंट, रेडियो, टीवी और डिजिटल मीडिया के माध्यमों में विभिन्न लीडरशिप स्तरों पर देश के बड़े मीडिया समूहों में काम करने का अनुभव उनके पास है। इसके पहले वह आउटलुक हिंदी के संपादक रहे हैं। वहीं उन्होंने मनी भास्कर के संपादक के रूप में और बिजनेस भास्कर के इकोनामिक एडिटर के रूप में दैनिक भास्कर समूह में काम किया। इसके अलावा वह दैनिक हिंदुस्तान और अमर उजाला समूह में सीनियर लीडरशिप पाजिशंस में रहे हैं। हरवीर सिंह के नेतृत्व में प्रोफेशनली ट्रेंड और कमिटेड जर्नलिस्ट्स की एक टीम इस संस्थान के लिए काम कर रही हैं। इस नेटवर्क को देश के अधिकांश हिस्सों तक ले जाने की योजना है। रिपोर्टिंग और लेखन का एक ही मूलमंत्र है कि यह किसी भी राजनीतिक, सामाजिक और धार्मिक पूर्वाग्रह से मुक्त होगा। RuralVoice.in के कंटेंट का केंद्र बिंदु ‘भारत’ यानी रुरल इंडिया रहेगा।
आर्थिक सर्वे में कृषि सुधारों की वकालत, उर्वरक असंतुलन पर चिंता, यूरिया के दाम बढ़ाने का सुझाव
आर्थिक सर्वेक्षण 2025–26 में कृषि सुधारों की जरूरत पर जोर देते हुए उर्वरक असंतुलन...
बजट 2026: कृषि के बेहतर भविष्य के लिए तात्कालिक राहत और दीर्घकालिक सुधारों का संतुलित समावेश जरूरी
केंद्रीय बजट 2026-27 कृषि क्षेत्र की तात्कालिक चुनौतियों को हल करने के लिए आत्मनिर्भरता,...
उर्वरक आत्मनिर्भरता पर बजट में हो सकता है विशेष मिशन का ऐलान
उर्वरकों पर बढ़ती आयात निर्भरता, सब्सिडी बोझ और मृदा स्वास्थ्य की चुनौतियों को देखते...
भारतीय कृषि में समावेशी विकास का मार्ग बन सकता है वेज कोड 2019
वेज कोड 2019 के न्यूनतम वेतन के प्रावधान से खासकर कम मजदूरी वाले राज्यों में कृषि...
त्रिपुरा से सहकारी कृषि निर्यात को बढ़ावा देने के लिए त्रिपुरा मार्कफेड और एनसीईएल के बीच समझौता
त्रिपुरा से सहकारी कृषि निर्यात को बढ़ावा देने के लिए त्रिपुरा मार्कफेड और नेशनल...
ईरान के साथ व्यापार पर ट्रंप टैरिफ और राजनीतिक अशांति से भारतीय बासमती निर्यात की मुश्किलें बढ़ीं
ईरान में राजनीतिक अशांति, मुद्रा संकट और डोनाल्ड ट्रंप की चेतावनी ने भारत के बासमती...
उत्पादन में बढ़ोतरी के बावजूद कृषि क्षेत्र में धीमी ग्रोथ, किसानों की आय न बढ़ने का संकेत
देश में कृषि उत्पादन तो बढ़ा है लेकिन कृषि उपजों के दाम गिरने से किसानों को इसका...
उर्वरक आयात पर बढ़ती भारत की निर्भरता: यूरिया आयात में 120 प्रतिशत उछाल, डीएपी 54 प्रतिशत बढ़ा
अप्रैल-नवंबर 2025 के दौरान डीएपी की 67 प्रतिशत और यूरिया की 27 प्रतिशत मांग आयात...
उत्तर प्रदेश: चीनी मिलों से 15 किमी के दायरे में नहीं लगेगी खांडसारी यूनिट, नीति में बदलाव से छोटे उद्योगों पर शिकंजा
उत्तर प्रदेश सरकार की खांडसारी लाइसेंसिंग नीति में जनवरी 2025 में किए गए अहम बदलावों...
अमेरिकी सरकार किसानों को देगी 12 अरब डॉलर का कृषि सहायता पैकेज, चावल और कपास के लिए सबसे ज्यादा मदद
अमेरिकी सरकार ने किसानों को बढ़ती लागत और बाजार अनिश्चितता से राहत देने के लिए 2026...
ड्यूटी-फ्री कपास आयात की समय-सीमा खत्म, 1 जनवरी से 11 प्रतिशत शुल्क लागू
पिछले कुछ महीनों में ड्यूटी-फ्री आयात के चलते चलते विदेशी कपास भारतीय बाजार में...
उम्मीदें 2026: कृषि नीतियों को उपभोक्ता नहीं, किसान केंद्रित बनाने का साल
केंद्र सरकार भले ही किसानों की आय को नीति का केंद्र बताती हो, लेकिन मौद्रिक नीति,...
2025 में कृषि: महंगाई पर काबू, रिकॉर्ड उत्पादन लेकिन किसानों की आय पर संकट
साल 2025 में अधिकांश फसलों के दाम एमएसपी से नीचे रहे, उर्वरकों की किल्लत और व्यापार...
कृषि मंडियों में 5 रुपये से नीचे गिरे आलू के दाम, लागत भी नहीं निकाल पा रहे किसान
उत्तर प्रदेश और हरियाणा के आलू उत्पादक क्षेत्रों में किसानों की उपज 5 रुपये किलो...
न्यूज़ीलैंड के साथ मुक्त व्यापार समझौते से सेब उत्पादक चिंतित, केंद्र ने हितों की रक्षा का भरोसा दिलाया
मौजूदा व्यवस्था के तहत न्यूज़ीलैंड से आयात होने वाले सेब पर 50 फीसदी सीमा शुल्क...
उत्तर प्रदेश में गन्ने का दाम 425 रुपये तक पहुंचा, चीनी मिलों के सामने केन प्राइस वार की स्थिति
कोल्हू और खांडसारी इकाइयां किसानों को 400 से 425 रुपये प्रति क्विंटल तक गन्ने का...

















